शिवचंद्र राम के इस्तीफे पर मांझी का राजद पर हमला: 'दलितों की उपेक्षा कोई नई बात नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधान परिषद चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) द्वारा सुनील सिंह को पुनः उम्मीदवार बनाए जाने के विरोध में राजद नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने पार्टी के अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। इस घटनाक्रम पर केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने राजद पर सीधा निशाना साधा है।
मांझी का एक्स पर तीखा हमला
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शिवचंद्र राम को 'भाई' संबोधित करते हुए लिखा: 'राजद वालों ने जो शिवचंद्र राम के साथ किया वह कोई नया नहीं है। जहां मोटा माल मिला, इनकी गाड़ी वहीं रुक जाती है, और हमारे समाज के लोगों के पास इतना माल कहां है कि वह इन्हें खुश कर पाएं?' मांझी ने यह भी आरोप लगाया कि एससी-एसटी वर्ग की पर्चा वाली जमीन पर सबसे अधिक अवैध कब्जा राजद नेताओं ने किया है।
शिवचंद्र राम का त्याग पत्र और आरोप
राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव को भेजे गए दो पन्ने के त्याग पत्र में शिवचंद्र राम ने दलित समाज और पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा कि बिहार विधान परिषद की रिक्त सीट को लेकर दलित, रविदास समाज और हजारों समर्पित कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी, परंतु हाल की घटनाओं से इस समाज में निराशा और पीड़ा बढ़ी है।
राजद में असंतोष की व्यापक तस्वीर
यह ऐसे समय में आया है जब राजद के भीतर ही इस निर्णय को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने भी सुनील सिंह की उम्मीदवारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गौरतलब है कि सुनील सिंह को एक बार फिर एमएलसी चुनाव में प्रत्याशी बनाया गया है, जिससे पार्टी के दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं में असंतोष उभरा है।
मांझी का HAM के समर्थन का भरोसा
केंद्रीय मंत्री मांझी ने स्पष्ट किया कि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा इस मामले में शिवचंद्र राम के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि जो लोग गरीबों की जमीन तक नहीं छोड़ते, उनसे किसी भी चीज की उम्मीद करना बेमानी है। यह बयान बिहार की दलित राजनीति में एक नई ध्रुवीकरण की संभावना को रेखांकित करता है।
आगे क्या
बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले राजद के भीतर यह आंतरिक कलह पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है। शिवचंद्र राम के अगले कदम और रोहिणी आचार्या की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं। दलित वोट बैंक को लेकर यह विवाद बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है।