SC आरक्षण विवाद: कांग्रेस का मांझी पर हमला, चिराग से BJP छोड़ने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
एससी आरक्षण में क्रीमी लेयर और सब-कोटा के मुद्दे पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर उभरे मतभेदों ने अब राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान द्वारा केंद्रीय मंत्री एवं हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) प्रमुख जीतन राम मांझी से इस्तीफे की माँग के बाद कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। 30 अगस्त को लखनऊ में कांग्रेस नेताओं ने दोनों मंत्रियों को घेरते हुए गठबंधन की आंतरिक दरार को उजागर किया।
कांग्रेस का मांझी पर सीधा हमला
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, 'जीतन राम मांझी भारतीय जनता पार्टी को खुश करने में इतने आगे निकल गए हैं कि उन्हें अब देश, संविधान, पिछड़े वर्गों या दलितों की कोई परवाह नहीं है। अगर जीतन राम मांझी को दलितों, संविधान या आरक्षण की परवाह नहीं है, तो उन्हें तुरंत हटा दिया जाना चाहिए।' राजपूत ने चिराग पासवान को भी चुनौती देते हुए कहा, 'अगर आप दलितों और संविधान के साथ खड़े हैं, तो भारतीय जनता पार्टी छोड़ दें। वरना, यह माना जाएगा कि आप सिर्फ दिखावा कर रहे हैं।'
सामूहिक जिम्मेदारी पर कांग्रेस सांसद का तर्क
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने संवैधानिक पहलू उठाते हुए कहा, 'चिराग पासवान और मांझी कौन हैं? दोनों मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और अपनी-अपनी पार्टियों के प्रमुख हैं।' तिवारी ने आगे कहा, 'आरक्षण के मुद्दे पर दोनों एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जो संविधान के खिलाफ है। शायद उन्हें इस बात का एहसास नहीं है कि मंत्रिपरिषद पर सामूहिक जिम्मेदारी का सिद्धांत लागू होता है। कोई मंत्री जो कुछ भी कहता है, वह तब तक सरकार का ही रुख माना जाता है, जब तक कि उसका खंडन न किया जाए।'
चिराग पासवान का एक्स पर पक्ष
चिराग पासवान ने एक्स पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए लिखा, 'संविधान में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण केवल अवसर का प्रावधान नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के विरुद्ध सामाजिक न्याय का सुरक्षा कवच है।' उन्होंने यह भी कहा, 'एससी/एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर या उप-वर्गीकरण की माँग सामाजिक न्याय के मूल उद्देश्य को कमजोर करने वाली है। जो लोग इसका समर्थन करते हैं, उन्हें पहले स्वयं आरक्षण का लाभ छोड़कर एक नैतिक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।'
आगे का राजनीतिक परिदृश्य
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब सर्वोच्च न्यायालय के एससी उप-वर्गीकरण संबंधी फैसले के बाद देशभर में आरक्षण की राजनीति नए सिरे से गर्म हो रही है। गौरतलब है कि एनडीए के भीतर इस तरह की सार्वजनिक असहमति गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े करती है। चिराग पासवान ने स्पष्ट किया है कि वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई 'पूरी मजबूती से जारी रहेगी', जिससे आने वाले दिनों में एनडीए के भीतर और तनाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।