PM मोदी ने UAE राष्ट्रपति, क्राउन प्रिंस और क्वीन मदर को भेंट किए 8 दुर्लभ भारतीय उपहार

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PM मोदी ने UAE राष्ट्रपति, क्राउन प्रिंस और क्वीन मदर को भेंट किए 8 दुर्लभ भारतीय उपहार

सारांश

पाँच देशों की यात्रा के दौरान PM मोदी UAE में 6 राज्यों की विरासत समेटे 8 उपहार लेकर गए — रोगन पेंटिंग से लेकर कोफ्तगिरी खंजर और चक हाओ चावल तक। हर उपहार एक कूटनीतिक संदेश भी था।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 21 मई 2026 को UAE के राष्ट्रपति, क्राउन प्रिंस और क्वीन मदर को भारतीय सांस्कृतिक उपहार भेंट किए।
UAE राष्ट्रपति को गुजरात की रोगन पेंटिंग (ट्री ऑफ लाइफ) , केसर आम और मेघालय अनानास दिए गए।
क्राउन प्रिंस को राजस्थान का कोफ्तगिरी खंजर और बिहार का मिथिला मखाना भेंट किया गया।
क्वीन मदर को तेलंगाना का करीमनगर फिलिग्री संदूक , मध्य प्रदेश की महेश्वरी सिल्क और मणिपुर का चक हाओ चावल दिए गए।
कुल 8 उपहारों में 6 भारतीय राज्यों की विरासत शामिल; अधिकतर उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 मई 2026 को पाँच देशों की यात्रा पूरी कर भारत लौटे। इस दौरे में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की यात्रा के अवसर पर उन्होंने वहाँ के राष्ट्रपति, क्राउन प्रिंस और क्वीन मदर को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाले विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों में गुजरात, राजस्थान, बिहार, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और मणिपुर की दुर्लभ हस्तकलाएँ और जीआई टैग प्राप्त कृषि उत्पाद शामिल थे।

राष्ट्रपति को भेंट: रोगन पेंटिंग, केसर आम और मेघालय अनानास

UAE के राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के कच्छ क्षेत्र की दुर्लभ 'रोगन पेंटिंग' (ट्री ऑफ लाइफ) भेंट की। यह कपड़ा-कला अपनी बारीक कारीगरी और चमकदार उभरे हुए रंगों के लिए विख्यात है। इसमें अंकित 'जीवन वृक्ष' का प्रतीक जीवन, जुड़ाव, शक्ति और निरंतरता को दर्शाता है — जिसकी जड़ें परंपरा में और शाखाएँ प्रगति की ओर हैं, जो UAE की दृष्टि से भी साम्य रखता है।

इसके साथ ही गुजरात का जीआई टैग प्राप्त 'केसर आम' भी भेंट किया गया, जिसे 'आमों की रानी' कहा जाता है। इसकी उत्पत्ति जूनागढ़ से मानी जाती है और इसका सुनहरा-नारंगी, रेशामुक्त गूदा इसे विशिष्ट बनाता है। मेघालय का जीआई टैग प्राप्त अनानास भी इस उपहार सूची में था — जो अपनी असाधारण मिठास, न्यूनतम अम्लता और ब्रॉमेलैन एंजाइम की उपस्थिति के कारण पाचन-सहायक माना जाता है।

क्राउन प्रिंस को भेंट: कोफ्तगिरी खंजर और मिथिला मखाना

UAE के क्राउन प्रिंस के लिए प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान के उदयपुर की दुर्लभ 'कोफ्तगिरी खंजर' लेकर गए। यह पारंपरिक औपचारिक खंजर लोहे पर सोने और चाँदी के बारीक तार जड़कर फूलों और ज्यामितीय आकृतियों से सजाया जाता है। यह कला एक समय राजपूत राजाओं के संरक्षण में पली-बढ़ी और आज मुट्ठीभर कारीगर ही इसे जीवित रखे हुए हैं। जैसे UAE में खंजर साहस और शाही विरासत का प्रतीक है, वैसे ही यह भारतीय खंजर दोनों देशों के सांस्कृतिक सम्मान को रेखांकित करता है।

साथ में बिहार के मिथिला क्षेत्र का जीआई टैग प्राप्त 'मिथिला मखाना' भी भेंट किया गया। तालाबों और जलाशयों में उगाया जाने वाला यह उत्पाद प्रोटीन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है और भारतीय धार्मिक एवं खान-पान परंपराओं में विशेष स्थान रखता है।

क्वीन मदर को भेंट: करीमनगर फिलिग्री संदूक, महेश्वरी सिल्क और चक हाओ चावल

UAE की क्वीन मदर को तीन विशेष उपहार भेंट किए गए। पहला — तेलंगाना के करीमनगर की प्रसिद्ध चाँदी-नक्काशी कला से निर्मित 'फिलिग्री संदूक', जिस पर हाथी और हौदे सहित एक शाही जुलूस का दृश्य उकेरा गया है। यह संदूक केवल कला का नमूना नहीं, बल्कि भारत की शाही सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।

दूसरा उपहार था मध्य प्रदेश के महेश्वर की 'महेश्वरी सिल्क' — एक हल्का, मुलायम और हल्की चमक वाला हैंडलूम वस्त्र जिसे सिल्क और कॉटन के मिश्रण से बनाया जाता है। इस परंपरा को 18वीं सदी में रानी अहिल्याबाई होलकर ने संरक्षण देकर महेश्वर को कला केंद्र के रूप में स्थापित किया था। इसका 'रिवर्सिबल बॉर्डर' इसे विशिष्ट बनाता है।

तीसरा उपहार था मणिपुर का 'चक हाओ चावल' — जिसे 'काला चावल' भी कहा जाता है। परंपरागत रूप से मणिपुर के राजघरानों और विशेष समारोहों के लिए सुरक्षित रखी जाने वाली यह खुशबूदार किस्म डाइटरी फाइबर, आयरन, एंटीऑक्सीडेंट और धीमे पचने वाले कार्बोहाइड्रेट से समृद्ध है।

उपहारों का कूटनीतिक महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब भारत और UAE के बीच द्विपक्षीय संबंध व्यापार, ऊर्जा और प्रवासी समुदाय के स्तर पर नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी की UAE यात्राओं में उपहारों का चुनाव हमेशा सोच-समझकर किया जाता है — हर उपहार किसी न किसी भारतीय राज्य की विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करता है। इस बार के 8 उपहारों में 6 अलग-अलग राज्यों की कलाएँ और उत्पाद शामिल थे, जो भारत की विविधता में एकता को रेखांकित करते हैं। आगे भी ऐसी राजनयिक भेंटें भारतीय शिल्पकारों और किसानों को वैश्विक पहचान दिलाने का माध्यम बनती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित 'सॉफ्ट पावर' रणनीति है — हर भेंट किसी राज्य की उस कला या उपज को वैश्विक मंच पर रखती है जो अन्यथा अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से ओझल रहती। कच्छ की रोगन पेंटिंग से लेकर मणिपुर के चक हाओ चावल तक, यह विविधता भारत की 'एक राष्ट्र, अनेक परंपराएँ' की छवि को कूटनीतिक भाषा में अनुवाद करती है। हालाँकि, सवाल यह भी उठता है कि क्या इन शिल्पकारों और किसानों को इस वैश्विक प्रदर्शनी का व्यावसायिक लाभ मिल पाता है, या यह पहचान केवल प्रतीकात्मक बनकर रह जाती है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने UAE के राष्ट्रपति को कौन से उपहार दिए?
PM मोदी ने UAE के राष्ट्रपति को गुजरात के कच्छ की दुर्लभ 'रोगन पेंटिंग (ट्री ऑफ लाइफ)', जीआई टैग प्राप्त 'केसर आम' और 'मेघालय अनानास' भेंट किए। ये तीनों उपहार भारत की कृषि और हस्तकला विरासत के प्रतीक हैं।
कोफ्तगिरी खंजर क्या है और इसे UAE क्राउन प्रिंस को क्यों दिया गया?
कोफ्तगिरी खंजर राजस्थान के उदयपुर की एक दुर्लभ धातु-हस्तकला है, जिसमें लोहे पर सोने-चाँदी के बारीक तार जड़कर डिजाइन बनाए जाते हैं। UAE में खंजर की अपनी शाही परंपरा है, इसलिए यह उपहार दोनों देशों के सांस्कृतिक सम्मान और मित्रता का प्रतीक बना।
UAE की क्वीन मदर को भेंट किए गए उपहारों में क्या खास था?
क्वीन मदर को तेलंगाना का 'करीमनगर फिलिग्री संदूक', मध्य प्रदेश की '18वीं सदी की परंपरा वाली महेश्वरी सिल्क' और मणिपुर का 'चक हाओ (काला) चावल' दिए गए। तीनों उपहार अलग-अलग राज्यों की विशिष्ट सांस्कृतिक और कृषि विरासत को दर्शाते हैं।
इन उपहारों में से कितने उत्पादों को जीआई टैग मिला हुआ है?
भेंट किए गए उपहारों में केसर आम, मेघालय अनानास और मिथिला मखाना को जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग प्राप्त है। जीआई टैग किसी उत्पाद की भौगोलिक उत्पत्ति और विशिष्ट गुणवत्ता की आधिकारिक पहचान है।
PM मोदी की इस यात्रा में UAE के अलावा और कौन से देश शामिल थे?
रिपोर्टों के अनुसार यह पाँच देशों की यात्रा थी, जिसमें UAE एक पड़ाव था। यात्रा 21 मई 2026 को समाप्त हुई और प्रधानमंत्री मोदी भारत लौटे। अन्य देशों का विस्तृत विवरण इस रिपोर्ट के स्रोत में उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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