राजस्थान विश्वविद्यालय का 35वां दीक्षांत समारोह: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन 25 अप्रैल को जयपुर में होंगे शामिल
सारांश
Key Takeaways
- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 25 अप्रैल 2025 को जयपुर में राजस्थान विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में भाग लेंगे।
- भगवान महावीर कैंसर अस्पताल द्वारा आयोजित 23वें कैंसर सर्वाइवर्स डे में भी उपराष्ट्रपति की भागीदारी होगी।
- इससे एक दिन पहले उन्होंने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की।
- उपराष्ट्रपति ने 14 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीकाकरण और 100 से अधिक देशों को वैक्सीन मैत्री का उल्लेख किया।
- उन्होंने युवा चिकित्सकों से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा, निवारक देखभाल और नवाचार में योगदान देने का आह्वान किया।
- स्वास्थ्य सेवा को सार्वजनिक विश्वास बताते हुए उन्होंने सहानुभूति और सत्यनिष्ठा को चिकित्सक की पहचान कहा।
जयपुर, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शनिवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर में राजस्थान विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को इस कार्यक्रम की पुष्टि की। यह समारोह राज्य के उच्च शिक्षा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
दीक्षांत समारोह के साथ कैंसर सर्वाइवर्स डे में भी भागीदारी
अधिकारी ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन दीक्षांत समारोह के अलावा जयपुर के भगवान महावीर कैंसर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र द्वारा आयोजित 23वें कैंसर सर्वाइवर्स डे में भी भाग लेंगे। यह कार्यक्रम कैंसर से जूझकर जीत हासिल करने वाले रोगियों के साहस और संघर्ष को सम्मानित करने के लिए हर वर्ष आयोजित किया जाता है।
उपराष्ट्रपति की यह जयपुर यात्रा शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में उनकी सक्रिय भूमिका को दर्शाती है। गौरतलब है कि राजस्थान विश्वविद्यालय देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक है, जहां हजारों विद्यार्थी प्रतिवर्ष स्नातक होते हैं।
एम्स ऋषिकेश दीक्षांत समारोह में दिया प्रेरणादायी संदेश
इससे एक दिन पहले गुरुवार को उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने उत्तराखंड के एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उन्होंने स्नातकों को याद दिलाया कि दीक्षांत समारोह केवल वर्षों की कठोर मेहनत और त्याग की परिणति नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भी है।
उन्होंने युवा चिकित्सकों से समर्पण और उद्देश्य की भावना के साथ अपने पेशेवर दायित्वों को निभाने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक विश्वास है और चिकित्सा पेशेवरों की राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका होती है।
ग्रामीण क्षेत्रों और निवारक स्वास्थ्य सेवा पर जोर
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने युवा स्नातकों को निवारक देखभाल, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से देश की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सहानुभूति, सत्यनिष्ठा और सेवा के मूल्य एक चिकित्सक की असली पहचान होते हैं।
ऋषिकेश को चिंतन और उपचार के वैश्विक केंद्र तथा हिमालय के प्रवेश द्वार के रूप में उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण दीक्षांत समारोह की गंभीरता को और गहरा अर्थ प्रदान करता है।
भारत की वैक्सीन मैत्री और वैश्विक जिम्मेदारी
महामारी के दौर को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने लचीलापन, नवाचार और प्रतिबद्धता का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि भारत के व्यापक टीकाकरण अभियान के तहत 14 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीके लगाए गए, जिससे वंचित तबकों तक स्वास्थ्य सेवाओं की समान पहुंच सुनिश्चित हुई।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय वैज्ञानिकों ने टीके मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि मानवता की भलाई के लिए विकसित किए। वैक्सीन मैत्री पहल के अंतर्गत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए, जो वसुधैव कुटुंबकम की भावना को साकार करता है और एक जिम्मेदार वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की छवि को मजबूत बनाता है।
उपराष्ट्रपति की जयपुर यात्रा और राजस्थान विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह राज्य के हजारों स्नातक छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उपराष्ट्रपति शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में किन नई नीतिगत दिशाओं की वकालत करते हैं।