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SC आरक्षण विवाद: कांग्रेस का मांझी पर हमला, चिराग से BJP छोड़ने की माँग

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SC आरक्षण विवाद: कांग्रेस का मांझी पर हमला, चिराग से BJP छोड़ने की माँग

सारांश

एससी आरक्षण में क्रीमी लेयर और सब-कोटा पर एनडीए के भीतर मचे घमासान के बीच कांग्रेस ने दोनों मोर्चे खोले — मांझी को 'तुरंत हटाने' की माँग और चिराग को BJP छोड़ने की चुनौती। यह विवाद महज बयानबाजी नहीं, बल्कि दलित राजनीति की गहरी दरार का संकेत है।

मुख्य बातें

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि जीतन राम मांझी को संविधान, पिछड़े वर्गों और दलितों की 'कोई परवाह नहीं' और उन्हें तुरंत हटाया जाए।
कांग्रेस ने चिराग पासवान को चुनौती दी — 'दलितों के साथ हैं तो BJP छोड़ें, वरना दिखावा माना जाएगा।' कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि मंत्रिपरिषद पर सामूहिक जिम्मेदारी का सिद्धांत लागू होता है — मंत्री का बयान सरकार का रुख माना जाता है।
चिराग पासवान ने एक्स पर SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-वर्गीकरण को 'सामाजिक न्याय के मूल उद्देश्य को कमजोर करने वाला' बताया।
यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय के एससी उप-वर्गीकरण फैसले के बाद एनडीए के भीतर बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में सामने आया है।

एससी आरक्षण में क्रीमी लेयर और सब-कोटा के मुद्दे पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर उभरे मतभेदों ने अब राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान द्वारा केंद्रीय मंत्री एवं हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) प्रमुख जीतन राम मांझी से इस्तीफे की माँग के बाद कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। 30 अगस्त को लखनऊ में कांग्रेस नेताओं ने दोनों मंत्रियों को घेरते हुए गठबंधन की आंतरिक दरार को उजागर किया।

कांग्रेस का मांझी पर सीधा हमला

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, 'जीतन राम मांझी भारतीय जनता पार्टी को खुश करने में इतने आगे निकल गए हैं कि उन्हें अब देश, संविधान, पिछड़े वर्गों या दलितों की कोई परवाह नहीं है। अगर जीतन राम मांझी को दलितों, संविधान या आरक्षण की परवाह नहीं है, तो उन्हें तुरंत हटा दिया जाना चाहिए।' राजपूत ने चिराग पासवान को भी चुनौती देते हुए कहा, 'अगर आप दलितों और संविधान के साथ खड़े हैं, तो भारतीय जनता पार्टी छोड़ दें। वरना, यह माना जाएगा कि आप सिर्फ दिखावा कर रहे हैं।'

सामूहिक जिम्मेदारी पर कांग्रेस सांसद का तर्क

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने संवैधानिक पहलू उठाते हुए कहा, 'चिराग पासवान और मांझी कौन हैं? दोनों मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और अपनी-अपनी पार्टियों के प्रमुख हैं।' तिवारी ने आगे कहा, 'आरक्षण के मुद्दे पर दोनों एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जो संविधान के खिलाफ है। शायद उन्हें इस बात का एहसास नहीं है कि मंत्रिपरिषद पर सामूहिक जिम्मेदारी का सिद्धांत लागू होता है। कोई मंत्री जो कुछ भी कहता है, वह तब तक सरकार का ही रुख माना जाता है, जब तक कि उसका खंडन न किया जाए।'

चिराग पासवान का एक्स पर पक्ष

चिराग पासवान ने एक्स पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए लिखा, 'संविधान में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण केवल अवसर का प्रावधान नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के विरुद्ध सामाजिक न्याय का सुरक्षा कवच है।' उन्होंने यह भी कहा, 'एससी/एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर या उप-वर्गीकरण की माँग सामाजिक न्याय के मूल उद्देश्य को कमजोर करने वाली है। जो लोग इसका समर्थन करते हैं, उन्हें पहले स्वयं आरक्षण का लाभ छोड़कर एक नैतिक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।'

आगे का राजनीतिक परिदृश्य

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब सर्वोच्च न्यायालय के एससी उप-वर्गीकरण संबंधी फैसले के बाद देशभर में आरक्षण की राजनीति नए सिरे से गर्म हो रही है। गौरतलब है कि एनडीए के भीतर इस तरह की सार्वजनिक असहमति गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े करती है। चिराग पासवान ने स्पष्ट किया है कि वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई 'पूरी मजबूती से जारी रहेगी', जिससे आने वाले दिनों में एनडीए के भीतर और तनाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे गठबंधन के भीतर सुलझाने की बजाय सोशल मीडिया पर लड़ना दोनों नेताओं की राजनीतिक मजबूरी को उजागर करता है। मुख्यधारा की कवरेज बयानबाजी पर टिकी है — असली कहानी यह है कि एनडीए के पास इस मुद्दे पर कोई साझा नीतिगत रुख नहीं है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीतन राम मांझी पर कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि मांझी को संविधान, दलितों और पिछड़े वर्गों की कोई परवाह नहीं है और उन्हें तुरंत मंत्री पद से हटाया जाना चाहिए। उनका यह बयान SC आरक्षण में क्रीमी लेयर और सब-कोटा पर मांझी के रुख के संदर्भ में आया है।
चिराग पासवान ने SC आरक्षण पर क्या कहा?
चिराग पासवान ने एक्स पर लिखा कि SC/ST आरक्षण सामाजिक न्याय का सुरक्षा कवच है और इसमें क्रीमी लेयर या उप-वर्गीकरण की माँग इसके मूल उद्देश्य को कमजोर करती है। उन्होंने मांझी से मंत्री पद से इस्तीफे की माँग भी की है।
सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत का इस विवाद से क्या संबंध है?
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि मंत्रिपरिषद पर सामूहिक जिम्मेदारी का सिद्धांत लागू होता है, यानी कोई भी मंत्री जो बयान देता है वह सरकार का रुख माना जाता है जब तक उसका खंडन न हो। ऐसे में दो कैबिनेट मंत्रियों का एक-दूसरे पर आरोप लगाना संवैधानिक दृष्टि से असंगत है।
यह विवाद किस बड़े मुद्दे से जुड़ा है?
यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले की पृष्ठभूमि में है जिसमें SC आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण की संभावना पर विचार किया गया है। इस फैसले के बाद देशभर में दलित और पिछड़े वर्गों के आरक्षण की राजनीति नए सिरे से गर्म हो गई है।
कांग्रेस ने चिराग पासवान को क्या चुनौती दी?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने चिराग पासवान से कहा कि अगर वे वाकई दलितों और संविधान के साथ हैं तो BJP छोड़ें, अन्यथा उनका रुख 'सिर्फ दिखावा' माना जाएगा। यह बयान एनडीए के भीतर की दरार को और गहरा करने वाला है।
राष्ट्र प्रेस
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