30 जून 2026
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सेशेल्स दौरे पर PM मोदी के उपहार: राष्ट्रपति को मुरादाबादी पीतल कछुआ, स्पीकर को टोडा शॉल

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सेशेल्स दौरे पर PM मोदी के उपहार: राष्ट्रपति को मुरादाबादी पीतल कछुआ, स्पीकर को टोडा शॉल

सारांश

सेशेल्स दौरे पर PM मोदी के उपहार महज़ तोहफे नहीं थे — वे भारत की सॉफ्ट पावर का बयान थे। मुरादाबाद से कांचीपुरम और बीदर से नीलगिरि तक, हर उपहार में 'वोकल फॉर लोकल' की झलक और हिंद महासागर कूटनीति की गहरी समझ दिखती है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी 30 जून 2026 को तीन दिवसीय सेशेल्स दौरा संपन्न कर स्वदेश लौटे।
पैट्रिक हर्मिनी को मुरादाबाद की पीतल शिल्पकला से बना कलात्मक कछुआ भेंट किया गया।
संसद स्पीकर अजारेल अर्नेस्टा को नीलगिरि के टोडा जनजाति की 'पुखूर' कढ़ाई वाली शॉल दी गई।
उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्लई को सिक्किम की ऑर्किड पेंटिंग और उनकी पत्नी को कांचीवरम सिल्क (GI टैग प्राप्त) भेंट की गई।
प्रथम महिला वेरोनिक हर्मिनी को महेश्वरी सिल्क स्टोल और बिदरी धातुकला का बॉक्स उपहार में दिया गया।
सभी उपहार भारत के विभिन्न क्षेत्रों की GI-टैग और ODOP-मान्यता प्राप्त हस्तशिल्प परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय सेशेल्स दौरा सफलतापूर्वक संपन्न कर 30 जून 2026 को स्वदेश लौटे। राजनयिक परंपरा के अनुरूप उन्होंने सेशेल्स के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों को भारत के विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट हस्तशिल्प कलाओं से तैयार उपहार भेंट किए — जो उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक फैली भारतीय सांस्कृतिक विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं।

राष्ट्रपति को मुरादाबादी पीतल कछुआ

सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की प्रसिद्ध पीतल शिल्पकला से निर्मित एक कलात्मक कछुआ भेंट किया गया। बारीक नक्काशी और परिष्कृत फिनिश से सुसज्जित यह कलाकृति भारतीय दर्शन में ज्ञान, स्थिरता, धैर्य और दीर्घायु के प्रतीक कछुए का प्रतिनिधित्व करती है। यह उपहार सेशेल्स के विश्वप्रसिद्ध एल्डाब्रा जायंट टॉर्टॉइज से भी प्रतीकात्मक रूप से जुड़ता है, जिससे दोनों देशों के बीच प्रकृति संरक्षण और मैत्री के साझा मूल्यों को रेखांकित किया गया।

संसद स्पीकर को टोडा कढ़ाई की शॉल

सेशेल्स की संसद की स्पीकर अजारेल अर्नेस्टा को तमिलनाडु की नीलगिरि पहाड़ियों के टोडा जनजाति की पारंपरिक कढ़ाई से बनी एक विशेष शॉल भेंट की गई। सफेद सूती कपड़े पर लाल और काले रंग के आकर्षक डिज़ाइनों से सजी यह शॉल 'पुखूर' नामक विशिष्ट हस्तकढ़ाई तकनीक से तैयार की गई है। यह उपहार भारत की स्वदेशी विरासत और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है, जो सेशेल्स की सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण की भावना से भी मेल खाता है।

उपराष्ट्रपति को सिक्किम की ऑर्किड पेंटिंग

सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्लई को सिक्किम की एक विशेष ऑर्किड पेंटिंग उपहार में दी गई। इस चित्रकला में भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर को ऑर्किड के फूलों और पुष्प लताओं के बीच चित्रित किया गया है। गौरतलब है कि ऑर्किड सेशेल्स का राष्ट्रीय पुष्प भी है, जिससे यह कलाकृति दोनों देशों की जैव विविधता और सांस्कृतिक सौहार्द के साझा मूल्यों का सुंदर प्रतीक बन जाती है।

प्रथम महिला और द्वितीय महिला को विशेष उपहार

राष्ट्रपति हर्मिनी की पत्नी और सेशेल्स की प्रथम महिला वेरोनिक हर्मिनी को दो उपहार दिए गए — मध्य प्रदेश के महेश्वर की प्रसिद्ध महेश्वरी बुनाई परंपरा से तैयार एक रेशमी स्टोल, और कर्नाटक के बीदर की विख्यात बिदरी धातु कला से निर्मित एक सुंदर बॉक्स। महेश्वरी स्टोल रेशम और सूती धागों के मिश्रण से बना है, जिस पर पुष्प आकृतियाँ और आकर्षक रंग संयोजन भारतीय हथकरघा कला की उत्कृष्टता प्रदर्शित करते हैं। बिदरी बॉक्स काले धातु पर चाँदी की महीन जड़ाई के लिए प्रसिद्ध है — जस्ता और ताँबे के मिश्रधातु पर नक्काशी, चाँदी की तारों की जड़ाई और विशेष ऑक्सीकरण प्रक्रिया से तैयार यह शिल्प भारतीय धातुकला की अनूठी परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उपराष्ट्रपति पिल्लई की पत्नी लीना पिल्लई को तमिलनाडु के कांचीपुरम की विश्वप्रसिद्ध कांचीवरम सिल्क फैब्रिक भेंट की गई। मैरून रंग के इस वस्त्र पर सुनहरी जरी की आकर्षक आकृतियाँ और लाल, हरे-सुनहरे रंगों वाला बॉर्डर इसे विशेष बनाता है। कांचीपुरम सिल्क को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त है और इसे वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) पहल के अंतर्गत भी मान्यता मिली हुई है।

कूटनीतिक उपहारों का संदेश

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' और हिंद महासागर क्षेत्र की कूटनीति को और मज़बूत कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के इन उपहारों में भारत के हर कोने की शिल्पकला को स्थान देना — मुरादाबाद, महेश्वर, बीदर, कांचीपुरम, नीलगिरि और सिक्किम — एक सोची-समझी रणनीति है जो 'वोकल फॉर लोकल' और भारत की सॉफ्ट पावर को एक साथ रेखांकित करती है। आने वाले समय में भारत-सेशेल्स संबंधों में इस दौरे के दौरान हुई चर्चाओं के ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो घरेलू कारीगरों को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाता है। यह परंपरा पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कूटनीति की एक पहचान बन चुकी है। हालाँकि, असली सवाल यह है कि क्या इन उपहारों से जुड़े कारीगरों और समुदायों को आर्थिक लाभ वास्तव में मिल रहा है, या यह प्रचार तक सीमित है — यह जाँच का विषय बना रहना चाहिए।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने सेशेल्स दौरे पर किन-किन नेताओं को उपहार दिए?
PM मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी, संसद स्पीकर अजारेल अर्नेस्टा, उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्लई, प्रथम महिला वेरोनिक हर्मिनी और द्वितीय महिला लीना पिल्लई को उपहार भेंट किए। सभी उपहार भारत के विभिन्न राज्यों की प्रसिद्ध हस्तशिल्प कलाओं से निर्मित थे।
सेशेल्स के राष्ट्रपति को दिया गया मुरादाबादी कछुआ क्या है?
यह उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की पीतल शिल्पकला से बनी एक कलात्मक कलाकृति है, जो बारीक नक्काशी और परिष्कृत फिनिश के लिए जानी जाती है। भारतीय दर्शन में कछुआ ज्ञान, स्थिरता और दीर्घायु का प्रतीक है, और यह सेशेल्स के एल्डाब्रा जायंट टॉर्टॉइज से भी प्रतीकात्मक रूप से जुड़ता है।
टोडा शॉल क्या है और इसे क्यों उपहार में दिया गया?
टोडा शॉल तमिलनाडु की नीलगिरि पहाड़ियों में रहने वाले टोडा जनजाति की 'पुखूर' हस्तकढ़ाई तकनीक से बनाई जाती है। सफेद सूती कपड़े पर लाल-काले डिज़ाइनों वाली यह शॉल भारत की स्वदेशी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जिसे संसद स्पीकर अजारेल अर्नेस्टा को भेंट किया गया।
कांचीवरम सिल्क को GI टैग क्यों मिला है?
कांचीपुरम सिल्क को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग इसलिए मिला है क्योंकि यह केवल तमिलनाडु के कांचीपुरम क्षेत्र में विशेष बुनाई परंपरा से तैयार होती है। इसकी चमक, मजबूती और जरी के बारीक काम के कारण यह विश्वप्रसिद्ध है, और इसे ODOP पहल के अंतर्गत भी मान्यता प्राप्त है।
PM मोदी का सेशेल्स दौरा कब हुआ और इसका उद्देश्य क्या था?
PM मोदी का तीन दिवसीय सेशेल्स दौरा 30 जून 2026 को संपन्न हुआ। यह दौरा भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में कूटनीतिक संबंधों को मज़बूत करने के उद्देश्य से किया गया, जिसमें भारतीय हस्तशिल्प उपहारों के माध्यम से सॉफ्ट पावर का भी प्रदर्शन हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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