29 अगस्त 2026
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मिजोरम अदरक की खेती का बड़े पैमाने पर विस्तार करेगा, नीति आयोग ने दिया 'जिंजर कैपिटल' का दर्जा

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मिजोरम अदरक की खेती का बड़े पैमाने पर विस्तार करेगा, नीति आयोग ने दिया 'जिंजर कैपिटल' का दर्जा

सारांश

नीति आयोग की 'अदरक राजधानी' मान्यता के बाद मिजोरम अब उत्पादन विस्तार, नए प्रसंस्करण संयंत्र और सहकारी प्रबंधन के जरिए अपनी कृषि पहचान को आर्थिक ताकत में बदलने की कोशिश कर रहा है।

मुख्य बातें

नीति आयोग ने 2025 में मिजोरम को 'भारत की अदरक राजधानी' घोषित किया था।
कृषि मंत्री पीसी वनलालरुता ने 29 अगस्त 2026 को अदरक खेती के बड़े पैमाने पर विस्तार की घोषणा की।
आइजोल के फाल्कॉन में आरकेवीवाई-डीपीआर 2023-24 के तहत नया खाद्य तेल प्रसंस्करण संयंत्र उद्घाटित हुआ।
संयंत्र के संचालन के लिए 'आइजोल सिटी ऑयलसीड ग्रोअर्स एंड प्रोसेसिंग कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड' के साथ पाँच वर्षीय MoU पर हस्ताक्षर।
सूरजमुखी, तिल, अरहर दाल और सरसों जैसी फसलों की खेती को भी बढ़ावा देने की योजना।

मिजोरम सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्री पीसी वनलालरुता ने 29 अगस्त 2026 को घोषणा की कि नीति आयोग द्वारा राज्य को 'भारत की अदरक राजधानी' घोषित किए जाने के बाद मिजोरम अदरक उत्पादन का व्यापक स्तर पर विस्तार करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। यह ऐलान आइजोल के फाल्कॉन में एक नए खाद्य तेल प्रसंस्करण संयंत्र के उद्घाटन के अवसर पर किया गया।

नीति आयोग की मान्यता और उसका महत्व

नीति आयोग ने 2025 में मिजोरम को 'भारत की अदरक राजधानी' का दर्जा प्रदान किया था। यह मान्यता राज्य में अदरक के बड़े पैमाने पर उत्पादन और देश के अदरक क्षेत्र में उसके बढ़ते योगदान को देखते हुए दी गई थी। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर भारत में मिजोरम अदरक उत्पादन के मामले में अग्रणी राज्यों में गिना जाता है, और यह दर्जा राज्य की कृषि पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करता है।

मंत्री वनलालरुता ने बताया कि इस मान्यता के बाद से राज्य सरकार ने अदरक की खेती को प्रोत्साहन देने और उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

नए खाद्य तेल प्रसंस्करण संयंत्र का उद्घाटन

आइजोल के फाल्कॉन में स्थापित यह खाद्य तेल प्रसंस्करण संयंत्र राष्ट्रीय कृषि विकास योजना — विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (आरकेवीवाई-डीपीआर) 2023-24 के तहत बनाया गया है। यह संयंत्र कई प्रकार की तिलहन फसलों को संसाधित करने में सक्षम है।

कृषि और किसान कल्याण विभाग ने इस संयंत्र के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी 'आइजोल सिटी ऑयलसीड ग्रोअर्स एंड प्रोसेसिंग कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड' को सौंपी है। उद्घाटन के अवसर पर सुविधा के संचालन के लिए पाँच वर्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए। मंत्री ने इस अवसर पर मशीनरी का सफल ट्रायल रन भी किया।

अदरक से परे — बहुफसलीय कृषि को बढ़ावा

मंत्री वनलालरुता ने स्पष्ट किया कि सरकार की कृषि नीति केवल अदरक तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार सूरजमुखी के बीज, तिल, अरहर दाल और सरसों के बीज जैसी फसलों की खेती को भी सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है। साथ ही किसानों की उपज के लिए उचित बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास भी जारी हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के कई राज्य कृषि विविधीकरण को आजीविका सुरक्षा का मुख्य साधन मान रहे हैं। मिजोरम की यह पहल उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है।

सहकारी समितियाँ और मूल्य संवर्धन पर जोर

मंत्री ने सहकारी समितियों को मजबूत करने के सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि सरकार अदरक सहित कृषि उपज के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर अधिक ध्यान देने का इरादा रखती है, ताकि किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य मिल सके।

उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे प्रसंस्करण उद्योग किसानों को आजीविका के टिकाऊ अवसर प्रदान करेंगे और आय का एक विश्वसनीय स्रोत बनेंगे। सरकार आरकेवीवाई सहित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत सभी संभावित रास्ते तलाशती रहेगी।

आगे की राह

मिजोरम की यह कृषि रणनीति — 'जिंजर कैपिटल' की पहचान को उत्पादन विस्तार, प्रसंस्करण अवसंरचना और सहकारी प्रबंधन से जोड़ना — राज्य के कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे सकती है। अब देखना यह होगा कि ये पहलें किसानों की वास्तविक आय में कितनी वृद्धि कर पाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि यह पहचान किसानों की आय में मापनीय वृद्धि में कैसे तब्दील होती है। मिजोरम में अदरक की खेती पहले से प्रचलित है, पर प्रसंस्करण अवसंरचना और बाजार संपर्क की कमी हमेशा से बड़ी चुनौती रही है। नया सहकारी-आधारित प्रसंस्करण मॉडल सही दिशा में कदम है, लेकिन पाँच साल के MoU की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सहकारी समिति को कितनी स्वायत्तता और तकनीकी सहायता मिलती है। बिना मजबूत बाजार लिंकेज के, यह संयंत्र भी कई सरकारी परियोजनाओं की तरह कम उपयोग का शिकार हो सकता है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीति आयोग ने मिजोरम को 'जिंजर कैपिटल' का दर्जा कब और क्यों दिया?
नीति आयोग ने 2025 में मिजोरम को 'भारत की अदरक राजधानी' घोषित किया था। यह दर्जा राज्य में बड़े पैमाने पर अदरक उत्पादन और देश के अदरक क्षेत्र में मिजोरम के बढ़ते योगदान को देखते हुए प्रदान किया गया।
मिजोरम अदरक की खेती बढ़ाने के लिए क्या कदम उठा रहा है?
राज्य सरकार ने 'जिंजर कैपिटल' मान्यता के बाद से उत्पादन विस्तार, प्रसंस्करण अवसंरचना और सहकारी समितियों को मजबूत करने की दिशा में काम किया है। आइजोल के फाल्कॉन में नया खाद्य तेल प्रसंस्करण संयंत्र भी इसी कड़ी में है।
आइजोल का नया खाद्य तेल प्रसंस्करण संयंत्र किस योजना के तहत बना है?
यह संयंत्र राष्ट्रीय कृषि विकास योजना — विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (आरकेवीवाई-डीपीआर) 2023-24 के तहत स्थापित किया गया है। इसका संचालन 'आइजोल सिटी ऑयलसीड ग्रोअर्स एंड प्रोसेसिंग कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड' करेगी, जिसके साथ पाँच वर्षीय MoU पर हस्ताक्षर हुए हैं।
मिजोरम सरकार अदरक के अलावा और कौन-सी फसलों को बढ़ावा दे रही है?
सरकार सूरजमुखी के बीज, तिल, अरहर दाल और सरसों के बीज जैसी फसलों की खेती को प्रोत्साहित कर रही है। साथ ही इन फसलों की उपज के लिए उपयुक्त बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास भी जारी हैं।
इस पहल से मिजोरम के किसानों को क्या फायदा होगा?
कृषि मंत्री पीसी वनलालरुता के अनुसार, प्रसंस्करण उद्योगों के विस्तार से किसानों को आजीविका के टिकाऊ अवसर और आय का विश्वसनीय स्रोत मिलेगा। अदरक व तिलहन फसलों के मूल्य संवर्धन पर ध्यान देने से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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