PM मोदी ने नॉर्वे के राजा-रानी, प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस को दिए भारतीय हस्तशिल्प के अनमोल उपहार

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PM मोदी ने नॉर्वे के राजा-रानी, प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस को दिए भारतीय हस्तशिल्प के अनमोल उपहार

सारांश

पीएम मोदी के नॉर्वे दौरे में उपहार महज़ शिष्टाचार नहीं थे — सिक्किम की ऑर्किड कला, ओडिशा की 500 साल पुरानी तारकशी और आंध्र प्रदेश की कलमकारी के ज़रिए भारत ने अपनी सॉफ्ट पावर का सुनियोजित प्रदर्शन किया।

मुख्य बातें

PM मोदी ने पाँच देशों की यात्रा के दौरान नॉर्वे के शीर्ष नेतृत्व को भारतीय हस्तशिल्प उपहार भेंट किए।
नॉर्वे के प्रधानमंत्री को सिक्किम की प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग और ऑर्किड पेपरवेट दिए गए।
राजा हेराल्ड पंचम को कटक की 500 वर्ष पुरानी तारकशी (सिल्वर फिलिग्री) से बनी चाँदी की सेलबोट भेंट की गई।
रानी को ओडिशा की प्राचीन पाम लीफ पट्टचित्र (ताला पट्टचित्र) दी गई।
क्राउन प्रिंस को आंध्र प्रदेश की कलमकारी कला में बनी सूर्य-चंद्रमा थीम वाली पेंटिंग भेंट की गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाँच देशों की यात्रा के दौरान नॉर्वे में दिए गए उपहारों ने भारत की सांस्कृतिक कूटनीति की गहराई को उजागर किया। नॉर्वे के प्रधानमंत्री, राजा, रानी और क्राउन प्रिंस को भेंट की गई ये कलाकृतियाँ देश के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक हस्तशिल्प परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। हर उपहार को इस तरह चुना गया कि वह भारत और नॉर्वे के साझा मूल्यों — प्रकृति-प्रेम, समुद्री विरासत और कहानी कहने की परंपरा — से जुड़ सके।

नॉर्वे के प्रधानमंत्री को 'प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग' और 'ऑर्किड पेपरवेट'

नॉर्वे के प्रधानमंत्री को प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग और ऑर्किड पेपरवेट भेंट किए गए। ये कलाकृतियाँ सिक्किम की धुंध भरी घाटियों में पाए जाने वाले असली प्रेस्ड ऑर्किड और फर्न से तैयार की गई हैं, जो पूर्वी हिमालय की जैव विविधता का जीवंत प्रतीक हैं।

स्थानीय कारीगरों ने प्रत्येक फूल और फर्न को सावधानीपूर्वक चुनकर संरक्षित किया है। भारत के पहले जैविक (ऑर्गेनिक) राज्य सिक्किम से आई यह कला पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। नॉर्वे की प्रकृति-केंद्रित संस्कृति और फूलों के प्रति प्रेम से यह उपहार एक स्वाभाविक सेतु बनाता है।

राजा हेराल्ड पंचम को ओडिशा की 'तारकशी सेलबोट'

नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम को ओडिशा के कटक की प्रसिद्ध तारकशी (सिल्वर फिलिग्री) कला से निर्मित एक बारीक नक्काशीदार चाँदी की सेलबोट भेंट की गई। 500 वर्ष पुरानी इस कला में अत्यंत महीन चाँदी के तारों को मोड़कर और जोड़कर सुंदर डिजाइन तैयार किए जाते हैं, जिसके कारण कटक को 'सिल्वर सिटी' की पहचान मिली है।

यह नौका ओडिशा की समृद्ध समुद्री विरासत और उन प्राचीन भारतीय व्यापारियों की स्मृति को जीवित करती है जो समुद्री मार्गों से दूरदराज़ देशों तक पहुँचते थे। यह उपहार इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि राजा हेराल्ड पंचम का नौकायन से आजीवन गहरा नाता रहा है और उन्होंने ओलंपिक खेलों में भी नॉर्वे का प्रतिनिधित्व किया था। वाइकिंग्स और समुद्री अन्वेषण की नॉर्वेजियन परंपरा से यह उपहार एक विशेष साम्य रखता है।

रानी को ओडिशा की 'पाम लीफ पट्टचित्र'

नॉर्वे की रानी को पाम लीफ पट्टचित्र — जिसे स्थानीय भाषा में ताला पट्टचित्र कहा जाता है — भेंट की गई। यह ओडिशा की प्राचीनतम कला परंपराओं में से एक है, जिसमें विशेष रूप से तैयार ताड़ के पत्तों पर अत्यंत महीन चित्र उकेरे जाते हैं।

इस कला में कहानी, लिखावट और पारंपरिक चित्रकारी का अद्भुत संगम होता है। कई बार इन्हें धागों से जोड़कर फोल्ड होने वाले पैनल या पट्टियों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। नॉर्डिक पांडुलिपियों और लोक कला की भाँति, यह कला भी धैर्य, कारीगरी और सांस्कृतिक स्मृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखती है।

क्राउन प्रिंस को 'सूर्य-चंद्रमा थीम वाली कलमकारी पेंटिंग'

नॉर्वे के क्राउन प्रिंस को आंध्र प्रदेश की प्राचीन कलमकारी कला में बनी सूर्य और चंद्रमा थीम वाली पेंटिंग भेंट की गई। इस कला में प्राकृतिक रंगों और बारीक डिजाइनों के माध्यम से पारंपरिक कथाएँ चित्रित की जाती हैं।

कलमकारी की दो प्रमुख शैलियाँ हैं — श्रीकालहस्ती शैली, जिसमें बाँस की कलम से हाथ से चित्र बनाए जाते हैं, और मछलीपट्टनम शैली, जिसमें हाथ से तराशे गए लकड़ी के ब्लॉक्स का उपयोग होता है। सूर्य और चंद्रमा का यह प्रतीक जीवन के संतुलन को दर्शाता है — सूर्य ऊर्जा और जागरूकता का, जबकि चंद्रमा शांति और संवेदनशीलता का प्रतीक है। यह नॉर्वे के प्रसिद्ध 'मिडनाइट सन' की अवधारणा से भी एक सहज जुड़ाव बनाता है, जहाँ प्रकाश और अंधकार साथ-साथ विद्यमान रहते हैं।

सांस्कृतिक कूटनीति का संदेश

गौरतलब है कि पीएम मोदी की विदेश यात्राओं में उपहारों का चयन महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सुविचारित कूटनीतिक संदेश होता है। सिक्किम, ओडिशा और आंध्र प्रदेश की कलाओं को एक ही यात्रा में प्रस्तुत करना भारत की क्षेत्रीय विविधता और हस्तशिल्प की वैश्विक पहचान को रेखांकित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी सॉफ्ट पावर को वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावी ढंग से स्थापित करने में जुटा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो केंद्र सरकार की 'वोकल फॉर लोकल' नीति का कूटनीतिक विस्तार है। नॉर्वे के मामले में उपहारों की थीमेटिक संगति — समुद्री विरासत, प्रकृति-प्रेम, कहानी कहने की परंपरा — दर्शाती है कि यह चयन सोची-समझी रणनीति से हुआ। हालाँकि, इन सांस्कृतिक प्रतीकों के पीछे जिन कारीगरों का श्रम है, उनकी आर्थिक स्थिति और हस्तशिल्प क्षेत्र में रोज़गार के आँकड़े अक्सर इस चमक से ओझल रह जाते हैं — यही वह प्रश्न है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अनदेखा करती है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को क्या उपहार दिया?
PM मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को सिक्किम की 'प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग' और 'ऑर्किड पेपरवेट' भेंट किए। ये कलाकृतियाँ पूर्वी हिमालय की जैव विविधता का प्रतीक हैं और भारत के पहले ऑर्गेनिक राज्य सिक्किम के स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाई गई हैं।
नॉर्वे के राजा को दी गई सेलबोट किस कला से बनी है?
राजा हेराल्ड पंचम को ओडिशा के कटक की 500 वर्ष पुरानी तारकशी (सिल्वर फिलिग्री) कला से निर्मित चाँदी की सेलबोट भेंट की गई। इस कला में अत्यंत महीन चाँदी के तारों को मोड़-जोड़कर जटिल डिजाइन तैयार किए जाते हैं, जिसके कारण कटक को 'सिल्वर सिटी' कहा जाता है।
पाम लीफ पट्टचित्र क्या है और यह नॉर्वे की रानी को क्यों दी गई?
पाम लीफ पट्टचित्र (ताला पट्टचित्र) ओडिशा की प्राचीनतम कला परंपराओं में से एक है, जिसमें ताड़ के पत्तों पर महीन चित्र उकेरे जाते हैं। इसे नॉर्वे की रानी को इसलिए चुना गया क्योंकि नॉर्डिक लोक कला और पांडुलिपि परंपरा की भाँति यह कला भी धैर्य और कारीगरी से सांस्कृतिक विरासत को संजोती है।
कलमकारी पेंटिंग में सूर्य और चंद्रमा का क्या अर्थ है?
कलमकारी में सूर्य ऊर्जा, जीवन शक्ति और जागरूकता का प्रतीक है, जबकि चंद्रमा शांति और संवेदनशीलता को दर्शाता है — यह जीवन के दो पहलुओं के संतुलन का प्रतीक है। नॉर्वे के 'मिडनाइट सन' की अवधारणा — जहाँ प्रकाश और अंधकार एक साथ विद्यमान रहते हैं — से इसका स्वाभाविक जुड़ाव इसे क्राउन प्रिंस के लिए विशेष उपहार बनाता है।
PM मोदी की इस यात्रा में कुल कितने देश शामिल थे?
PM मोदी की इस यात्रा में कुल पाँच देश शामिल थे, जिसके बाद वे 21 मई को भारत लौटे। नॉर्वे इस यात्रा के प्रमुख पड़ावों में से एक था, जहाँ भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति को उपहारों के माध्यम से विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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