'होली वाराणसी' पेंटिंग PM मोदी को भेंट: इतालवी चित्रकार जॉनपाउलो बोले, 'भारत-इटली की कला का सेतु'

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'होली वाराणसी' पेंटिंग PM मोदी को भेंट: इतालवी चित्रकार जॉनपाउलो बोले, 'भारत-इटली की कला का सेतु'

सारांश

रोम में एक इतालवी चित्रकार की तूलिका ने भारत-इटली मित्रता को नया रंग दिया। 'होली वाराणसी' — वाराणसी के घाटों को एक्रिलिक रंगों में उकेरी गई पेंटिंग — PM मोदी को भेंट की गई। चार दशकों से भारतीय संस्कृति, वेद और महाभारत से जुड़े जॉनपाउलो तोहमासईटीटी का यह कदम कूटनीति और कला के अनूठे संगम का प्रतीक है।

मुख्य बातें

इतालवी चित्रकार जॉनपाउलो तोहमासईटीटी ने 20 मई को रोम में PM नरेंद्र मोदी को 'होली वाराणसी' पेंटिंग भेंट की।
यह हस्तनिर्मित पेंटिंग एक्रिलिक रंगों की मिश्रित तकनीक से बनी है और इसे पूरा करने में लगभग दो सप्ताह लगे।
तोहमासईटीटी का भारतीय संस्कृति से जुड़ाव चार दशक पुराना है; 2008–2013 के बीच उन्होंने महाभारत पर 23 बड़ी पेंटिंग्स बनाईं।
कलाकार ने भगवद गीता, महाभारत और रामायण का अध्ययन किया और विला वृंदावन में अंतर्राष्ट्रीय वैदिक कला अकादमी के साथ सहयोग किया।
PM मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तोहमासईटीटी के हुनर की सराहना करते हुए उनकी 1980 के दशक से चली आ रही कला यात्रा का उल्लेख किया।

रोम में 20 मई को एक अनोखे सांस्कृतिक क्षण में प्रसिद्ध इतालवी चित्रकार जॉनपाउलो तोहमासईटीटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वाराणसी के पवित्र घाटों पर आधारित अपनी हस्तनिर्मित पेंटिंग 'होली वाराणसी' भेंट की। यह कृति भारत और इटली के बीच सांस्कृतिक सेतु का प्रतीक बन गई है।

पेंटिंग की विशेषता और तकनीक

तोहमासईटीटी ने बताया कि 'होली वाराणसी' एक हस्तनिर्मित पेंटिंग है, जिसे मिश्रित तकनीकों — विशेषकर एक्रिलिक रंगों — का उपयोग करके तैयार किया गया है। यह चित्र गंगा के तट पर स्थित वाराणसी के घाटों की जीवंत छवि प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा, 'मैं इसे होली वाराणसी कहता हूं। यह बहुत रंगीन है, जो भारत की जीवंत संस्कृति को दर्शाता है।' इस पेंटिंग को पूरा करने में लगभग दो सप्ताह का समय लगा।

PM मोदी से संवाद और प्रतिक्रिया

तोहमासईटीटी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस कृति की सराहना की और इसे बनाने में लगे समय के बारे में जिज्ञासा दिखाई। उन्होंने कहा, 'मैंने उन्हें बताया कि यह पेंटिंग इतालवी कलाकार के विजन और रंगीन भारत के बीच एक सेतु की तरह है, और उन्होंने इसकी सराहना की। उन्होंने मुझसे पूछा कि इसे बनाने में कितना समय लगा, और मैंने कहा कि इसे बनाने में लगभग दो हफ्ते लगे।' प्रधानमंत्री ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी कलाकार की यात्रा में भी गहरी रुचि दिखाई।

चार दशकों की भारत-प्रेम यात्रा

तोहमासईटीटी का भारतीय संस्कृति से जुड़ाव कोई नया नहीं है — यह चार दशक पुराना है। उन्होंने 17 वर्ष की आयु में पीटर ब्रुक के रंगमंच रूपांतरण के माध्यम से पहली बार महाभारत से परिचय पाया, जिसने उनकी कला दिशा बदल दी। 1980 के दशक में उन्होंने वैदिक संस्कृति पर आधारित पुस्तकों के लिए बतौर चित्रकार काम किया। 2008 से 2013 के बीच उन्होंने महाभारत से संबंधित 23 बड़ी पेंटिंग्स पर काम किया, जिसके लिए उन्होंने लगभग पाँच वर्ष महाभारत के अध्ययन में और 12 वर्ष मुख्य चित्र परियोजना पर लगाए।

भारतीय ग्रंथों से प्रेरणा

कलाकार ने बताया कि उन्होंने भगवद गीता, महाभारत और रामायण जैसे प्राचीन ग्रंथों का इतालवी दृष्टिकोण से अध्ययन किया। उन्होंने कहा, 'मैंने पाया कि भारत संस्कृति, मूर्तियों और पेंटिंग्स में अत्यंत समृद्ध है। मैंने भगवद गीता, महाभारत और रामायण जैसे प्राचीन ग्रंथों का भी अध्ययन किया और उनसे प्रेरित होकर अपनी कला को नया आयाम दिया।' उनकी कला यात्रा उन्हें इटली के चित्ता दी कास्तेलो और पेरुजिया तक ले गई और उन्होंने विला वृंदावन में अंतर्राष्ट्रीय वैदिक कला अकादमी के साथ सहयोग भी किया।

उल्लेखनीय चित्र और आगे की राह

तोहमासईटीटी के उल्लेखनीय चित्रों में पार्थ-सारथी (कृष्ण अर्जुन के सारथी के रूप में), द्रौपदी का चीर हरण और कृष्ण की मदद, तथा द्वारका में अर्जुन और सुभद्रा का भागना शामिल हैं। इन चित्रों में विस्तृत परिदृश्य, जटिल वास्तुकला विवरण, उड़ते जीव और भावपूर्ण पात्र देखे जा सकते हैं। यह भेंट भारत-इटली सांस्कृतिक संबंधों में एक नई अध्याय जोड़ती है और कला को कूटनीति का माध्यम बनाने की एक सशक्त मिसाल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो कला और संस्कृति के माध्यम से बने संबंध अधिक टिकाऊ साबित होते हैं। चार दशकों से भारतीय ग्रंथों का अध्ययन करने वाले एक इतालवी कलाकार का PM मोदी से यह मिलन, 'सॉफ्ट पावर' की उस रणनीति को रेखांकित करता है जिसमें वाराणसी — मोदी का संसदीय क्षेत्र — एक सांस्कृतिक ब्रांड के रूप में वैश्विक मंच पर उभर रहा है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'होली वाराणसी' पेंटिंग क्या है और इसे किसने बनाया?
'होली वाराणसी' इतालवी चित्रकार जॉनपाउलो तोहमासईटीटी द्वारा बनाई गई एक हस्तनिर्मित पेंटिंग है, जो एक्रिलिक रंगों की मिश्रित तकनीक से तैयार की गई है और वाराणसी के गंगा तट पर स्थित पवित्र घाटों को दर्शाती है। इसे पूरा करने में लगभग दो सप्ताह का समय लगा।
जॉनपाउलो तोहमासईटीटी ने PM मोदी को यह पेंटिंग कब और कहाँ भेंट की?
यह पेंटिंग 20 मई को रोम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट की गई। यह अवसर भारत-इटली सांस्कृतिक संबंधों के संदर्भ में आया।
जॉनपाउलो तोहमासईटीटी का भारतीय संस्कृति से क्या संबंध है?
तोहमासईटीटी का भारतीय संस्कृति से जुड़ाव चार दशक पुराना है। उन्होंने 17 वर्ष की आयु में पीटर ब्रुक के महाभारत रंगमंच रूपांतरण से प्रेरणा ली, भगवद गीता, महाभारत और रामायण का अध्ययन किया, और 2008 से 2013 के बीच महाभारत पर 23 बड़ी पेंटिंग्स बनाईं।
PM मोदी ने इस पेंटिंग और कलाकार के बारे में क्या कहा?
PM मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तोहमासईटीटी के हुनर की सराहना की। उन्होंने लिखा — 'रोम में काशी की झलक!' — और कलाकार की 1980 के दशक से चली आ रही भारतीय संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। व्यक्तिगत भेंट में उन्होंने पेंटिंग बनाने में लगे समय के बारे में भी जिज्ञासा दिखाई।
तोहमासईटीटी की अन्य प्रमुख पेंटिंग्स कौन-सी हैं?
उनकी उल्लेखनीय कृतियों में पार्थ-सारथी (कृष्ण अर्जुन के सारथी के रूप में), द्रौपदी का चीर हरण और कृष्ण की मदद, तथा द्वारका में अर्जुन और सुभद्रा का भागना शामिल हैं। इन चित्रों में विस्तृत परिदृश्य, जटिल वास्तुकला विवरण और भावपूर्ण पात्र दर्शाए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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