14 जुलाई 2026
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आगरा की पच्चीकारी कला को अंतरराष्ट्रीय मंच: PM मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर जनरल को भेंट की मार्बल इनले बॉक्स

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आगरा की पच्चीकारी कला को अंतरराष्ट्रीय मंच: PM मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर जनरल को भेंट की मार्बल इनले बॉक्स

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी का यह राजनयिक उपहार आगरा के पच्चीकारी कारीगरों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आया है। लेकिन ₹500 की दैनिक आय में जीवन गुज़ारने वाले कारीगर शमसुद्दीन की माँग बताती है कि अंतरराष्ट्रीय पहचान और ज़मीनी आर्थिक हकीकत के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर जनरल को आगरा की प्रसिद्ध मार्बल इनले वर्क बॉक्स राजनयिक उपहार के रूप में भेंट की।
पिएत्रा ड्यूरा (पच्चीकारी) शिल्प को अंतरराष्ट्रीय मंच मिलने से आगरा के हस्तशिल्प समुदाय में उत्साह, वैश्विक माँग बढ़ने की उम्मीद।
खुद्दाम-ए-रौजा कमेटी के अध्यक्ष हाजी ताहिर उद्दीन ने इसे शहर और शिल्प परिवारों के लिए सम्मान का क्षण बताया।
अनुभवी कारीगर शमसुद्दीन पिछले 45 वर्षों से इस कला से जुड़े हैं; उन्होंने बताया कि विदेशों से भी खरीदार आगरा आते हैं।
कारीगरों की आर्थिक चुनौती बरकरार — ₹500 की दैनिक आय अपर्याप्त, कम से कम ₹1,000 प्रतिदिन की माँग।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर जनरल को आगरा की विश्वप्रसिद्ध मार्बल इनले वर्क बॉक्स राजनयिक उपहार के रूप में भेंट किए जाने के बाद, शहर के पिएत्रा ड्यूरा (पच्चीकारी) शिल्प से जुड़े कारीगरों और हस्तशिल्प समुदाय में उत्साह की लहर दौड़ गई है। 14 जुलाई को सामने आई इस खबर के बाद, सदियों पुरानी इस कला को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने और घरेलू-अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में माँग बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

कारीगरों में उत्साह, रोज़गार की उम्मीद

कारीगरों का मानना है कि प्रधानमंत्री के इस कदम से आगरा की ऐतिहासिक पच्चीकारी कला का गौरव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगा। स्थानीय हस्तशिल्प समुदाय को उम्मीद है कि इससे देश-विदेश के बाज़ारों में उनके उत्पादों की माँग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जो सीधे तौर पर स्थानीय कारीगरों के रोज़गार और आर्थिक स्थिति को मज़बूत करेगी।

यह ऐसे समय में आया है जब पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योग महंगाई और बाज़ार में घटती पहचान की दोहरी चुनौती से जूझ रहा है। गौरतलब है कि भारत सरकार 'एक ज़िला एक उत्पाद' जैसी योजनाओं के ज़रिए स्थानीय शिल्पों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है, और इस राजनयिक उपहार को उसी दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

खुद्दाम-ए-रौजा कमेटी का स्वागत

खुद्दाम-ए-रौजा कमेटी के अध्यक्ष हाजी ताहिर उद्दीन ने प्रधानमंत्री के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे आगरा के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा, ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर जनरल को मार्बल इनले वर्क बॉक्स भेंट किया जाना पूरे शहर और इस शिल्प से जुड़े परिवारों के लिए सम्मान की बात है।

हाजी ताहिर उद्दीन ने बताया कि पिएत्रा ड्यूरा शिल्प को आगरा के कारीगर सदियों से तैयार करते आ रहे हैं और इसकी कलाकृतियाँ दुनिया के कई देशों में भेजी जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह उनका पुश्तैनी व्यवसाय है — उनके बाबा-दादा भी इसी कला से जुड़े थे और आज भी उनका परिवार इस विरासत को आगे बढ़ा रहा है। उनके अनुसार, इस राजनयिक पहचान से इस पारंपरिक उद्योग को नया जीवन मिलेगा और कारोबार में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिलेगी।

45 साल के अनुभवी कारीगर की आवाज़

पच्चीकारी शिल्प से जुड़े अनुभवी कारीगर शमसुद्दीन ने बताया कि वे पिछले 45 वर्षों से इस कला से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि मार्बल इनले वर्क बॉक्स और अन्य पच्चीकारी उत्पादों को खरीदने के लिए देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग आगरा आते हैं।

शमसुद्दीन के अनुसार, प्रधानमंत्री द्वारा इस शिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने से भारतीय कारीगरों को नई पहचान मिलेगी और वैश्विक बाज़ार में उनके लिए नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने इसे आगरा की सदियों पुरानी सांस्कृतिक और हस्तशिल्प विरासत के लिए गर्व का अवसर बताया।

आर्थिक संकट: ₹500 की आय में गुज़ारा मुश्किल

हालाँकि खुशी के इस माहौल के बीच कारीगर शमसुद्दीन ने एक कड़वी सच्चाई भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बढ़ती महंगाई के बीच ₹500 की दैनिक आय से परिवार का गुज़ारा करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने माँग की कि कारीगरों की मेहनत के अनुरूप उन्हें कम से कम ₹1,000 प्रतिदिन की आमदनी सुनिश्चित होनी चाहिए।

यह माँग इस बात की ओर इशारा करती है कि राजनयिक पहचान और ज़मीनी आर्थिक हकीकत के बीच अभी भी बड़ी खाई है। आगे देखना होगा कि इस अंतरराष्ट्रीय पहचान का लाभ सीधे कारीगरों तक किस हद तक पहुँच पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि राजनयिक मंचों पर मिली चमक कारीगरों की रोज़ी तक कैसे पहुँचेगी। जब एक अनुभवी कारीगर ₹500 की दैनिक आय को अपर्याप्त बताता है, तो यह स्पष्ट है कि पहचान और आजीविका के बीच की खाई महज़ प्रतीकात्मक सम्मान से नहीं पाटी जा सकती। 'एक ज़िला एक उत्पाद' जैसी योजनाएँ सही दिशा में हैं, पर क्रियान्वयन में कारीगरों को सीधा आर्थिक लाभ देने का तंत्र अभी भी कमज़ोर है। इस राजनयिक उपहार की असली सफलता तब मानी जाएगी जब आगरा के कारीगरों की आय और बाज़ार पहुँच में ठोस और मापनीय सुधार आएगा।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर जनरल को क्या उपहार भेंट किया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर जनरल को आगरा की प्रसिद्ध मार्बल इनले वर्क बॉक्स राजनयिक उपहार के रूप में भेंट की। यह बॉक्स आगरा के पारंपरिक पिएत्रा ड्यूरा (पच्चीकारी) शिल्प का उत्कृष्ट नमूना है।
आगरा की पिएत्रा ड्यूरा (पच्चीकारी) कला क्या है?
पिएत्रा ड्यूरा, जिसे पच्चीकारी भी कहते हैं, संगमरमर में रंगीन पत्थरों को जड़कर की जाने वाली एक सदियों पुरानी शिल्पकला है। आगरा के कारीगर पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखे हुए हैं और इसकी कलाकृतियाँ देश-विदेश में निर्यात होती हैं।
इस राजनयिक उपहार से आगरा के कारीगरों को क्या फायदा होगा?
कारीगरों और हस्तशिल्प समुदाय को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने से घरेलू और वैश्विक बाज़ारों में पच्चीकारी उत्पादों की माँग बढ़ेगी। इससे स्थानीय कारीगरों को अधिक रोज़गार और बेहतर आर्थिक अवसर मिलने की संभावना है।
आगरा के कारीगरों की मौजूदा आर्थिक स्थिति कैसी है?
अनुभवी कारीगर शमसुद्दीन के अनुसार, बढ़ती महंगाई के बीच ₹500 की दैनिक आय से परिवार का गुज़ारा करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने माँग की है कि कारीगरों को कम से कम ₹1,000 प्रतिदिन की आमदनी सुनिश्चित होनी चाहिए।
खुद्दाम-ए-रौजा कमेटी ने इस घटनाक्रम पर क्या कहा?
खुद्दाम-ए-रौजा कमेटी के अध्यक्ष हाजी ताहिर उद्दीन ने इसे आगरा और पच्चीकारी शिल्प से जुड़े परिवारों के लिए सम्मान का क्षण बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि इस राजनयिक पहचान से पारंपरिक उद्योग को नया जीवन मिलेगा और कारोबार में सकारात्मक वृद्धि होगी।
राष्ट्र प्रेस
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