सेशेल्स दौरे पर PM मोदी ने दिए भारतीय शिल्प के अनमोल उपहार — कछुए से कांचीवरम तक
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 जून 2025 को तीन दिवसीय सेशेल्स दौरा संपन्न कर स्वदेश वापसी की। इस राजनयिक यात्रा के दौरान उन्होंने सेशेल्स के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों को भारत के विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक हस्तशिल्प कलाओं से तैयार उपहार भेंट किए — उत्तर प्रदेश की पीतल कला से लेकर तमिलनाडु की कांचीवरम सिल्क तक, हर तोहफे में भारत की सांस्कृतिक विविधता की झलक थी।
राष्ट्रपति को मुरादाबादी पीतल का कछुआ
सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की विश्वप्रसिद्ध पीतल शिल्पकला से निर्मित एक कलात्मक कछुआ भेंट किया गया। बारीक नक्काशी और परिष्कृत फिनिश से सुसज्जित यह कलाकृति भारतीय दर्शन में ज्ञान, स्थिरता, धैर्य और दीर्घायु के प्रतीक कछुए का प्रतिनिधित्व करती है। यह उपहार सेशेल्स के प्रतिष्ठित एल्डाब्रा जायंट टॉर्टॉइज से भी प्रतीकात्मक रूप से जुड़ता है, जो दोनों देशों के बीच प्रकृति संरक्षण और मित्रता के साझा मूल्यों को रेखांकित करता है।
स्पीकर को टोडा जनजाति की पारंपरिक शॉल
सेशेल्स की संसद की स्पीकर अजारेल अर्नेस्टा को तमिलनाडु की नीलगिरि पहाड़ियों में निवास करने वाले टोडा जनजाति की पारंपरिक कढ़ाई से तैयार शॉल प्रदान की गई। सफेद सूती कपड़े पर लाल और काले रंग के आकर्षक ज्यामितीय डिज़ाइनों से सुसज्जित यह शॉल 'पुखूर' नामक विशिष्ट हस्तकढ़ाई तकनीक से बनी है। यह उपहार भारत की स्वदेशी सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी कला कौशल का प्रतीक है, जो सेशेल्स की अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण की भावना से भी मेल खाता है।
उपराष्ट्रपति को सिक्किम की ऑर्किड पेंटिंग
सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्लई को सिक्किम की एक विशेष चित्रकला भेंट की गई, जिसमें भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर को ऑर्किड के फूलों और पुष्प लताओं के बीच चित्रित किया गया है। गौरतलब है कि ऑर्किड सेशेल्स का राष्ट्रीय पुष्प भी है, जिससे यह उपहार दोनों देशों की जैव विविधता और सांस्कृतिक सौहार्द के साझा मूल्यों का सुंदर प्रतीक बन जाता है।
प्रथम महिला को महेश्वरी सिल्क स्टोल और बिदरी बॉक्स
राष्ट्रपति हर्मिनी की पत्नी और सेशेल्स की प्रथम महिला वेरोनिक हर्मिनी को दो उपहार दिए गए। पहला — मध्य प्रदेश के महेश्वर की प्रसिद्ध महेश्वरी बुनाई परंपरा से तैयार एक रेशमी स्टोल, जो रेशम और सूती धागों के मिश्रण से बना है और अपने हल्के वजन, आकर्षक पुष्प आकृतियों और उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए जाना जाता है।
दूसरा उपहार कर्नाटक के बीदर की विश्वप्रसिद्ध बिदरी धातु कला से निर्मित एक बॉक्स था। जस्ता और तांबे की मिश्रधातु पर बारीक नक्काशी, चांदी की तारों की जड़ाई और विशेष ऑक्सीकरण प्रक्रिया से तैयार यह शिल्प भारतीय धातुकला की अनूठी परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है।
द्वितीय महिला को कांचीवरम सिल्क फैब्रिक
उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्लई की पत्नी लीना पिल्लई को तमिलनाडु के कांचीपुरम की विश्वप्रसिद्ध कांचीवरम सिल्क फैब्रिक भेंट की गई। मैरून रंग के इस वस्त्र पर सुनहरी जरी की आकर्षक आकृतियाँ और लाल, हरे-सुनहरे रंगों वाला बॉर्डर इसे विशेष बनाता है। उल्लेखनीय है कि कांचीपुरम सिल्क को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त है और इसे वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) पहल के अंतर्गत भी मान्यता मिली हुई है। यह दौरा भारत और सेशेल्स के बीच सांस्कृतिक और राजनयिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।