नीदरलैंड में PM मोदी का भव्य स्वागत: कथक से गरबा तक, भारतीय समुदाय ने बाँधा समाँ
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार, 16 मई को नीदरलैंड पहुँचे, जहाँ यूरोप के सबसे बड़े भारतीय समुदाय ने उनका भव्य स्वागत किया। मोदी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस स्वागत समारोह की झलकियाँ साझा करते हुए लिखा कि स्वागत में कथक, ओडिसी, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, मोहिनीअट्टम और गरबा की प्रस्तुतियाँ शामिल थीं। यह उनका 2017 के बाद नीदरलैंड का दूसरा आधिकारिक दौरा है।
स्वागत समारोह की झलकियाँ
प्रधानमंत्री ने एक्स पर दो अलग-अलग पोस्ट में समारोह की तस्वीरें और विवरण साझा किए। उन्होंने लिखा, 'कल नीदरलैंड में भारतीय समुदाय का स्वागत शानदार था।' एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, 'नीदरलैंड में भारतीय समुदाय के स्वागत की कुछ और झलकियाँ शेयर कर रहा हूँ।' भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाली इन प्रस्तुतियों ने प्रवासी भारतीयों की जड़ों से जुड़ाव को उजागर किया।
द्विपक्षीय कार्यक्रम
शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इसके अलावा, उन्होंने किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री के भारतीय समुदाय को संबोधित करने और नीदरलैंड के प्रमुख व्यापारिक नेताओं से बातचीत करने की भी उम्मीद थी।
भारत-नीदरलैंड संबंधों का महत्व
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने दौरे से पहले एक विशेष ब्रीफिंग में कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, पानी, खेती और स्वास्थ्य के पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ तकनीक, नवाचार, रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, रिन्यूएबल एनर्जी, शिक्षा और समुद्री क्षेत्र में भी सहयोग गहरा हुआ है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर लिखा कि यह दौरा भारत-नीदरलैंड की बहुआयामी साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर है।
प्रवासी भारतीय समुदाय
नीदरलैंड में 90,000 से अधिक अनिवासी भारतीय और भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इसके साथ ही, सूरीनाम हिंदुस्तानी समुदाय के 2 लाख से अधिक सदस्य भी वहाँ बसे हैं। देश की विभिन्न विश्वविद्यालयों में फिलहाल करीब 3,500 भारतीय छात्र उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के संबंधों की मजबूत नींव को दर्शाता है।
आगे की राह
यह दौरा 17 मई तक चला। यूरोप में भारत की रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को विस्तार देने के व्यापक कूटनीतिक अभियान के तहत यह यात्रा एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, सेमीकंडक्टर और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में नीदरलैंड की तकनीकी श्रेष्ठता को देखते हुए यह साझेदारी भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम है।