राजस्थान विधानसभा के 75 साल: अमृत महोत्सव में 26 वरिष्ठ विधायक होंगे सम्मानित, उपराष्ट्रपति करेंगे समापन
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान विधानसभा ने 15 जुलाई 2026 को अपनी 75वीं वर्षगांठ एक ऐतिहासिक 'अमृत महोत्सव' के रूप में मनाई — और इसके साथ ही राजस्थान देश की पहली ऐसी राज्य विधानसभा बन गई जिसने अपनी 75 साल की लोकतांत्रिक यात्रा का जश्न इस पैमाने पर मनाया। जयपुर में आयोजित इस समारोह में संवैधानिक पदाधिकारियों से लेकर कई पीढ़ियों के जनप्रतिनिधि एक ही मंच पर एकत्रित हुए।
समारोह का आगाज़ और प्रमुख उपस्थिति
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने बुधवार सुबह जयपुर पहुँचकर सुबह 10 बजे इस महोत्सव का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे एक साथ मंच पर उपस्थित रहे — जो अपने आप में एक दुर्लभ राजनीतिक दृश्य था। समारोह में 25 लोकसभा सदस्य, 10 राज्यसभा सदस्य और लगभग 695 मौजूदा एवं पूर्व विधायक भी शामिल हुए।
वरिष्ठ विधायकों का सम्मान
इस आयोजन का एक केंद्रीय आकर्षण रहा उन 26 विधायकों का सम्मान, जिन्होंने छह या उससे अधिक बार विधानसभा चुनाव जीते हैं। सम्मानित होने वाले अधिकांश जनप्रतिनिधि 70 वर्ष से अधिक आयु के हैं और दशकों से राजस्थान की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। यह सम्मान सार्वजनिक जीवन में उनके दीर्घकालीन योगदान की स्वीकृति है।
उपराष्ट्रपति की उपस्थिति में समापन
शाम 4 बजे आयोजित समापन समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। यह समापन सत्र राजस्थान विधानसभा की संवैधानिक गरिमा और लोकतांत्रिक परंपरा का प्रतीक बना।
75 साल के अहम कानूनों पर मंथन
महोत्सव के अंतर्गत उन 24 महत्वपूर्ण कानूनों पर विशेष चर्चा का आयोजन किया गया, जिन्होंने पिछले साढ़े सात दशकों में राजस्थान के शासन और विकास को दिशा दी। इस परिचर्चा में 16 मौजूदा और पूर्व विधायक शामिल हुए, जिन्होंने इन ऐतिहासिक कानूनों के महत्व और उनके दीर्घकालीन प्रभाव पर अपने विचार साझा किए। गौरतलब है कि यह पहला अवसर था जब विभिन्न पीढ़ियों के कानून-निर्माता एक साथ राजस्थान की विधायी विरासत पर विमर्श के लिए एकत्रित हुए।
व्यवस्था और आगे की राह
मौजूदा और पूर्व विधायकों के लिए सर्किट हाउस, डाक बंगला, विधायक गेस्ट हाउस और पंचायती राज संस्थान में ठहरने की विशेष व्यवस्था की गई। यह महोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि राजस्थान की विधायी संस्था की आत्म-समीक्षा और भविष्य की दिशा तय करने का एक अवसर भी बना।