मोदी ने मैक्रों को भेंट की कलमकारी महाभारत पेंटिंग, ब्रिजिट को पोचमपल्ली सिल्क स्टोल
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने फ्रांस दौरे के दौरान 19 जून 2025 को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों को भारत की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़े विशिष्ट उपहार प्रदान किए। इन उपहारों के ज़रिए भारत की सांस्कृतिक विरासत और दस्तकारी कौशल को वैश्विक कूटनीतिक मंच पर रेखांकित किया गया।
मैक्रों को कलमकारी महाभारत पेंटिंग
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को प्रधानमंत्री मोदी ने आंध्र प्रदेश की सुप्रसिद्ध हस्तनिर्मित कलमकारी महाभारत पेंटिंग भेंट की। इस अनूठी कलाकृति को तैयार करने में कारीगरों को लगभग छह महीने का समय लगा।
पारंपरिक कलमकारी शैली में निर्मित इस पेंटिंग में महाभारत के विविध प्रसंगों का चित्रण है — धर्म, न्याय, साहस और नैतिक निर्णय जैसे शाश्वत मूल्यों को कैनवास पर जीवंत किया गया है। पेंटिंग का केंद्रीय आकर्षण भगवद्गीता का वह अमर संदेश है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्तव्यपथ, आत्मसंयम और आंतरिक शक्ति का बोध कराते हैं।
यह कलाकृति केवल एक ऐतिहासिक महाकाव्य का दृश्यांकन नहीं है — यह नैतिक नेतृत्व, शांति, ज्ञान और मानवीय गरिमा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों की भी अभिव्यक्ति है, जो आज के वैश्विक परिदृश्य में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।
ब्रिजिट मैक्रों को पोचमपल्ली सिल्क स्टोल
राष्ट्रपति की पत्नी ब्रिजिट मैक्रों को प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना का विख्यात पोचमपल्ली सिल्क स्टोल उपहार में दिया। यह स्टोल पारंपरिक इकत रेजिस्ट-डाइंग तकनीक से हाथ से बुना जाता है और अपनी आकर्षक ज्यामितीय एवं पुष्पीय डिज़ाइनों, उत्कृष्ट बुनावट और सुरुचिपूर्ण बनावट के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाता है।
भारतीय परंपरा और समकालीन कलात्मकता का यह संगम भारत की समृद्ध वस्त्र विरासत का प्रतीक है। फैशन, कला और उत्कृष्ट हस्तशिल्प के प्रति फ्रांस की गहरी अभिरुचि को देखते हुए यह उपहार दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने वाला माना जा रहा है।
सांस्कृतिक कूटनीति की परंपरा
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने विदेश दौरों के दौरान वैश्विक नेताओं को भारत की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ी वस्तुएँ भेंट करते रहे हैं। इस परंपरा के पीछे उद्देश्य स्पष्ट है — भारतीय कारीगरों की दस्तकारी को वैश्विक पहचान दिलाना और देश की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक समृद्धि को राजनयिक संवाद का हिस्सा बनाना।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग लगातार गहरा हो रहा है। इन उपहारों के माध्यम से दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संवाद को एक नई ऊँचाई मिली है।
आगे की राह
भारत-फ्रांस के बीच यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान आने वाले समय में दोनों देशों के बीच कला, पर्यटन और हस्तशिल्प क्षेत्र में नई साझेदारियों की ज़मीन तैयार कर सकता है। कलमकारी और पोचमपल्ली इकत जैसी भारतीय कलाओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की पहचान मिलने से देश के बुनकरों और कारीगरों को भी प्रोत्साहन मिलता है।