PM मोदी ने नॉर्वे के शाही जोड़े को ओडिशा की पट्टचित्र और चांदी की नाव भेंट की, CM माझी ने कहा — गौरव का क्षण

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PM मोदी ने नॉर्वे के शाही जोड़े को ओडिशा की पट्टचित्र और चांदी की नाव भेंट की, CM माझी ने कहा — गौरव का क्षण

सारांश

पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा में ओडिशा की दो कालजयी कलाएँ — ताड़ के पत्ते पर पट्टचित्र और कटक की तारकशी चाँदी की नाव — राजनयिक भेंट बनीं। CM माझी ने इसे राज्य के कारीगरों के लिए वैश्विक मान्यता का ऐतिहासिक क्षण बताया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने अपनी पाँच देशों की यात्रा के दौरान नॉर्वे के राजा हेराल्ड-V और रानी को ओडिशा की हस्तशिल्प कृतियाँ भेंट कीं।
रानी को ताड़ के पत्ते पर बना पट्टचित्र और राजा को कटक की फिलिग्री (तारकशी) शैली में निर्मित चाँदी की नाव भेंट की गई।
CM मोहन चरण माझी ने 21 मई को एक्स पर पोस्ट कर ओडिशा की जनता की ओर से पीएम मोदी का आभार जताया।
दोनों कलाएँ GI Tag प्राप्त हैं और ओडिशा की सदियों पुरानी शिल्प-परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं।
माझी ने इसे राज्य के कारीगरों के लिए वैश्विक मंच पर पहचान का गौरवपूर्ण क्षण बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हाल ही में संपन्न पाँच देशों की राजनयिक यात्रा के दौरान नॉर्वे के राजा हेराल्ड-V और रानी को ओडिशा की दो अनमोल हस्तशिल्प कृतियाँ — एक ताड़ के पत्ते पर बना पट्टचित्र और कटक की फिलिग्री (तारकशी) शैली में निर्मित चाँदी की नाव — भेंट कीं। इस राजनयिक उपहार-विनिमय को ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य की कला-परंपरा के लिए ऐतिहासिक गौरव का क्षण बताया है।

कौन-सी कलाकृतियाँ भेंट की गईं

नॉर्वे की रानी को प्रधानमंत्री ने ताड़ के पत्ते पर बना पट्टचित्र भेंट किया — यह ओडिशा की मंदिर-परंपराओं से जुड़ी एक दुर्लभ कला है, जो सदियों पुरानी बारीक कारीगरी और भक्तिपूर्ण चित्रशैली का जीवंत प्रमाण है। राजा हेराल्ड-V को कटक की विश्वप्रसिद्ध फिलिग्री (तारकशी) शैली में बनी चाँदी की नाव भेंट की गई, जिसमें कुशल कारीगर चाँदी के अत्यंत बारीक तारों को गूँथकर अद्भुत आकृतियाँ तैयार करते हैं।

मुख्यमंत्री माझी के अनुसार ये उपहार पीएम मोदी ने सुविचारित रूप से चुने, ताकि वे भारत की सांस्कृतिक विरासत की गहराई और विविधता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत कर सकें।

CM माझी की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'नॉर्वे की अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर भारत की सभ्यतागत समृद्धि को दुनिया के सामने रखा, और ओडिशा की कालजयी कलात्मक विरासत को एक महत्वपूर्ण राजनयिक अवसर के केंद्र में स्थापित किया।'

माझी ने आगे कहा, 'यह कलाकृति न केवल भारत की गौरवशाली समुद्री विरासत को दर्शाती है, बल्कि दोनों देशों के बीच अटूट मित्रता की भावना को भी व्यक्त करती है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस तरह के प्रतिष्ठित राजनयिक आदान-प्रदान में ओडिशा की दो सबसे प्रसिद्ध कला-शैलियों का चयन, भारत की जीवंत विरासत को मिल रही बढ़ती वैश्विक पहचान का प्रमाण है।

ओडिशा के कारीगरों के लिए महत्व

माझी ने विशेष रूप से उन कारीगरों का उल्लेख किया जिनके हाथों ने इन कृतियों को जन्म दिया। उन्होंने कहा, 'सबसे बढ़कर, यह ओडिशा के उन कारीगरों के लिए एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है, जिनके हाथों में एक प्राचीन विरासत पल-बढ़ रही है, और जिनकी बनाई कलाकृतियाँ अब पूरी दुनिया से संवाद कर रही हैं।'

गौरतलब है कि पट्टचित्र और कटक की तारकशी — दोनों को भारत सरकार के भौगोलिक संकेत (GI Tag) से सम्मानित किया जा चुका है, जो इनकी अनन्य क्षेत्रीय पहचान को रेखांकित करता है।

राजनयिक संदर्भ

यह उपहार-विनिमय पीएम मोदी की पाँच देशों की यात्रा के दौरान हुआ, जिसमें नॉर्वे भी शामिल था। भारत-नॉर्वे संबंधों में समुद्री सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा और व्यापार प्रमुख क्षेत्र रहे हैं। ऐसे में समुद्री विरासत को प्रतिबिंबित करती चाँदी की नाव का चयन राजनयिक दृष्टि से भी सुविचारित माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री माझी ने गुरुवार, 21 मई को भुवनेश्वर से ओडिशा की जनता की ओर से प्रधानमंत्री का हृदय से आभार व्यक्त किया और कहा कि मोदी ने 'हमारी धरती की आत्मा को वैश्विक मंच पर पहुँचाया है।'

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार पट्टचित्र और तारकशी नाव का चुनाव सांस्कृतिक कूटनीति की एक सुविचारित परत दर्शाता है — विशेषकर तब, जब नॉर्वे के साथ भारत की समुद्री साझेदारी विस्तार पर है। असली सवाल यह है कि क्या यह वैश्विक प्रदर्शन ओडिशा के उन कारीगरों तक आर्थिक रूप से भी पहुँचता है जिनकी कला को मंच मिला — या यह केवल राजनयिक शोकेस तक सीमित रहता है। GI Tag के बावजूद पट्टचित्र और तारकशी कारीगर अक्सर बिचौलियों पर निर्भर रहते हैं और उन्हें उचित मूल्य नहीं मिलता। इस प्रकार की उच्च-प्रोफ़ाइल पहचान तभी सार्थक होगी जब इसके साथ घरेलू बाज़ार और निर्यात नीति में ठोस बदलाव भी आएँ।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने नॉर्वे के शाही परिवार को क्या उपहार दिए?
PM मोदी ने नॉर्वे की रानी को ताड़ के पत्ते पर बना ओडिशा का पट्टचित्र और राजा हेराल्ड-V को कटक की फिलिग्री (तारकशी) शैली में बनी चाँदी की नाव भेंट की। दोनों कलाकृतियाँ ओडिशा की सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं।
पट्टचित्र और तारकशी क्या हैं?
पट्टचित्र ओडिशा की मंदिर-परंपरा से जुड़ी एक प्राचीन चित्रकला शैली है, जो ताड़ के पत्तों या कपड़े पर बनाई जाती है। तारकशी (फिलिग्री) कटक की विशिष्ट शिल्पकला है, जिसमें चाँदी के बारीक तारों को गूँथकर जटिल आकृतियाँ बनाई जाती हैं। दोनों को भारत सरकार का GI Tag प्राप्त है।
CM मोहन चरण माझी ने इस पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 21 मई को एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह ओडिशा के कारीगरों के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है। उन्होंने PM मोदी का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस राजनयिक भेंट ने ओडिशा की कालजयी कलात्मक विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित किया।
यह उपहार-विनिमय किस यात्रा के दौरान हुआ?
यह PM मोदी की हाल ही में संपन्न पाँच देशों की राजनयिक यात्रा के दौरान हुआ, जिसमें नॉर्वे एक पड़ाव था। इस यात्रा में मोदी ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को राजनयिक संवाद के केंद्र में रखा।
ओडिशा के कारीगरों के लिए इस घटना का क्या महत्व है?
CM माझी के अनुसार, इस तरह के प्रतिष्ठित राजनयिक अवसर पर ओडिशा की दो प्रमुख कला-शैलियों का चुनाव राज्य के कारीगरों की वैश्विक पहचान का प्रमाण है। यह उन शिल्पकारों के लिए विशेष महत्व रखता है जो इन प्राचीन परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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