कटक की 'तारकसी' चांदी नाव नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम को भेंट, PM मोदी ने दी ओडिशा हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम को कटक की सुप्रसिद्ध 'तारकसी' कला शैली में निर्मित एक पारंपरिक चांदी की नाव भेंट की, जिससे ओडिशा की सदियों पुरानी हस्तशिल्प विरासत एक बार फिर वैश्विक मंच पर चर्चा का केंद्र बन गई है। यह उपहार महज एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की 'सिल्वर सिटी' कटक की उस कारीगरी का प्रतीक है जो 500 से अधिक वर्षों से जीवित है।
तारकसी कला: क्या है यह अनूठी विरासत
तारकसी ओडिशा के कटक की एक अत्यंत नाजुक और श्रमसाध्य चांदी-कला है, जिसमें बाल जितने पतले चांदी के तारों को असाधारण सटीकता के साथ मोड़कर और जोड़कर फीते जैसी जटिल डिज़ाइनें तैयार की जाती हैं। इस कला की उत्पत्ति मुगल काल से मानी जाती है और यह लगभग पूरी तरह कटक में ही केंद्रित है — ओडिशा के अन्य क्षेत्रों में इसके कारीगर बहुत कम हैं। गौरतलब है कि कटक को इसीलिए 'सिल्वर सिटी' की उपाधि मिली हुई है।
उपहार का प्रतीकात्मक महत्व
कुशल कारीगरों के हाथों से बनी यह चांदी की नाव ओडिशा की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रतिनिधित्व करती है। यह उन प्राचीन भारतीय व्यापारियों की स्मृति भी जगाती है जो हिंद महासागर पार करके सुदूर देशों तक व्यापार करने जाते थे। इस उपहार का एक निजी आयाम भी है — राजा हेराल्ड पंचम नौकायन के प्रति आजीवन अनुराग रखते हैं और उन्होंने ओलंपिक खेलों में नॉर्वे का प्रतिनिधित्व भी किया है। ऐसे में चांदी की नाव का चुनाव एक सुविचारित और व्यक्तिगत संदेश देता है।
कारीगरों में उत्साह, चुनौतियाँ भी कायम
इस भेंट की खबर से कटक के कारीगरों में खुशी की लहर है। कारीगर विजय कुमार दे ने बताया कि उन्हें गर्व और उत्साह महसूस हो रहा है कि उनकी कारीगरी वैश्विक मंच तक पहुँच रही है और ओडिशा की पारंपरिक कला को सम्मान मिल रहा है। उन्होंने कहा, 'इससे हमारे काम को भी बढ़ावा मिलेगा। इसमें काफी मेहनत लगती है और बहुत बारीकी से काम करना पड़ता है।'
उत्कल स्वर्ण रूप संघ के सचिव गिरीश चंद्र प्रुस्ती ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जिस तरह देश की पारंपरिक कारीगरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट कर रहे हैं, वह एक सराहनीय कदम है। उनके अनुसार इससे कारीगरों को बेहतर बाज़ार मिलेगा और उनके उत्पादों की माँग भी बढ़ेगी।
हालाँकि, प्रुस्ती ने चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से उत्पादन लागत बढ़ रही है, जिससे खरीदारी प्रभावित होती है। इसके अलावा नई पीढ़ी इस कला को सीखने में कम रुचि दिखा रही है, जो इस विरासत के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है।
वैश्विक कूटनीति में भारतीय हस्तशिल्प की भूमिका
यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी ने किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को भारतीय हस्तशिल्प भेंट कर उसे राजनयिक संवाद का माध्यम बनाया हो। यह परंपरा भारत की 'सॉफ्ट पावर' कूटनीति का हिस्सा बन चुकी है, जिसमें स्थानीय कारीगरी को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उपहार न केवल द्विपक्षीय संबंधों को गहराई देते हैं, बल्कि घरेलू कारीगरों के लिए अंतरराष्ट्रीय माँग भी उत्पन्न करते हैं।
आगे की राह
तारकसी कला को बचाने और इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सरकारी सहयोग की आवश्यकता बताई जा रही है। कारीगर संगठनों की माँग है कि चांदी की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर कच्चे माल पर सब्सिडी और निर्यात प्रोत्साहन दिया जाए, ताकि यह अनमोल विरासत अगली पीढ़ियों तक जीवित रह सके।