मुरादाबाद के पीतल कछुए से बढ़ी भारतीय हस्तशिल्प की वैश्विक पहचान: पद्मश्री चिरंजी लाल यादव
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सेशेल्स के राष्ट्रपति को मुरादाबाद निर्मित प्रसिद्ध पीतल के कछुए को राजकीय उपहार के रूप में भेंट किए जाने से हस्तशिल्प जगत में उत्साह की लहर है। पद्मश्री से सम्मानित हस्तशिल्प गुरु चिरंजी लाल यादव ने इसे मुरादाबाद के कारीगरों और भारतीय हस्तशिल्प परंपरा के लिए गर्व का ऐतिहासिक अवसर बताया है।
मुरादाबाद की 'ब्रास सिटी' पहचान को नया आयाम
चिरंजी लाल यादव ने कहा कि मुरादाबाद को 'ब्रास सिटी' के रूप में पूरी दुनिया में पहचान प्राप्त है और प्रधानमंत्री द्वारा इसी शहर में निर्मित पीतल का कछुआ उपहार स्वरूप देना इस पहचान को और मज़बूत करता है। उन्होंने कहा कि अब मुरादाबाद के कारीगरों और उनके उत्पादों को विदेशों में भी प्रधानमंत्री के माध्यम से जाना जाएगा। यह केवल एक उपहार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का सशक्त प्रतीक है।
कछुए का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
यादव ने बताया कि भारतीय परंपरा में कछुए को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और यह समृद्धि एवं शुभता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भले इसका महत्व सीमित रूप से देखा जाता हो, लेकिन देश के अन्य हिस्सों में इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। सेशेल्स की सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए इस उपहार का चयन विशेष रूप से सार्थक है।
'लोकल फॉर वोकल' और भारत की सॉफ्ट पावर
यादव ने प्रधानमंत्री के इस कदम को 'लोकल फॉर वोकल' अभियान और भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा अपने क्षेत्र की विशिष्ट पहचान रखने वाले उत्पादों का ही चयन करते हैं — चाहे मुरादाबाद का पीतल हो, बनारस का शॉल हो या कश्मीर की कढ़ाई। गौरतलब है कि केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि मणिपुर, वाराणसी, बेंगलुरु और तेलंगाना सहित देश के विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्पों को भी समान रूप से प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
कारीगरों को मिल रहे नए अवसर
यादव के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से भारत और विदेशों में आयोजित होने वाली प्रदर्शनियों में हस्तशिल्पियों को अवसर और अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें स्वयं अब तक विदेश में प्रदर्शनी में भाग लेने का अवसर नहीं मिला है, लेकिन उद्योग विभाग की ओर से जानकारी दी गई है कि भविष्य में वे भी ऐसे आयोजनों का हिस्सा बन सकते हैं।
पद्मश्री से मिली प्रेरणा और कारीगरों का बढ़ता सम्मान
यादव ने कहा कि आज शिल्पकारों को पहले की तुलना में अधिक सम्मान मिल रहा है। उन्होंने स्वयं पद्मश्री सम्मान प्राप्त होने का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सम्मान के बाद मीडिया ने उनके कार्य को प्रमुखता से दिखाया और देश के अन्य कारीगरों को भी प्रेरणा मिली। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाज़ार में नई स्वीकृति मिल रही है और राजनयिक उपहारों के माध्यम से 'मेड इन इंडिया' शिल्प को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की परंपरा और मज़बूत हो रही है।