एमएसएमई के लिए एफटीए से विकसित देशों के बाजारों में अवसर: जितिन प्रसाद
सारांश
Key Takeaways
- एफटीए से एमएसएमई को वैश्विक बाजार में अवसर मिलेंगे।
- उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग को पूरा करने की आवश्यकता है।
- महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा दिया जाएगा।
- नई तकनीकों का अपनाना आवश्यक है।
- घटिया उत्पादों की अनुमति नहीं होगी।
नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने सोमवार को बताया कि हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से भारत के लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को वैश्विक बाजारों में निर्यात बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखलाओं में शामिल होने के अवसर मिलेंगे।
फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन (एफएलओ) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय एमएसएमई पुरस्कार समारोह में उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, और न्यूजीलैंड जैसे क्षेत्रों के साथ व्यापार समझौतों से भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को विकसित बाजारों तक पहुंच मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारशिला माने जाने वाले एमएसएमई को अब स्केल-आधारित और कम लागत वाली निर्माण प्रक्रिया से हटकर गुणवत्ता-आधारित उत्पादन की ओर अग्रसर होना चाहिए।
प्रसाद ने कहा, "लगभग 65 प्रतिशत विकसित बाजार अब देश के द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का हिस्सा हैं। ये देश उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग करते हैं, और भारतीय निर्माताओं को वैश्विक मानकों को पूरा करने के लिए अधिक प्रयास करने होंगे।"
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि शून्य शुल्क पहुंच से भारत में घटिया गुणवत्ता वाले आयात की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।
मंत्री ने आगे कहा कि एफटीए से एमएसएमई के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इससे वे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत हो सकेंगे और छोटे व्यवसायों के लिए निष्पक्ष और समावेशी बाजार पहुंच के अवसर उत्पन्न होंगे।
प्रसाद ने एमएसएमई से उत्पादकता, दक्षता और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार के लिए एआई जैसी नई तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एआई स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण, परिवहन और सेवाओं जैसे विभिन्न उद्योगों में तेजी से अनिवार्य होता जा रहा है।
इस बीच, राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सुभ्रांशु शेखर आचार्य ने लक्षित समर्थन, डिजिटल सशक्तिकरण और कौशल विकास के माध्यम से महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
आचार्य ने व्यापार सक्षमता और विपणन (टीईएएम) पहल पर भी प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) प्लेटफॉर्म पर पांच लाख एमएसएमई को शामिल करना है, जिसमें यह लक्ष्य है कि इनमें से 50 प्रतिशत उद्यम महिला नेतृत्व वाले हों।
अतिरिक्त, एफएलओ की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम शर्मा ने कहा कि महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई अब समावेशी आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण चालक बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि एफएलओ उद्यमिता समर्थन, कौशल विकास और नीतिगत वकालत के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को सुदृढ़ करने के लिए कार्यरत है।
संस्थान ने महिला उद्यमियों को मार्गदर्शन, वित्तपोषण, विपणन समर्थन और प्रौद्योगिकी सहायता प्रदान करने के लिए एफएलओ एमएसएमई सहायता प्रकोष्ठ भी स्थापित किया है।