जितिन प्रसाद: भारत दीर्घकालिक निवेश साझेदार के रूप में उभर रहा है, सिर्फ उपभोक्ता बाज़ार नहीं
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने मंगलवार, 19 मई 2026 को स्पष्ट किया कि वैश्विक कंपनियों को भारत को महज़ एक उपभोक्ता बाज़ार की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे एक दीर्घकालिक निवेश साझेदार के रूप में स्वीकार करना चाहिए जहाँ वे भारतीय व्यवसायों के साथ मिलकर देश की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बन सकें। उन्होंने यह बात उद्योग संगठन एसोचैम के 'इंडिया बिजनेस रिफॉर्म्स समिट 2026' को संबोधित करते हुए कही।
महानगरों से आगे बढ़ता आर्थिक बदलाव
मंत्री प्रसाद ने रेखांकित किया कि भारत का आर्थिक रूपांतरण अब केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रहा। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं, जिससे निवेशकों और कारोबारियों के लिए एक विशाल घरेलू बाज़ार तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा, 'भारत में बदलाव जमीनी स्तर से भी हो रहा है। यह सिर्फ हमारे मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है। यही वजह है कि हम दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार बन रहे हैं।'
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में विविधीकरण की माँग बढ़ रही है और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ चीन-केंद्रित निर्भरता कम करने के विकल्प तलाश रही हैं। भारत की बढ़ती उपभोक्ता आय और डिजिटल पहुँच इस संदर्भ में उसे एक आकर्षक गंतव्य बनाती है।
विदेशी निवेशकों को सीधा संदेश
प्रसाद ने विदेशी निवेशकों को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'मैं निवेशकों, खासकर विदेशी निवेशकों से कहता हूँ कि भारत को सिर्फ बाज़ार की तरह न देखें। हम आपके साथ साझेदारी करना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि वे भारत में निवेश करें।' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सरकार चाहती है कि विदेशी कंपनियाँ भारत के मैन्युफैक्चरिंग और बिजनेस इकोसिस्टम में सक्रिय भागीदार बनें।
पारदर्शिता और कानून के राज पर जोर
मंत्री ने कहा कि भारत में कानून का शासन और पारदर्शी कारोबारी माहौल निवेशकों का भरोसा मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा, 'इस सरकार में भारत में कानून का राज है। पारदर्शिता है और सभी को समान अवसर मिलते हैं। अब शॉर्टकट का दौर खत्म हो चुका है।' घरेलू और विदेशी दोनों कंपनियों का विश्वास इससे बढ़ा है।
मुक्त व्यापार समझौतों से MSME को नई राह
प्रसाद ने हाल के मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) की भूमिका पर भी ज़ोर दिया। उनके अनुसार इन समझौतों ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए ऐसे वैश्विक बाज़ारों के द्वार खोले हैं जिनकी पहले कल्पना भी कठिन थी। उन्होंने कहा, 'इन FTA ने ऐसे बाज़ार खोले हैं जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। हमारे एमएसएमई आने वाले समय में विकास के सबसे बड़े इंजन बनेंगे।' गौरतलब है कि भारत ने हाल के वर्षों में यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ महत्त्वपूर्ण व्यापार समझौते किए हैं।
गति शक्ति और लॉजिस्टिक्स नीति: रणनीतिक स्तंभ
सरकार की औद्योगिक रणनीति का मुख्य फोकस वैल्यू एडिशन बढ़ाने, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने और मैन्युफैक्चरिंग प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने पर है। मंत्री ने गति शक्ति पोर्टल, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और एक्सपोर्ट प्रमोशन पहलों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'हमारा गति शक्ति पोर्टल, लॉजिस्टिक्स नीति और एक्सपोर्ट प्रमोशन नीतियाँ मिलकर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि भारत बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।' आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि ये नीतिगत संकेत ज़मीनी निवेश प्रवाह में कितनी तेज़ी से तब्दील होते हैं।