तमिलनाडु में 16 जुलाई तक तापमान सामान्य से 3-4°C अधिक, मानसून कमज़ोर; वेल्लोर में 41.7°C
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमज़ोर सक्रियता के कारण राज्यभर में भीषण गर्मी और उमस का दौर जारी है। चेन्नई स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी) के अनुसार, 16 जुलाई 2026 तक राज्य के अधिकतम तापमान में सामान्य से 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी बनी रह सकती है। जुलाई का आधा महीना बीत जाने के बावजूद मौसम का यह रुख राज्य के अधिकांश हिस्सों में आम जनजीवन को प्रभावित कर रहा है।
मुख्य तापमान आँकड़े
रविवार को तमिलनाडु के 14 स्थानों पर अधिकतम तापमान 37.8 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया। वेल्लोर राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा, जहाँ पारा 41.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचा। मदुरै एयरपोर्ट पर 41.1 डिग्री, मदुरै शहर में 40.6 डिग्री, तिरुत्तनी और चेन्नई के मीनंबक्कम में 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
तिरुचिरापल्ली और कुड्डालोर में 39.4 डिग्री, पलायमकोट्टई और चेन्नई के नुंगमबक्कम मौसम केंद्र में 38.9 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। नागपट्टिनम, इरोड, करूर परमथी, परंगीपेट्टई और नमक्कल में भी तापमान 38.6 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा।
मानसून की कमज़ोरी — कारण और असर
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की सुस्त रफ्तार के कारण राज्य के अधिकांश इलाकों में वर्षा सामान्य से कम दर्ज हो रही है। बादलों की अनुपस्थिति और बारिश न होने से दिन के समय सूर्य की सीधी किरणें ज़मीन को अधिक गर्म कर रही हैं, जिससे तापमान सामान्य स्तर से काफी ऊपर बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई अन्य राज्यों में मानसून सक्रिय है।
तटीय जिलों और पुडुचेरी में उमस की चेतावनी
आरएमसी ने विशेष रूप से तटीय जिलों और पुडुचेरी में उच्च तापमान के साथ अधिक नमी के संयोजन से भारी उमस की चेतावनी दी है। विभाग ने नागरिकों को दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच तेज धूप में बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहने की सलाह दी है। गर्मी से संबंधित बीमारियों के प्रति सतर्क रहने का भी आग्रह किया गया है।
राहत की उम्मीद कब
आरएमसी के अनुसार, मंगलवार को पश्चिमी घाट से सटे जिलों में हल्की बारिश की संभावना है, जिससे उन क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर कुछ राहत मिल सकती है। हालाँकि, मैदानी और तटीय क्षेत्रों में 16 जुलाई तक गर्म और उमस भरा मौसम बने रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की सक्रियता में सुधार के बिना राज्य में वास्तविक राहत मिलना कठिन होगा।