ईरान के उप विदेश मंत्री ने संसद में अमेरिका से परमाणु वार्ता और होर्मुज तनाव पर रिपोर्ट पेश की
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने 19 मई को तेहरान में राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के समक्ष अमेरिका के साथ जारी संघर्ष विराम वार्ता, उसकी शर्तों और ईरान की प्रमुख मांगों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका द्वारा दूसरे सैन्य हमले को फिलहाल टाले जाने की खबरें सामने आ रही हैं।
रिपोर्ट में क्या शामिल है
सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, रिपोर्ट में 'शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा और यूरेनियम संवर्धन के अधिकार' पर विशेष बल दिया गया। इसके साथ ही अमेरिकी नाकेबंदी और प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग को दोहराया गया।
रिपोर्ट में ईरान की ओर से निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गईं — सभी मोर्चों पर संघर्ष समाप्त करना, लेबनान सहित क्षेत्रीय युद्धों को खत्म करना, अमेरिका द्वारा लगाई गई समुद्री नाकेबंदी हटाना, ईरान की जब्त संपत्तियाँ और धनराशि वापस करना, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई, सभी एकतरफा प्रतिबंधों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों को रद्द करना, तथा ईरान के आसपास से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी।
होर्मुज स्ट्रेट पर नया विवाद
इस रिपोर्ट से ठीक एक दिन पहले, सोमवार को ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण के लिए एक नई प्राधिकरण संस्था के गठन का ऐलान किया। ईरान के अनुसार, अब इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को उसकी अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि होर्मुज से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस की आपूर्ति प्राप्त करता है।
संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता फरहान हक ने स्पष्ट किया कि होर्मुज में नौवहन की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, 'हम नहीं चाहते कि कोई संस्था होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही की स्वतंत्रता को सीमा में बांध दे।' संयुक्त राष्ट्र ने इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने पर जोर दिया है।
व्यापक कूटनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव वर्षों से बना हुआ है। 2018 में अमेरिका के JCPOA (संयुक्त व्यापक कार्य योजना) से बाहर निकलने के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध अत्यंत जटिल हो गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में क्षेत्रीय अस्थिरता अपने उच्चतम स्तर पर है।
विश्लेषकों के अनुसार, ईरान की मांगों की यह सूची वार्ता को और जटिल बना सकती है, क्योंकि इसमें न केवल परमाणु मुद्दे बल्कि क्षेत्रीय सैन्य उपस्थिति और आर्थिक प्रतिबंध जैसे बहुआयामी विषय शामिल हैं।
आगे क्या होगा
फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन किसी ठोस समझौते की कोई समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है। होर्मुज पर ईरान के नए दावे और संयुक्त राष्ट्र की आपत्ति के बाद आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ने की संभावना है।