बिहार में SC आरक्षण वर्गीकरण पर NDA में घमासान: चिराग ने माँगा इस्तीफा, मांझी ने किया पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की राजनीति में अनुसूचित जाति आरक्षण की समीक्षा और क्रीमी लेयर के सवाल पर 30 अगस्त 2026 को एनडीए के भीतर ही तीखा टकराव सामने आया। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के बीच शुरू हुआ यह विवाद अब इस्तीफे की माँग तक जा पहुँचा है। इसी बीच जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने एक्स पर चाय के कपों की तस्वीर साझा कर विपक्ष पर तीखा सवाल दागा।
संजय झा का 'चाय के कप' वाला सवाल
संजय झा ने रविवार, 30 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 10 चाय के कपों की एक तस्वीर साझा की। उन्होंने विपक्षी नेताओं से पूछा कि क्या वे बता सकते हैं कि इनमें से कौन-सा कप किस जाति के लिए है। झा ने लिखा कि वह इन सभी कपों में चाय पी चुके हैं — तो फिर उनकी जाति क्या हुई? उन्होंने कहा कि झूठ के पाँव नहीं होते और समाज में नफरत फैलाने में जुटे नेताओं को इस सवाल का जवाब देना चाहिए।
विवाद की जड़: संतोष कुमार सुमन का बयान
ताज़ा विवाद की शुरुआत हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने अनुसूचित जातियों के भीतर वर्गीकरण और आरक्षण की समीक्षा का समर्थन किया। इस पर केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने कड़ी आपत्ति जताई। पटना में पत्रकारों से बातचीत में चिराग ने शनिवार को कहा कि अनुसूचित वर्ग की सभी जातियाँ एकजुट हैं और आरक्षण के भीतर बँटवारे से पूरे वर्ग को नुकसान होगा।
चिराग पासवान की इस्तीफे की माँग
चिराग पासवान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोजपा (रामविलास) दलित आरक्षण में सब-कोटा के सख्त खिलाफ है। उन्होंने SC आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था को संविधान की भावना के विपरीत बताया और तर्क दिया कि अनुसूचित जातियों को सामाजिक भेदभाव और छुआछूत के आधार पर आरक्षण मिला है, न कि आर्थिक आधार पर। चिराग ने माँग की कि यदि जीतन राम मांझी क्रीमी लेयर या वर्गीकरण के पक्ष में हैं, तो उन्हें पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना चाहिए और संतोष कुमार सुमन को भी बिहार सरकार में मंत्री पद छोड़ना चाहिए।
मांझी का पलटवार और सुप्रीम कोर्ट का हवाला
जीतन राम मांझी ने चिराग के इस्तीफे की माँग पर पलटवार करते हुए कहा कि इस्तीफा उन्हें खुद देना चाहिए, क्योंकि वह संतोष कुमार सुमन की बात को समझ नहीं रहे हैं। मांझी ने 2024 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर वर्गीकरण की अनुमति दी गई है। उन्होंने बताया कि बिहार में अनुसूचित जाति की करीब 22 जातियाँ हैं, जिनमें से कई को अब तक आरक्षण का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाया है। मांझी ने कहा कि उनका उद्देश्य आरक्षण समाप्त करना नहीं, बल्कि हाशिए पर रहे समुदायों को उचित हिस्सेदारी दिलाना है। उन्होंने मोतिहारी में होने वाली सभा में इस मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखने की घोषणा की।
भीम आर्मी का उतरना और आगे की राह
इस बीच भीम आर्मी भी अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए ऑनलाइन प्राथमिकी की व्यवस्था और अत्याचार निवारण कानून को और प्रभावी बनाने की माँग को लेकर सड़क पर उतर चुकी है। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में चल रही हैं और दलित राजनीति हर दल के लिए निर्णायक बनती जा रही है। मांझी ने इस मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी उठाए जाने की बात कही है, जिससे यह विवाद केंद्र तक पहुँचने के संकेत दे रहा है।