पीएम मोदी ने मेलोनी को भेंट की शिरुई लिली और मूगा सिल्क स्टोल, जानें इन दुर्लभ उपहारों की खासियत

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पीएम मोदी ने मेलोनी को भेंट की शिरुई लिली और मूगा सिल्क स्टोल, जानें इन दुर्लभ उपहारों की खासियत

सारांश

पाँच देशों की यात्रा में पीएम मोदी ने इटली की पीएम मेलोनी को मणिपुर की शिरुई लिली सिल्क स्टोल और असम का 'गोल्डन सिल्क' मूगा स्टोल भेंट किए — पूर्वोत्तर भारत की दुर्लभ विरासत को वैश्विक मंच पर पेश करते हुए सांस्कृतिक कूटनीति का अनूठा संदेश दिया।

मुख्य बातें

पीएम नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मूगा सिल्क स्टोल और शिरुई लिली सिल्क स्टोल भेंट किए।
मूगा सिल्क असम की ब्रह्मपुत्र घाटी का दुर्लभ 'गोल्डन सिल्क' है, जो बिना कृत्रिम रंग के तैयार होता है और पीढ़ियों तक टिकता है।
शिरुई लिली विश्व में केवल मणिपुर की शिरुई काशोंग पहाड़ियों पर खिलती है और तंगखुल नगा समुदाय के लिए सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।
इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला को आगरा की पच्चीकारी कला से निर्मित मार्बल इनले बॉक्स और पंडित भीमसेन जोशी व एम.एस.
सुब्बुलक्ष्मी की सीडी भेंट की गईं।
पच्चीकारी कला की उत्पत्ति इटली के फ्लोरेंस में मानी जाती है, जो बाद में भारत में फली-फूली — यह उपहार दोनों देशों की साझा कला-विरासत का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाँच देशों — संयुक्त अरब अमीरात, इटली, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे — की यात्रा पूर्ण कर गुरुवार को स्वदेश लौटे। इस दौरे में उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को पूर्वोत्तर भारत की दो दुर्लभ वस्त्र विरासतों — मूगा सिल्क स्टोल और शिरुई लिली सिल्क स्टोल — से सजे विशेष उपहार भेंट किए, जो भारत और इटली के बीच सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को रेखांकित करते हैं।

मूगा सिल्क: असम का 'गोल्डन सिल्क'

मूगा सिल्क असम की ब्रह्मपुत्र घाटी का एक अत्यंत दुर्लभ और प्रतिष्ठित वस्त्र है, जिसे दुनियाभर में 'गोल्डन सिल्क' के नाम से जाना जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका प्राकृतिक सुनहरा रंग बिना किसी कृत्रिम रंजक के तैयार होता है।

दुनिया के सबसे मज़बूत प्राकृतिक रेशों में शुमार मूगा सिल्क अपनी असाधारण मज़बूती, यूवी-प्रतिरोधी गुणों और नमी सोखने की क्षमता के लिए विशेष रूप से सराहा जाता है। यह पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सकता है और समय के साथ इसकी प्राकृतिक चमक और भी निखरती जाती है। इटली की समृद्ध वस्त्र परंपरा और इस 'गोल्डन सिल्क' की भव्यता के बीच एक स्वाभाविक तालमेल है, जो इस उपहार को और भी सार्थक बनाता है।

शिरुई लिली स्टोल: मणिपुर की पहाड़ियों से प्रेरित

शिरुई लिली सिल्क स्टोल मणिपुर की धुंध भरी शिरुई काशोंग पहाड़ियों से प्रेरणा लेकर बनाया गया है। शिरुई लिली एक घंटी के आकार का फूल है, जिसकी पंखुड़ियाँ हल्के गुलाबी-सफ़ेद रंग की होती हैं — और यह फूल विश्व में केवल इसी पर्वत पर खिलता है।

मणिपुर के तंगखुल नगा समुदाय के लिए शिरुई लिली पवित्रता, पहचान और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। यह स्टोल हिमालयी कारीगरी की सुंदरता के साथ-साथ स्थानीय परंपराओं और लोककथाओं की भावना को भी समेटे हुए है। उल्लेखनीय है कि इटली में भी लिली का गहरा सांस्कृतिक महत्व है — वहाँ यह पुनर्जागरण काल की कलाकृतियों में पवित्रता और कलात्मक परिष्कार के प्रतीक के रूप में प्रमुखता से दिखती है। इस साझा प्रतीकात्मकता में भारत और इटली के बीच एक अनोखा सांस्कृतिक जुड़ाव निहित है।

राष्ट्रपति मैटारेला को पच्चीकारी और संगीत का उपहार

पीएम मोदी ने इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला को आगरा की विश्वप्रसिद्ध पच्चीकारी कला से निर्मित मार्बल इनले वर्क बॉक्स भेंट किया। साथ ही पंडित भीमसेन जोशी और एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी की सीडी भी उपहार में दी गई।

यह संगमरमर जड़ाई बक्सा भारत की हस्तशिल्प कला का एक उत्कृष्ट नमूना है। गौरतलब है कि 'पच्चीकारी' अथवा 'पिएत्रा ड्यूरा' कला की उत्पत्ति इटली के फ्लोरेंस में मानी जाती है, जो बाद में भारत में मुगल शाही संरक्षण में खूब पली-बढ़ी। इस प्रकार यह उपहार दोनों देशों के बीच कला और इतिहास का एक अद्भुत सेतु बन गया।

पाँच देशों की यात्रा का सांस्कृतिक संदेश

पीएम मोदी की यह पाँच-देशीय यात्रा केवल रणनीतिक और द्विपक्षीय वार्ताओं तक सीमित नहीं रही — इसमें भेंट किए गए उपहारों ने भी एक सुविचारित सांस्कृतिक कूटनीति का संदेश दिया। पूर्वोत्तर भारत के दुर्लभ शिल्प को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना, 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करता है। आने वाले समय में इस तरह की सांस्कृतिक कूटनीति भारत-इटली संबंधों को और नई ऊँचाइयाँ देने में सहायक होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पूर्वोत्तर भारत के दुर्लभ शिल्प को वैश्विक मंच पर स्थापित करती है। शिरुई लिली और मूगा सिल्क जैसे उत्पादों को राजनयिक उपहारों में शामिल करना 'वोकल फॉर लोकल' की भावना का व्यावहारिक विस्तार है, जो मणिपुर और असम के कारीगरों को अप्रत्यक्ष रूप से अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाता है। पच्चीकारी उपहार में फ्लोरेंस-आगरा की साझा कला-विरासत का संदर्भ इस कूटनीति को और परिपक्व बनाता है। सवाल यह है कि क्या इस सॉफ्ट-पावर प्रदर्शन के साथ इन शिल्पों के उत्पादकों के लिए ठोस आर्थिक अवसर भी सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी ने इटली की पीएम मेलोनी को क्या उपहार दिए?
पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को असम का मूगा सिल्क स्टोल और मणिपुर की शिरुई लिली से प्रेरित शिरुई लिली सिल्क स्टोल भेंट किए। ये दोनों उपहार पूर्वोत्तर भारत की दुर्लभ वस्त्र विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
शिरुई लिली क्या है और यह खास क्यों है?
शिरुई लिली एक घंटी के आकार का हल्के गुलाबी-सफ़ेद रंग का फूल है, जो विश्व में केवल मणिपुर की शिरुई काशोंग पहाड़ियों पर ही खिलता है। यह मणिपुर के तंगखुल नगा समुदाय के लिए पवित्रता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।
मूगा सिल्क को 'गोल्डन सिल्क' क्यों कहते हैं?
मूगा सिल्क असम की ब्रह्मपुत्र घाटी में उत्पादित होता है और इसका प्राकृतिक सुनहरा रंग बिना किसी कृत्रिम रंजक के आता है, इसीलिए इसे 'गोल्डन सिल्क' कहा जाता है। यह दुनिया के सबसे मज़बूत प्राकृतिक रेशों में से एक है और पीढ़ियों तक टिकाऊ रहता है।
पीएम मोदी ने इटली के राष्ट्रपति मैटारेला को क्या भेंट किया?
पीएम मोदी ने इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला को आगरा की पच्चीकारी (पिएत्रा ड्यूरा) कला से निर्मित मार्बल इनले वर्क बॉक्स के साथ पंडित भीमसेन जोशी और एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी की सीडी भेंट कीं। पच्चीकारी कला की उत्पत्ति इटली के फ्लोरेंस में मानी जाती है, जो बाद में भारत में फली-फूली।
पीएम मोदी की हालिया पाँच-देशीय यात्रा में कौन-से देश शामिल थे?
पीएम मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात, इटली, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे की यात्रा की और गुरुवार को स्वदेश लौटे। इस दौरे में रणनीतिक एवं द्विपक्षीय वार्ताओं के साथ-साथ सांस्कृतिक कूटनीति भी केंद्र में रही।
राष्ट्र प्रेस
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