ईरान का बयान: जब तक अमेरिका और इजरायल का आक्रमण जारी रहेगा, हम आत्मरक्षा करेंगे
सारांश
Key Takeaways
- ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार बनाए रखने का निर्णय लिया है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रति ईरान ने चेतावनी दी है कि हमलावर देशों की पहचान आवश्यक है।
- आक्रमण के खिलाफ ईरान की प्रतिक्रियाएं जारी रहेंगी।
तेहरान, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान ने रविवार को यह स्पष्ट किया कि उसका आत्मरक्षा का अधिकार तब तक सक्रिय रहेगा जब तक अमेरिका और इजरायल का आक्रमण समाप्त नहीं होता या जब तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यूएन चार्टर के अनुच्छेद 39 के तहत हमलावर देशों की पहचान कर उनकी जिम्मेदारियों को निर्धारित नहीं कर देती।
ईरान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि यूएस और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले 28 फरवरी को सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और कई उच्चस्तरीय ईरानी अधिकारियों की हत्या के साथ शुरू हुए थे।
बयान में कहा गया कि देशभर में सैन्य और सिविलियन ढांचों पर हमले जारी हैं। मंत्रालय ने बताया कि इन हमलों में स्कूल, अस्पताल, खेल केंद्र, निवास स्थान और सार्वजनिक सेवा संस्थान जैसी जगहें भी शामिल हैं।
इसमें इन कार्रवाइयों को ईरान की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता का बड़ा उल्लंघन बताया गया और कहा गया कि ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों का भी उल्लंघन करते हैं।
तेहरान ने यूएन चार्टर के अनुच्छेद 51 का संदर्भ देते हुए कहा कि ऐसे क्रूर सैन्य हमलों का प्रतिरोध करना उसका वैध और प्राकृतिक आत्मरक्षा का अधिकार है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस विषय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को विभिन्न पत्र भेजे गए हैं, जिनमें यह स्पष्ट किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार कोई भी देश अपने क्षेत्र का उपयोग किसी अन्य देश को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं कर सकता।
मंत्रालय ने आगे कहा कि सर्वसम्मति से पारित संयुक्त राष्ट्र महासभा का प्रस्ताव 3314 सैन्य आक्रमण की परिभाषा से संबंधित है। इसके अनुच्छेद 3 के पैरा (एफ) में कहा गया है कि यदि कोई देश अपने क्षेत्र को किसी दूसरे देश के उपयोग के लिए उपलब्ध कराता है और वह देश उस क्षेत्र का इस्तेमाल किसी तीसरे देश के खिलाफ आक्रमण में करता है, तो इसे भी सैन्य आक्रमण माना जाएगा।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार हर देश का कर्तव्य है कि वह अपने क्षेत्र का उपयोग किसी अन्य देश पर हमले के लिए होने से रोके और ऐसी किसी भी कार्रवाई को बढ़ावा देने से बचे।
यदि कोई देश अपने क्षेत्र का उपयोग किसी अन्य देश के खिलाफ सैन्य आक्रमण के लिए होने देता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कानूनी जिम्मेदारी का सामना करना पड़ सकता है।
ईरान ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सैन्य कार्रवाई के माध्यम से जवाब देना उसका वैध अधिकार है और इस बारे में पहले ही कई कूटनीतिक और राजनीतिक चेतावनियां दी जा चुकी हैं।
ईरान ने पुष्टि की है कि उसकी रक्षात्मक कार्रवाई उन ठिकानों और सुविधाओं को लक्षित कर रही है, जिनका उपयोग ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई के लिए किया जा रहा है।
ईरान ने यह भी दलील दी कि क्षेत्रीय देशों को अब यह समझ में आ गया होगा कि उनकी भूमि पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने केवल इजरायल और अमेरिका की आक्रामक नीतियों का समर्थन करने के लिए हैं, न कि क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ाने के लिए।
मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सकारात्मक संबंध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। तेहरान आपसी सम्मान, अच्छे पड़ोसी संबंधों और एक-दूसरे की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित मैत्रीपूर्ण संबंधों को बनाए रखने का समर्थन करता रहेगा।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और प्रतिष्ठानों के खिलाफ ईरान की रक्षात्मक कार्रवाई को किसी भी तरह से क्षेत्रीय देशों के प्रति शत्रुता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।