ब्रिक्स बैठक में ईरान का यूएई पर बड़ा आरोप: 'सैन्य आक्रामकता में निभाई अहम भूमिका'
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने 14 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दूसरे सत्र में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर ईरान के विरुद्ध सैन्य आक्रामकता को समर्थन देने और सुगम बनाने का सीधा आरोप लगाया। यह बयान यूएई के विदेश राज्य मंत्री द्वारा ईरान पर लगाए गए आरोपों के जवाब में आया।
गरीबाबादी के मुख्य आरोप
काजेम गरीबाबादी ने कहा, 'संयुक्त अरब अमीरात ने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रामकता को समर्थन देने और उसे आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए जो पक्ष खुद तनाव पैदा करने और उसे बढ़ाने में शामिल रहा हो, उसे ईरान पर राजनीतिक आरोप लगाने का कोई अधिकार नहीं है।'
उन्होंने आगे कहा कि 'जब कोई देश आक्रमण करने वालों को सुविधाएं और मदद देता है, तो यह सिर्फ मदद नहीं होती, बल्कि खुद एक तरह की आक्रामकता होती है। इसलिए संयुक्त अरब अमीरात सिर्फ सहयोगी नहीं, बल्कि खुद एक आक्रामक पक्ष है।'
संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव और साक्ष्य का दावा
गरीबाबादी ने 1974 के संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रस्ताव का हवाला देते हुए दावा किया कि यूएई से उड़े प्रत्येक लड़ाकू विमान का समय, तारीख और उड़ान मार्ग सहित पूरा रिकॉर्ड उनके पास मौजूद है। भारत में ईरानी दूतावास के अनुसार, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को 120 आधिकारिक राजनयिक नोटिस दिए हैं, जिनमें सभी साक्ष्य संलग्न हैं।
गौरतलब है कि ईरानी दूतावास ने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की।
ईरान की कार्रवाई का औचित्य
गरीबाबादी ने कहा कि ईरान के नागरिकों और बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया जा रहा था, खासकर यूएई की भागीदारी और सहयोग के साथ, जिसके कारण ईरान को यूएई में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों या उन सुविधाओं को निशाना बनाना पड़ा जहाँ अमेरिका की भूमिका थी। उन्होंने इस कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आत्मरक्षा के अधिकार के अनुरूप बताया।
यूएई के आरोपों का संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब यूएई के विदेश राज्य मंत्री ने बैठक में ईरान पर यूएई पर हमला करने का आरोप लगाया था और ईरान को 'आक्रामक' बताया था। भारत में ईरानी दूतावास के अनुसार, गरीबाबादी के ये बयान उन्हीं 'बेबुनियाद' आरोपों के प्रत्युत्तर में थे।
क्या होगा आगे
ब्रिक्स मंच पर इस तीखी कूटनीतिक नोकझोंक ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव को वैश्विक मंच पर ला दिया है। ईरान और यूएई के बीच इस विवाद का असर ब्रिक्स देशों की सामूहिक स्थिति और भविष्य की वार्ताओं पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र में भी इस मुद्दे पर हलचल देखी जा सकती है।