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ईरान के खिलाफ खाड़ी देशों के प्रस्ताव को यूएनएससी ने किया पारित, तेहरान ने किया विरोध

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ईरान के खिलाफ खाड़ी देशों के प्रस्ताव को यूएनएससी ने किया पारित, तेहरान ने किया विरोध

सारांश

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव में ईरान द्वारा किए गए हमलों की निंदा की गई है, और तेहरान ने इसे दुरुपयोग करार दिया है। जानें इस महत्वपूर्ण समाचार के बारे में।

मुख्य बातें

यूएनएससी का प्रस्ताव खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की निंदा करता है।
तेहरान ने सुरक्षा परिषद के निर्णय को दुरुपयोग कहा है।
बहरीन ने प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें ईरान के हमलों का विवरण दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वाले कृत्यों की निंदा की गई है।
खाड़ी देशों में तनाव को कम करने के लिए संवाद की आवश्यकता है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने बुधवार को खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया। इसके बाद तेहरान ने सुरक्षा परिषद के दुरुपयोग की आलोचना की। यह प्रस्ताव बहरीन द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें ईरान के हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों की निंदा की गई।

बहरीन के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि जमाल फारिस अलरोवैई ने कहा कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों ने 954 से अधिक मिसाइलों, 2,500 ड्रोन और 17 विमानों को इंटरसेप्ट किया। उन्होंने कहा कि तेहरान के खिलाफ सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि जीसीसी देशों पर हुए ये हमले व्यापार और समुद्री मार्गों को बाधित कर रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ईरान ने इन हमलों में आवासीय इमारतों, खाद्य वितरण केंद्रों, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण नागरिक ढांचे को निशाना बनाया।

संयुक्त अरब अमीरात के स्थायी प्रतिनिधि मोहम्मद अबूशहाब ने कहा कि यूएई ने स्पष्ट किया है कि उसकी जमीन, हवाई क्षेत्र और क्षेत्रीय जल का उपयोग ईरान पर हमले के लिए नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद तेहरान ने उनके देश को निशाना बनाया। यूएई ने अपने रक्षा संसाधनों का उपयोग कर इन हमलों का सामना किया है। उन्होंने बताया कि 25 देशों के नागरिक ईरानी हमलों से प्रभावित हुए हैं।

प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की निंदा की गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि ऐसे कृत्य अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हैं और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे का संकेत हैं। बहरीन ने ईरान द्वारा इन देशों पर हमले तुरंत रोकने की मांग की। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत व्यक्तिगत और सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार पर भी बल दिया गया।

इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के क्षेत्रों में नागरिकों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक जहाजों को जानबूझकर निशाना बनाने की कड़ी आलोचना की गई है।

पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि 28 फरवरी को ईरान द्वारा किए गए हमलों ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को गंभीर रूप से खतरे में डाल दिया है।

उन्होंने कहा कि यूएई पर हुए हमलों में कम से कम दो पाकिस्तानी नागरिकों की जान गई और खाड़ी देशों में लाखों अन्य पाकिस्तानी खतरे में हैं। ईंधन की आपूर्ति और आवश्यक विमानन संपर्क भी बाधित हो गए हैं।

उन्होंने कहा, "हम शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए बातचीत और कूटनीति की ओर शीघ्र लौटने का आह्वान करते हैं।" फ्रांस के प्रतिनिधि जेरोम बोनाफोंट ने आरोप लगाया कि वर्तमान तनाव बढ़ने के लिए ईरान काफी हद तक जिम्मेदार है। फ्रांस लंबे समय से ईरान के परमाणु खतरों से चिंतित रहा है।

बहरीन का यह प्रस्ताव सुरक्षा परिषद ने 13 वोटों से पारित किया, जबकि चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करते हुए कहा कि वह इन हमलों से अछूता नहीं है। सुरक्षा परिषद ने ईरान के साथ संवाद को सुगम बनाने और विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने के उद्देश्य से जीसीसी देशों और अन्य क्षेत्रीय पक्षों के मध्यस्थता प्रयासों को भी स्वीकार किया।

साथ ही आगे तनाव बढ़ने से रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मध्य पूर्व में स्थिरता और शांति को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और खाड़ी राज्यों और जॉर्डन की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए अपने समर्थन को दोहराया।

इससे पहले रूस ने मध्य पूर्व में सैन्य तनाव बढ़ने पर एक मसौदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, जिसमें सभी पक्षों से अपनी सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकने और आगे तनाव बढ़ाने से बचने का आग्रह किया गया था, लेकिन अमेरिका ने इसे वीटो कर दिया।

रूस के इस प्रस्ताव के पक्ष में रूस, चीन, सोमालिया और पाकिस्तान के चार मत प्राप्त हुए, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और लातविया ने इसके विरुद्ध मतदान किया। यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, बहरीन, कोलंबिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, डेनमार्क, ग्रीस, लाइबेरिया और पनामा सहित नौ सदस्यों ने मतदान से परहेज किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

यूएनएससी का यह प्रस्ताव ईरान के बढ़ते सैन्य आक्रामकता के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है। सभी देशों को मिलकर इस समस्या का समाधान खोजना होगा ताकि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता कायम रहे।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएनएससी ने कौन सा प्रस्ताव पारित किया?
यूएनएससी ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया।
तेहरान ने प्रस्ताव के बारे में क्या कहा?
तेहरान ने इसे सुरक्षा परिषद के दुरुपयोग के रूप में निंदा की।
बहरीन ने प्रस्ताव में क्या उल्लेख किया?
बहरीन ने ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की निंदा की।
ईरान पर हमलों से कौन प्रभावित हुआ?
ईरानी हमलों से 25 देशों के नागरिक प्रभावित हुए हैं।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य क्या है?
इस प्रस्ताव का उद्देश्य ईरान के आक्रामक व्यवहार को रोकना और क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देना है।
राष्ट्र प्रेस
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