पीएम मोदी ने नॉर्वे के राजा-रानी, प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस को दिए भारतीय शिल्पकला के अनमोल उपहार

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पीएम मोदी ने नॉर्वे के राजा-रानी, प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस को दिए भारतीय शिल्पकला के अनमोल उपहार

सारांश

पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा में उपहार महज़ शिष्टाचार नहीं थे — वे भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के जीवंत दस्तावेज़ थे। सिक्किम की ऑर्किड कला से लेकर ओडिशा की तारकशी सेलबोट और आंध्र की कलमकारी तक, हर भेंट ने एक भारतीय राज्य की शिल्प विरासत को नॉर्वे के शाही दरबार तक पहुँचाया।

मुख्य बातें

पीएम मोदी ने नॉर्वे की यात्रा के दौरान शीर्ष नेतृत्व को भारतीय हस्तशिल्प की चार अनूठी कलाकृतियाँ भेंट कीं।
नॉर्वे के प्रधानमंत्री को सिक्किम की प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग और ऑर्किड पेपरवेट दिए गए।
किंग हेराल्ड पंचम को कटक की 500 वर्ष पुरानी तारकशी कला से निर्मित चाँदी की सेलबोट भेंट की गई — जो उनके ओलंपिक नौकायन इतिहास से भी जुड़ती है।
नॉर्वे की रानी को ओडिशा की प्राचीन पाम लीफ पट्टचित्र (ताला पट्टचित्र) दी गई।
क्राउन प्रिंस को आंध्र प्रदेश की कलमकारी कला में बनी सूर्य-चंद्र थीम की पेंटिंग भेंट की गई।
यह यात्रा पाँच देशों के दौरे का हिस्सा थी, जिसके बाद पीएम मोदी 21 मई को भारत लौटे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाँच देशों की यात्रा के दौरान नॉर्वे में दिए गए उपहारों ने भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को एक नई ऊँचाई दी। नॉर्वे के प्रधानमंत्री, किंग हेराल्ड पंचम, रानी और क्राउन प्रिंस को भेंट की गई ये कलाकृतियाँ भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत करती हैं। हर उपहार को इस तरह चुना गया कि वह भारत और नॉर्वे के साझा मूल्यों — प्रकृति-प्रेम, समुद्री परंपरा और कारीगरी — से जुड़ सके।

नॉर्वे के प्रधानमंत्री को भेंट: प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग और ऑर्किड पेपरवेट

पीएम मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग और ऑर्किड पेपरवेट भेंट किए। ये दोनों कलाकृतियाँ सिक्किम की धुंध-भरी हिमालयी घाटियों में पाए जाने वाले असली ऑर्किड और फर्न से तैयार की गई हैं। भारत के पहले जैविक राज्य से आई यह कला पूर्वी हिमालय की अद्भुत जैव विविधता का प्रतीक है।

स्थानीय कारीगरों ने प्रत्येक फूल और फर्न को बेहद सावधानी से संरक्षित किया है, ताकि सिक्किम की प्राकृतिक सुंदरता को स्थायी रूप दिया जा सके। यह उपहार पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है — एक मूल्य जो नॉर्वे की अपनी प्रकृति-केंद्रित संस्कृति से गहराई से जुड़ता है।

किंग हेराल्ड पंचम को भेंट: तारकशी कला की चाँदी की सेलबोट

नॉर्वे के राजा किंग हेराल्ड पंचम को पीएम मोदी ने ओडिशा के कटक की विश्वप्रसिद्ध तारकशी कला से निर्मित एक बारीक नक्काशीदार चाँदी की सेलबोट भेंट की। 500 वर्ष पुरानी यह सिल्वर फिलिग्री कला कटक को 'सिल्वर सिटी' की पहचान दिलाती है। इसमें अत्यंत पतले चाँदी के तारों को मोड़कर और जोड़कर महीन डिज़ाइन तैयार किए जाते हैं।

यह नौका ओडिशा की समृद्ध समुद्री विरासत और उन प्राचीन भारतीय व्यापारियों की यात्राओं का प्रतीक है जो समुद्री मार्गों से दूरदराज़ देशों तक पहुँचते थे। गौरतलब है कि किंग हेराल्ड पंचम का जीवनभर नौकायन से गहरा नाता रहा है और उन्होंने ओलंपिक खेलों में भी नॉर्वे का प्रतिनिधित्व किया था — जो इस उपहार को विशेष रूप से सार्थक बनाता है।

नॉर्वे की रानी को भेंट: पाम लीफ पट्टचित्र

नॉर्वे की रानी को पीएम मोदी ने ओडिशा की अत्यंत प्राचीन कला परंपरा — पाम लीफ पट्टचित्र (स्थानीय भाषा में 'ताला पट्टचित्र') — भेंट की। यह कला कपड़े पर बनी पेंटिंग से भिन्न है; इसमें विशेष रूप से तैयार किए गए ताड़ के पत्तों पर महीन चित्र उकेरे जाते हैं।

इन चित्रों में कहानी, लिखावट और पारंपरिक चित्रकारी का अनूठा संगम होता है। धागों से जोड़कर फोल्ड होने वाले पैनलों के रूप में भी इन्हें तैयार किया जाता है। नॉर्डिक पांडुलिपियों और लोक कला की तरह, यह कला भी धैर्य और कारीगरी से संस्कृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखती है।

क्राउन प्रिंस को भेंट: सूर्य-चंद्र थीम की कलमकारी पेंटिंग

नॉर्वे के क्राउन प्रिंस को पीएम मोदी ने आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध कलमकारी कला में बनी सूर्य और चंद्रमा थीम वाली पेंटिंग भेंट की। कलमकारी भारत की वैदिक परंपराओं से जुड़ी एक प्राचीन कला है, जिसमें प्राकृतिक रंगों और हाथ से बनाए गए डिज़ाइनों के ज़रिए कहानियाँ और पारंपरिक चित्र उकेरे जाते हैं।

इसकी दो प्रमुख शैलियाँ हैं — श्रीकालहस्ती शैली (बाँस की कलम से हाथ से चित्रांकन) और मछलीपट्टनम शैली (हाथ से तराशे गए लकड़ी के ब्लॉक्स से प्रिंटिंग)। सूर्य और चंद्रमा के आकाशीय प्रतीक जीवन के संतुलन के सार्वभौमिक विचार को व्यक्त करते हैं — एक ऐसा विचार जो नॉर्वे की 'मिडनाइट सन' की परंपरा से स्वाभाविक रूप से जुड़ता है, जहाँ प्रकाश और अंधकार एक साथ विद्यमान रहते हैं।

सांस्कृतिक कूटनीति का संदेश

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी विदेश नीति में सांस्कृतिक कूटनीति को एक प्रमुख साधन के रूप में स्थापित कर रहा है। हर उपहार किसी न किसी भारतीय राज्य — सिक्किम, ओडिशा और आंध्र प्रदेश — की विशिष्ट शिल्प परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जो भारत की विविधता में एकता को भी रेखांकित करता है। इन उपहारों के ज़रिए पीएम मोदी ने यह संदेश दिया कि भारत-नॉर्वे संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सभ्यतागत भी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर चुनाव प्राप्तकर्ता की व्यक्तिगत पहचान से जोड़ा हुआ। किंग हेराल्ड को नौकायन से जुड़ी सेलबोट, नॉर्वे की प्रकृति-संस्कृति को ध्यान में रखते हुए ऑर्किड कला — यह महज़ प्रोटोकॉल नहीं, शोधपूर्ण कूटनीति है। यह उस बड़े बदलाव का हिस्सा है जिसमें भारत अपनी 'सॉफ्ट पावर' को व्यवस्थित रूप से ब्रांड कर रहा है। सवाल यह है कि क्या ये प्रतीकात्मक इशारे व्यापार, रक्षा या जलवायु सहयोग जैसे ठोस द्विपक्षीय परिणामों में भी तब्दील होते हैं — वह परीक्षा अभी बाकी है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को क्या उपहार दिया?
पीएम मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को सिक्किम की हिमालयी घाटियों से प्राप्त असली ऑर्किड और फर्न से बनी 'प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग' और 'ऑर्किड पेपरवेट' भेंट किए। ये कलाकृतियाँ भारत के पहले जैविक राज्य सिक्किम की पर्यावरण-अनुकूल शिल्प परंपरा का प्रतीक हैं।
किंग हेराल्ड पंचम को भेंट की गई सेलबोट किस कला से बनी है?
यह सेलबोट ओडिशा के कटक की 500 वर्ष पुरानी तारकशी (सिल्वर फिलिग्री) कला से निर्मित है, जिसमें अत्यंत पतले चाँदी के तारों को मोड़कर महीन डिज़ाइन तैयार किए जाते हैं। किंग हेराल्ड के ओलंपिक नौकायन इतिहास को देखते हुए यह उपहार विशेष रूप से सार्थक माना जा रहा है।
पाम लीफ पट्टचित्र क्या है और यह किसे दी गई?
पाम लीफ पट्टचित्र (ताला पट्टचित्र) ओडिशा की एक प्राचीन कला है जिसमें विशेष रूप से तैयार ताड़ के पत्तों पर महीन चित्र उकेरे जाते हैं। यह कलाकृति पीएम मोदी ने नॉर्वे की रानी को भेंट की।
क्राउन प्रिंस को दी गई कलमकारी पेंटिंग की क्या विशेषता है?
यह आंध्र प्रदेश की प्राचीन कलमकारी कला में बनी सूर्य और चंद्रमा थीम की पेंटिंग है, जो जीवन के संतुलन और दो पहलुओं — ऊर्जा और शांति — का प्रतीक है। इसमें प्राकृतिक रंगों और हाथ से बनाए गए डिज़ाइनों का उपयोग होता है।
पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा किस बड़े दौरे का हिस्सा थी?
नॉर्वे यात्रा पीएम मोदी के पाँच देशों के दौरे का हिस्सा थी, जिसके बाद वे 21 मई को भारत लौटे। इस दौरे में भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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