ट्रंप की ईरान को चेतावनी: 'पिकएक्स' परमाणु ठिकाने पर जल्द हमले के संकेत, बोले- 'हर गतिविधि पर नज़र'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 जुलाई 2026 को ईरान के परमाणु कार्यक्रम के विरुद्ध अपना सबसे कड़ा बयान दिया — संकेत दिया कि ईरान का भूमिगत परमाणु ठिकाना 'पिकएक्स माउंटेन' जल्द ही अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का निशाना बन सकता है। एक रेडियो साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि यह ठिकाना अमेरिका की संभावित हमलों की सूची में शामिल है और वहाँ की हर गतिविधि पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है।
क्या कहा ट्रंप ने
कंजर्वेटिव रेडियो होस्ट ह्यू हेविट को दिए साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, 'हमारी नज़र वहाँ हर समय बनी हुई है। पिकएक्स एक संभावित लक्ष्य है और इसके मुख्य प्रवेश द्वार पर एक बड़ा हमला किया जा सकता है।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'यह हमारी सूची में है। हम इसे बहुत करीब से देख रहे हैं। जब भी हमें किसी गतिविधि की जानकारी मिलती है, हम उसे नष्ट कर देते हैं।'
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम फिलहाल 'अच्छी स्थिति में नहीं है' और अमेरिकी दबाव के कारण ईरान अब इस विषय पर खुलकर बात करने से भी कतरा रहा है।
समझौते के टूटने का आरोप
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर बातचीत से पीछे हटने का सीधा आरोप लगाया। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच एक ऐसा समझौता लगभग तय हो चुका था जिसमें अमेरिका की सभी प्रमुख शर्तें मान ली गई थीं, लेकिन ईरान ने उसे तोड़ दिया। ट्रंप ने कहा, 'वे समझौते करते हैं, लेकिन उनके लिए समझौते तोड़ने के लिए ही होते हैं। वे बिल्कुल भरोसेमंद नहीं हैं।'
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान और P5+1 देशों के बीच परमाणु वार्ता के कई दौर बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो चुके हैं।
ईरानी नेतृत्व पर तीखा हमला
ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को 'पूरी तरह पागल लोग' बताते हुए दावा किया कि यदि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार आया तो वह एक दिन के भीतर उसका इस्तेमाल कर देगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की पारंपरिक सैन्य ताकत लगभग खत्म हो चुकी है — 'उनके पास न वायुसेना बची है, न नौसेना और न ही कोई बड़ी सैन्य क्षमता।'
जब उनसे ईरान के शीर्ष नेताओं के विरुद्ध संभावित कार्रवाई के बारे में पूछा गया तो ट्रंप ने सीधे जवाब देने से इनकार किया, हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि अमेरिका के पास विस्तृत खुफिया जानकारी मौजूद है।
व्हाइट हाउस में भी दोहराई चेतावनी
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपना रुख दोहराया — 'ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु क्षमता हासिल नहीं करने देगा।
बातचीत के दरवाज़े अभी बंद नहीं
सैन्य दबाव बढ़ाने के बयानों के बावजूद ट्रंप ने यह भी कहा कि कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि ईरान के साथ एक समझौता अब भी संभव है। गौरतलब है कि यह दोहरा संदेश — सैन्य खतरे के साथ-साथ बातचीत का द्वार खुला रखना — ट्रंप की ईरान नीति की पहचान बन चुका है। आने वाले हफ्तों में अमेरिका-ईरान संबंधों की दिशा वैश्विक कूटनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।