शिवसेना विधायक केसरकर का तंज: UBT बैठक में सिर्फ 4 सांसद, 'सब कुछ सामान्य नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना विधायक दीपक वसंत केसरकर ने 15 जून 2026 को मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) की ओर से बुलाई गई बैठक में महज चार सांसदों की उपस्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब पार्टी प्रमुख की ओर से बैठक बुलाई जाए और सदस्य ही न आएं, तो निष्कर्ष स्वयं स्पष्ट हो जाता है।
मुख्य घटनाक्रम
केसरकर ने कहा, 'जब पार्टी के प्रमुख की ओर से बैठक बुलाई जाती है तो वहाँ सबकी मौजूदगी होनी चाहिए। अगर कोई वहाँ मौजूद नहीं होता तो इसका मतलब साफ हो जाता है — सब कुछ सामान्य नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि इससे निष्कर्ष का अंदाज़ा खुद ही लगाया जा सकता है।
ऑपरेशन वुल्फ पर पलटवार
केसरकर ने 'ऑपरेशन वुल्फ' शब्द के इस्तेमाल को गलत बताया। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) की ओर से असंसदीय भाषा का प्रयोग किया जाता है। उनके अनुसार, 'यहाँ सभी टाइगर हैं, इसलिए जीतकर आए।' उन्होंने प्रश्न उठाया कि विपक्षी खेमे के नेता जीतकर क्यों नहीं आ पाए।
बाला साहब के विचारों का संदर्भ
केसरकर ने बाला साहब ठाकरे के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि जो उनके सिद्धांतों पर चलते हैं, उन्हें 'टाइगर' कहा जाता है। उन्होंने कहा कि बाला साहब को कांग्रेस के साथ गठबंधन कभी मंजूर नहीं था और उन्होंने कहा था कि ऐसी नौबत आने से पहले वे अपना पक्ष बर्खास्त कर देंगे। केसरकर के अनुसार, बाला साहब के विचारों के विरुद्ध जाने वालों को जनता ने स्वीकार नहीं किया।
सांसदों के शामिल होने पर संकेत
सांसदों की संभावित आवाजाही के सवाल पर केसरकर ने कहा, 'इंतजार कीजिए — अगर कोई पार्टी से जुड़ता है तो हमें बहुत खुशी होगी।' यह बयान राजनीतिक हलकों में शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के भविष्य को लेकर अटकलों को हवा देता है।
पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) के एक सांसद ने पत्रकारों से कहा था कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) में फूट का मुद्दा अब प्रासंगिक नहीं रहा, क्योंकि इस प्रकरण को एक महीने से अधिक हो चुके हैं। उन्होंने TMC के उन नेताओं की चर्चा की, जिन्होंने अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के विरुद्ध मोर्चा खोला था। यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच खींचतान लगातार जारी है।