9 अगस्त 2026
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मायावती का RSS प्रमुख पर पलटवार: आरक्षण में क्रीमी लेयर की माँग संविधान और सामाजिक न्याय के विरुद्ध

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मायावती का RSS प्रमुख पर पलटवार: आरक्षण में क्रीमी लेयर की माँग संविधान और सामाजिक न्याय के विरुद्ध

सारांश

मायावती ने RSS प्रमुख के क्रीमी लेयर बयान को 'संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ' और संविधान-विरोधी करार दिया। उनका तर्क है कि SC, ST आरक्षण सामाजिक समता का संवैधानिक अधिकार है — आर्थिक उन्नति से इसे मापना ही गलत है।

मुख्य बातें

BSP अध्यक्ष मायावती ने 9 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर RSS प्रमुख के क्रीमी लेयर बयान को संविधान-विरोधी बताया।
मायावती के अनुसार, SC, ST और OBC के लिए आरक्षण 'सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति' का संवैधानिक अधिकार है, जिसे आर्थिक पैमाने पर नहीं आंका जा सकता।
उन्होंने RSS के इस कथन को खारिज किया कि आरक्षण लाभार्थियों को स्वेच्छा से इसे छोड़ देना चाहिए।
केंद्र सरकार से आग्रह किया कि SC-ST को क्रीमी लेयर से बाहर रखने के लिए अदालत में ठोस पैरवी की जाए।
RSS से माँग की कि वह बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान का सम्मान करते हुए आरक्षण पर राजनीति बंद करे।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 9 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख के उस हालिया बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने और लाभार्थियों से स्वेच्छा से आरक्षण छोड़ने की अपील की गई थी। मायावती ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि यह माँग न केवल अनुचित है, बल्कि बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के मानवतावादी संविधान के मूल उद्देश्यों के सीधे विरुद्ध है।

मायावती का मूल तर्क

मायावती ने अपनी पोस्ट में लिखा कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के लिए आरक्षण केवल आर्थिक उपाय नहीं, बल्कि 'सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति' का संवैधानिक अधिकार है। उनके अनुसार, जाति के आधार पर सदियों से हाशिए पर धकेले गए समाज के लिए यह अधिकार तब और अधिक अपरिहार्य हो जाता है, जब जातिवादी भेदभाव, शोषण और अत्याचार थमने का नाम नहीं लेते।

उन्होंने जोर देकर कहा, 'आरक्षण को आर्थिक उन्नति से कतई नहीं आंका जा सकता' — यह तर्क क्रीमी लेयर की पूरी अवधारणा की बुनियाद को ही चुनौती देता है, जो मुख्यतः आय-आधारित बहिष्करण पर टिकी है।

RSS के बयान पर सीधा प्रहार

BSP प्रमुख ने RSS प्रमुख के इस कथन को — कि 'आरक्षण का जानबूझकर राजनीतिकरण किया गया है और लाभार्थियों को स्वेच्छा से इसे छोड़ देना चाहिए' — 'संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ' से प्रेरित बताया। मायावती के अनुसार, यह सोच संवैधानिक उद्देश्यों की अवहेलना करती है और समता व समानता के मौलिक अधिकार को कमज़ोर करती है।

उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जातिवाद का दंश जीवन के हर पहलू में लगातार जारी है — और इसे RSS से बेहतर कोई नहीं जानता।

सरकार से अपेक्षा

मायावती ने केंद्र सरकार से स्पष्ट अपेक्षा जताई कि वह एससी और एसटी समाज को क्रीमी लेयर से दूर रखने के लिए अदालत में प्रभावी और ठोस पैरवी करे। उन्होंने चेताया कि सरकारों के 'लचर रवैये' और कमज़ोर कानूनी प्रतिनिधित्व के कारण ही अदालतें सामाजिक न्याय के मामलों में अपेक्षित फैसले नहीं दे पातीं।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर के प्रश्न पर विचार कर चुकी है, और यह मुद्दा न्यायिक एवं राजनीतिक दोनों स्तरों पर सक्रिय बहस का विषय बना हुआ है।

RSS को सीधी नसीहत

BSP सुप्रीमो ने RSS से आग्रह किया कि वह बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान को पूरा सम्मान देते हुए आरक्षण को लेकर राजनीति करना बंद करे। उन्होंने कहा कि आरक्षण में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की वकालत छोड़कर देश में 'समतामूलक समाज व्यवस्था' की स्थापना के संवैधानिक दायित्व की पूर्ति में सहयोग करना ही वक्त की असली माँग है।

आगे की राह

यह बयान ऐसे समय में आया है जब आरक्षण नीति पर न्यायिक और राजनीतिक बहस एक साथ तेज़ हो रही है। BSP की यह आक्रामक प्रतिक्रिया संकेत देती है कि दलित-बहुजन राजनीति में आरक्षण का मुद्दा आगामी चुनावी चक्र में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन BSP की घटती जमीनी ताकत के बीच यह राजनीतिक पुनर्स्थापन की कोशिश भी है। असली सवाल यह है कि क्रीमी लेयर बहस को 'संविधान बनाम RSS' के फ्रेम में सीमित रखना उन वास्तविक अंतर-वर्गीय असमानताओं को नजरअंदाज करता है, जो SC-ST समुदायों के भीतर भी मौजूद हैं। सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ इस प्रश्न पर विचार कर चुकी है — यानी यह केवल RSS की 'जातिवादी सोच' नहीं, एक जटिल न्यायिक प्रश्न भी है। मायावती सरकार से ठोस पैरवी की माँग करती हैं, लेकिन यह नहीं बताती कि BSP ने अपने शासनकाल में इस दिशा में क्या किया — जवाबदेही की यह खाई उनकी आलोचना को कमज़ोर करती है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मायावती ने RSS प्रमुख के किस बयान पर आपत्ति जताई?
RSS प्रमुख ने कहा था कि आरक्षण का जानबूझकर राजनीतिकरण किया गया है और आरक्षण के लाभार्थियों को स्वेच्छा से इसे छोड़ देना चाहिए। मायावती ने इसे 'संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ' और संवैधानिक उद्देश्यों की अवहेलना बताया।
क्रीमी लेयर SC-ST आरक्षण पर क्यों लागू नहीं होती?
वर्तमान में क्रीमी लेयर का प्रावधान केवल OBC आरक्षण पर लागू है, SC-ST पर नहीं। मायावती का तर्क है कि SC-ST के लिए आरक्षण आर्थिक नहीं बल्कि जातिगत भेदभाव और सामाजिक उत्पीड़न की भरपाई का संवैधानिक अधिकार है, इसलिए इसे आय से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
मायावती ने केंद्र सरकार से क्या माँग की?
BSP अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह SC और ST को क्रीमी लेयर से दूर रखने के लिए अदालत में प्रभावी और ठोस कानूनी पैरवी करे। उन्होंने चेताया कि सरकारों के लचर रवैये के कारण ही अदालतें सामाजिक न्याय के मामलों में सही निर्णय नहीं दे पातीं।
मायावती ने यह बयान कहाँ और कब दिया?
मायावती ने यह बयान 9 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट के माध्यम से दिया। यह पोस्ट लखनऊ से जारी BSP की आधिकारिक प्रतिक्रिया का हिस्सा थी।
BSP का आरक्षण पर मूल रुख क्या है?
BSP का मानना है कि SC, ST और OBC के लिए आरक्षण बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान द्वारा प्रदत्त सामाजिक समता का अधिकार है। पार्टी किसी भी रूप में आरक्षण में कटौती या क्रीमी लेयर लागू करने का विरोध करती है और इसे 'समतामूलक समाज व्यवस्था' के संवैधानिक दायित्व से जोड़कर देखती है।
राष्ट्र प्रेस
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