12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से हमलों को रोकने का किया आह्वान
सारांश
Key Takeaways
- ईरान की सैन्य गतिविधियाँ क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रही हैं।
- 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से हमले रोकने की अपील की है।
- कतर ने ईरानी हमले को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उल्लंघन बताया है।
- संप्रभुता का सम्मान करना ईरान के साथ संबंधों के भविष्य के लिए आवश्यक है।
- गैर-जिम्मेदाराना तरीके से संघर्ष बढ़ाना अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है।
नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने अनेक देशों की स्थिति को संकट में डाल दिया है। इजरायल द्वारा ईरान के प्रमुख गैस संयंत्र साउथ पार्स फील्ड पर हमले के जवाब में, ईरान ने कतर और संयुक्त अरब अमीरात के गैस संयंत्रों पर भी हमले किए हैं। इस स्थिति के बीच, 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान के इस आक्रमण की कड़ी निंदा की और इसे तुरंत रोकने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील की।
रियाद में गुरुवार को आयोजित मीटिंग में जारी एक संयुक्त बयान में, इन देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से हमले बंद करने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की मांग की।
यह बयान अजरबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्किए और संयुक्त अरब अमीरात के मंत्रियों द्वारा जारी किया गया था।
बयान में, मंत्रियों ने खाड़ी देशों जैसे जॉर्डन, अजरबैजान और तुर्किए पर हमलों की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि ईरान ने रिहायशी क्षेत्रों, नागरिक बुनियादी ढांचे, जिनमें तेल संयंत्र, जलवायु सुधार संयंत्र, हवाई अड्डे, आवासीय इमारतें और राजनयिक स्थल शामिल हैं, को निशाना बनाया।
इसी प्रकार, मंत्रियों ने लेबनान पर इजरायल के हमलों की निंदा की और क्षेत्र की सुरक्षा, स्थिरता तथा क्षेत्रीय अखंडता के लिए समर्थन दोहराया। यह संयुक्त बयान तब आया, जब ईरान ने खाड़ी में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को लक्षित किया और कतर में सुविधाओं में आग लगने तथा सऊदी अरब में बैलिस्टिक मिसाइलों के खतरों की जानकारी प्राप्त हुई।
संयुक्त बयान में विदेश मंत्रियों ने ईरान को चेतावनी दी कि ईरान के साथ संबंधों का भविष्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करने और उनके आंतरिक मामलों में दखल न देने पर निर्भर करता है। साथ ही, उन्हें अपनी सैन्य क्षमताओं का उपयोग या विकास करके किसी भी प्रकार से क्षेत्र के देशों को धमकाने से बचना चाहिए।
इससे पहले, ईरानी सरकारी मीडिया ने अमेरिका और इजरायल पर अपने तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन सुविधाओं पर हमले का आरोप लगाया था।
कतर ने रास लफ्फान औद्योगिक शहर को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमले की कड़ी निंदा की है। कतर ने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन बताया। इस हमले के बाद, ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अटैशे एवं उनके कार्यालय के स्टाफ को 'पर्सोना नॉन ग्राटा' घोषित किया गया और उन्हें 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया गया। जब कोई देश किसी विदेशी राजनयिक को स्वीकार नहीं करता या उसे देश छोड़ने के लिए कहता है, तो उसे पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित किया जाता है।
एक आधिकारिक बयान में कतर ने इस हमले को देश की आजादी का खुला उल्लंघन और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा तथा क्षेत्र की स्थिरता के लिए सीधा खतरा बताया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि कतर ने इस संघर्ष से खुद को दूर रखने की नीति अपनाई है। तनाव बढ़ने से बचने के वादे के बावजूद, ईरान ने उसे और पड़ोसी देशों को निशाना बनाना जारी रखा है। यह एक गैर-जिम्मेदाराना तरीका है जो क्षेत्र की सुरक्षा को कमजोर करता है और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा उत्पन्न करता है।