भोजशाला मंदिर विवाद: हाईकोर्ट के फैसले के बाद धार में पहली पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ

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भोजशाला मंदिर विवाद: हाईकोर्ट के फैसले के बाद धार में पहली पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ

सारांश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया और मुसलमानों की नमाज की अनुमति रद्द कर दी। फैसले के अगले ही दिन धार में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और हनुमान चालीसा का पाठ किया — यह दशकों पुराने विवाद में एक निर्णायक मोड़ है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर घोषित किया।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने मुसलमानों को नमाज की अनुमति देने वाला पूर्व आदेश रद्द किया।
फैसले के बाद 16 मई को भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों समेत श्रद्धालुओं ने परिसर में पहली विधिवत पूजा की।
अदालत ने पाया कि ऐतिहासिक साहित्य के अनुसार यह स्थल संस्कृत शिक्षा का केंद्र और देवी सरस्वती का मंदिर था।
प्रशासन ने धार में बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात कर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा धार स्थित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती (वाग्देवी) को समर्पित मंदिर घोषित किए जाने के एक दिन बाद, 16 मई को श्रद्धालुओं ने वहाँ पूजा-अर्चना की और हनुमान चालीसा का पाठ किया। यह हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद भोजशाला में पहली विधिवत पूजा थी।

मुख्य घटनाक्रम

शनिवार सुबह भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला परिसर में एकत्रित हुए। पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न हुई और हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया। धार के हिंदू समुदाय में इस फैसले के बाद उत्साह का माहौल देखा गया।

हाईकोर्ट का फैसला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने शुक्रवार को भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद पर अपना निर्णय सुनाया। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने उस पूर्व आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत मुसलमानों को परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी।

अदालत ने अपने फैसले में कहा, 'भोजशाला परिसर और कमल मौला मस्जिद का विवादित इलाका एक संरक्षित स्मारक माना गया है। इस विवादित इलाके का धार्मिक स्वरूप भोजशाला का है, जिसमें देवी सरस्वती का मंदिर है।' अदालत ने यह भी पाया कि ऐतिहासिक साहित्य से यह प्रमाणित होता है कि यह स्थल संस्कृत शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था।

सुरक्षा के इंतजाम

पूजा के दौरान प्रशासन ने धार में कड़े सुरक्षा प्रबंध किए। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात किया गया। स्थिति सामान्य और शांतिपूर्ण बताई गई।

याचिकाओं की पृष्ठभूमि

यह फैसला उन याचिकाओं पर आया, जिनमें भोजशाला परिसर को हिंदुओं के लिए पुनः सुलभ कराने और परिसर में नमाज पर रोक लगाने की माँग की गई थी। अदालत ने हिंदू पक्ष को इस स्थान पर पूजा का अधिकार प्रदान किया।

क्या होगा आगे

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुस्लिम पक्ष सर्वोच्च न्यायालय में अपील करता है या नहीं। फिलहाल, परिसर में हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार मिल गया है और प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बरती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह अंतिम नहीं हो सकता — मुस्लिम पक्ष के सर्वोच्च न्यायालय जाने की संभावना बनी हुई है। गौरतलब है कि ऐसे विवादों में अदालती फैसले अक्सर सामाजिक सौहार्द की परीक्षा लेते हैं, और प्रशासन की सतर्कता इसी का संकेत है। असली चुनौती यह है कि कानूनी अधिकार और जमीनी शांति — दोनों एक साथ कैसे सुनिश्चित हों।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला क्या है?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती (वाग्देवी) को समर्पित मंदिर घोषित किया और हिंदू पक्ष को वहाँ पूजा का अधिकार दिया। साथ ही, मुसलमानों को परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति देने वाला पूर्व आदेश रद्द कर दिया गया।
भोजशाला परिसर का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
अदालत ने पाया कि ऐतिहासिक साहित्य के अनुसार भोजशाला संस्कृत शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था और यहाँ देवी सरस्वती का मंदिर स्थित था। यह परिसर एक संरक्षित स्मारक भी है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद धार में क्या हुआ?
फैसले के अगले दिन 16 मई को भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने भोजशाला परिसर में पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और हनुमान चालीसा का पाठ किया। यह हाईकोर्ट के आदेश के बाद पहली विधिवत पूजा थी।
भोजशाला में सुरक्षा की क्या स्थिति है?
प्रशासन ने धार में कड़े सुरक्षा प्रबंध किए हैं और बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात किया गया है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सतर्कता बरती जा रही है।
क्या इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है?
हाईकोर्ट का यह फैसला अंतिम नहीं है — मुस्लिम पक्ष सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकता है। फिलहाल हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार मिल गया है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रह सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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