1 सितंबर 2026
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SCO शिखर सम्मेलन: PM मोदी ने किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान नेताओं को भारतीय विरासत के अनमोल उपहार दिए

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SCO शिखर सम्मेलन: PM मोदी ने किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान नेताओं को भारतीय विरासत के अनमोल उपहार दिए

सारांश

बिश्केक में SCO की 26वीं बैठक के मौके पर PM मोदी ने किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान के नेताओं को महाभारत से लेकर संतूर, डोकरा शिल्प और कांगड़ा चाय तक — भारत की सभ्यतागत विविधता को समेटे उपहार भेंट किए। यह उपहार-कूटनीति मध्य एशिया के साथ सांस्कृतिक सेतु बनाने की भारत की सुविचारित रणनीति को दर्शाती है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी 1 सितंबर 2026 को SCO की 26वीं बैठक के लिए बिश्केक, किर्गिस्तान पहुँचे।
किर्गिस्तान के राष्ट्रपति को बिबेक देबरॉय अनूदित महाभारत के 10 खंड और लद्दाखी 'त्सुग-दुल' कंबल भेंट किया गया।
किर्गिस्तान के प्रधानमंत्री को डोकरा कला से निर्मित संगीतकारों की जोड़ी दी गई।
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति को चंदन संतूर , कांगड़ा चाय , आगरा संगमरमर पेटी और बनारसी सिल्क स्टोल भेंट किए गए।
उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्री को आगरा की पत्थर जड़ाई वाली सजावटी संगमरमर प्लेट दी गई।
प्रत्येक उपहार दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक या संगीत परंपराओं से जोड़कर चुना गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 सितंबर 2026 को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं शिखर बैठक में भाग लेने के लिए किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुँचे। इस अवसर पर उन्होंने किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों तथा उनके परिवारजनों को भारत की कला, संस्कृति, संगीत और हस्तशिल्प परंपरा से जुड़े विशिष्ट उपहार भेंट किए। ये उपहार दोनों देशों के साथ सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को रेखांकित करने वाले सुविचारित चयन हैं।

किर्गिस्तान के राष्ट्रपति को महाभारत और लद्दाखी शिल्प

किर्गिस्तान के राष्ट्रपति को प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं विद्वान बिबेक देबरॉय द्वारा अंग्रेज़ी में अनूदित महाभारत का 10 खंडों का संपूर्ण संस्करण भेंट किया गया। धर्म, न्याय, कर्तव्य, नैतिकता और राज्यकला जैसे विषयों पर आधारित यह महाकाव्य भारत की दार्शनिक धरोहर का प्रतीक है। गौरतलब है कि इसे किर्गिस्तान के अपने महाकाव्य 'मानस' से सांस्कृतिक समानता के रूप में भी प्रस्तुत किया गया, जो दोनों सभ्यताओं के बीच साहित्यिक सेतु का काम करता है।

इसके साथ ही राष्ट्रपति को लद्दाख का पारंपरिक 'त्सुग-दुल' ऊनी कंबल भी भेंट किया गया। स्थानीय ऊन से निर्मित यह कंबल रंग-बिरंगे ज्यामितीय और पुष्पीय डिजाइनों के लिए विख्यात है और लद्दाख की घुमंतू तथा पशुपालक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है। यह उपहार किर्गिस्तान की पर्वतीय और खानाबदोश परंपराओं से भी सहज जुड़ाव दर्शाता है।

किर्गिस्तान के प्रधानमंत्री को डोकरा लोककला का उपहार

किर्गिस्तान के प्रधानमंत्री को डोकरा कला से निर्मित पारंपरिक संगीतकारों की जोड़ी भेंट की गई। प्राचीन 'लॉस्ट-वैक्स' धातु ढलाई तकनीक से तैयार यह हस्तशिल्प भारतीय लोककला और संगीत परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यह उपहार दोनों देशों की लोक संगीत विरासत को जोड़ने का सांस्कृतिक संदेश भी देता है।

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति को संतूर, कांगड़ा चाय और शिल्पकला

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति को चंदन की लकड़ी से बनी शततंत्री वीणा (संतूर) भेंट की गई। जम्मू-कश्मीर की संगीत परंपरा से जुड़ा यह वाद्य उज्बेकिस्तान के पारंपरिक 'चांग' वाद्य से उल्लेखनीय समानता रखता है, जो दोनों देशों की साझा संगीत विरासत को उजागर करता है।

राष्ट्रपति को लकड़ी के नक्काशीदार बॉक्स में कांगड़ा की प्रीमियम चाय भी दी गई, जिसमें कांगड़ा फर्स्ट फ्लश ब्लैक टी और कांगड़ा ग्रीन टी शामिल हैं। हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी की यह चाय अपनी विशिष्ट सुगंध, हल्के स्वाद और हिमालयी पहचान के लिए जानी जाती है।

राष्ट्रपति की पत्नी को आगरा की संगमरमर जड़ाई वाली पेटी और वाराणसी की बनारसी सिल्क स्टोल भेंट की गई — भारत की दो प्रतिष्ठित हस्तशिल्प परंपराओं का संगम। राष्ट्रपति की पुत्री को फाइन सिल्वर ब्रोच दिया गया, जिसमें फूलों की आकृति, जालीदार नक्काशी और बारीक धातु शिल्प भारतीय आभूषण कला की उत्कृष्टता को प्रदर्शित करते हैं।

उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्री को आगरा की जड़ाई कला

प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्री को आगरा की पारंपरिक पत्थर जड़ाई कला से तैयार संगमरमर जड़ाई वाली सजावटी प्लेट भेंट की। इस प्लेट पर नीले, हरे और लाल रंगों के पुष्पीय डिजाइन उकेरे गए हैं, जो भारत और उज्बेकिस्तान की साझा कलात्मक विरासत और उत्कृष्ट शिल्पकला का प्रतीक हैं।

कूटनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत मध्य एशिया के साथ अपने सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को नई गहराई देने में जुटा है। SCO मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी और सुविचारित उपहार-कूटनीति यह संदेश देती है कि नई दिल्ली इस क्षेत्र के साथ सभ्यतागत संवाद को राजनीतिक संबंधों का आधार मानती है। आने वाले समय में दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता के परिणामों पर नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक सुविचारित सॉफ्ट पावर रणनीति है — हर उपहार प्राप्तकर्ता देश की अपनी परंपरा से जोड़कर चुना गया, जैसे किर्गिज़ 'मानस' से महाभारत की समानता या उज्बेक 'चांग' से संतूर का नाता। यह भारत की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा है जिसमें मध्य एशिया को चीन और रूस के प्रभाव-क्षेत्र से इतर एक स्वतंत्र सभ्यतागत संवाद का साझेदार बनाया जाए। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि सांस्कृतिक संकेतों को ठोस व्यापारिक और कनेक्टिविटी समझौतों का विकल्प नहीं बनाया जा सकता — असली परीक्षा SCO मंच पर भारत के नीतिगत प्रस्तावों की होगी।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने SCO बैठक में किर्गिस्तान के राष्ट्रपति को क्या उपहार दिया?
PM मोदी ने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति को बिबेक देबरॉय द्वारा अंग्रेज़ी में अनूदित महाभारत के 10 खंड और लद्दाख का पारंपरिक 'त्सुग-दुल' ऊनी कंबल भेंट किया। महाभारत को किर्गिज़ महाकाव्य 'मानस' से सांस्कृतिक समानता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया।
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति को कौन-से भारतीय उपहार मिले?
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति को चंदन की लकड़ी से बनी शततंत्री वीणा (संतूर), कांगड़ा फर्स्ट फ्लश ब्लैक टी व ग्रीन टी, आगरा की संगमरमर जड़ाई पेटी और वाराणसी की बनारसी सिल्क स्टोल भेंट किए गए। संतूर का चुनाव उज्बेकिस्तान के पारंपरिक 'चांग' वाद्य से इसकी समानता को ध्यान में रखकर किया गया।
SCO की 26वीं बैठक कहाँ और कब हुई?
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं शिखर बैठक 1 सितंबर 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित हुई, जिसमें PM नरेंद्र मोदी भारत का प्रतिनिधित्व करने पहुँचे।
डोकरा कला क्या है और इसे उपहार के रूप में क्यों चुना गया?
डोकरा भारत की प्राचीन 'लॉस्ट-वैक्स' धातु ढलाई तकनीक पर आधारित लोकशिल्प है, जो भारतीय लोककला और संगीत परंपरा का प्रतीक है। किर्गिस्तान के प्रधानमंत्री को डोकरा शिल्प से निर्मित संगीतकारों की जोड़ी इसलिए दी गई क्योंकि यह दोनों देशों की लोक संगीत विरासत के बीच सांस्कृतिक सेतु का संदेश देती है।
मोदी की उपहार-कूटनीति का मध्य एशिया नीति से क्या संबंध है?
प्रत्येक उपहार को प्राप्तकर्ता देश की अपनी सांस्कृतिक या संगीत परंपरा से जोड़कर चुना गया, जो भारत की सॉफ्ट पावर रणनीति का हिस्सा है। यह मध्य एशिया के साथ सभ्यतागत संवाद को राजनीतिक संबंधों की नींव बनाने की भारत की व्यापक कोशिश को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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