वासुदेव देवनानी: विधानसभा को विचार-विमर्श का पवित्र स्थल बनाना चाहिए

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वासुदेव देवनानी: विधानसभा को विचार-विमर्श का पवित्र स्थल बनाना चाहिए

सारांश

राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा को रचनात्मक विचार-विमर्श का मंदिर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका मानना है कि विधायकों को जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए और लोकतंत्र को सशक्त बनाना चाहिए।

Key Takeaways

  • विधानसभा को विचार-विमर्श का पवित्र स्थल बनाना चाहिए।
  • जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए।
  • युवा विधायकों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
  • तकनीक के द्वारा पारदर्शिता बढ़ाना आवश्यक है।
  • संयम और अनुशासन के साथ काम करना चाहिए।

जयपुर, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने स्पष्ट किया कि विधायी सभाएं शोर-शराबे और अव्यवस्था का स्थल नहीं होनी चाहिए। उनका मानना है कि विधानसभा को एक गंभीर, सम्मानजनक और रचनात्मक विचार-विमर्श का मंदिर होना चाहिए, जो जनकल्याण की दिशा में मार्गदर्शक हो और लोकतंत्र को सशक्त बनाए।

वे भोपाल में मध्य प्रदेश विधानसभा में आयोजित युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे।

इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और विपक्ष के नेता भी उपस्थित थे।

देवनानी ने कहा कि विधानसभा मात्र एक इमारत नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की आत्मा का प्रतीक है, एक ऐसा मंच जहां चुने हुए प्रतिनिधि जनता की आशाओं और समस्याओं को आवाज देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे पवित्र मंच पर हंगामा और शोर-शराबा करना लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के विश्वास को कमजोर करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि सदन में चर्चा तर्क, तथ्यों और मर्यादा पर आधारित होनी चाहिए। जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए, नीतियों की बारीकी से जांच होनी चाहिए और समस्याओं का सकारात्मक समाधान निकाला जाना चाहिए। मतभेदों के बीच भी बातचीत की गरिमा बनी रहनी चाहिए।

उन्होंने विधायकों से संयम, अनुशासन और शालीनता के साथ कार्य करने, व्यक्तिगत आलोचना से ऊपर उठने और राज्य व राष्ट्र के हितों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

युवाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए देवनानी ने कहा कि यह सम्मेलन भारतीय लोकतंत्र के भविष्य को संवारने का एक महत्वपूर्ण मंच है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के युवा विधायकों के इस मिलन को उन्होंने विधायी ऊर्जा का ‘त्रिवेणी संगम’ बताया। उन्होंने कहा कि युवा प्रतिनिधि देश की असली ताकत हैं और अपनी नई सोच से नीति-निर्धारण में बदलाव ला सकते हैं।

उन्होंने युवा विधायकों को सलाह दी कि वे सदन में बोलने से पहले पूरी तैयारी करें, जनता से जुड़े जरूरी मुद्दे उठाएं और सक्रियता से सवाल पूछकर जवाबदेही तय करें। इसके साथ ही, उन्हें वरिष्ठ नेताओं से सीखना चाहिए, लगातार अध्ययन करना चाहिए और पुस्तकालयों का उपयोग करना चाहिए।

देवनानी ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रतिनिधियों और जनता के बीच निरंतर जुड़ाव जरूरी है। उन्होंने इस जुड़ाव को मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया। ‘वन नेशन-वन एप्लीकेशन’ विजन के तहत ‘नेवा’ जैसे डिजिटल टूल्स का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इनसे विधायी प्रक्रियाएं अधिक सुलभ और जवाबदेह बन रही हैं।

उन्होंने विधायी समितियों के महत्व को भी समझाया और उन्हें लघु-विधायिका बताया, जो सरकार की जवाबदेही तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विधानसभा की बैठकों की संख्या बढ़ाने की वकालत की और बताया कि राजस्थान विधानसभा में अब तक 24 बैठकें हो चुकी हैं और इसे 35 तक ले जाने के प्रयास जारी हैं।

‘विकसित भारत 2047’ के विजन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि सबका साथ-सबका विकास है। उन्होंने युवा विधायकों से नवाचार, स्टार्टअप, कौशल विकास, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल समावेश जैसे क्षेत्रों में नेतृत्व करने का आह्वान किया।

अंत में, देवनानी ने युवा प्रतिनिधियों से अपील की कि वे हंगामे की राजनीति से ऊपर उठकर विधानसभाओं को सार्थक बहस और समाधान निकालने का मंच बनाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सम्मेलन के परिणाम लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत करेंगे।

Point of View

जो लोकतंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल को दर्शाता है। उनका यह सुझाव कि विधानसभा को एक विचार-विमर्श का मंदिर होना चाहिए, भारतीय राजनीति में एक सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।
NationPress
03/04/2026

Frequently Asked Questions

वासुदेव देवनानी का मुख्य संदेश क्या था?
उनका मुख्य संदेश था कि विधानसभा को शोर-शराबे का स्थल नहीं, बल्कि गंभीर और रचनात्मक विचार-विमर्श का पवित्र स्थल होना चाहिए।
युवा विधायकों के सम्मेलन का उद्देश्य क्या है?
इस सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र के भविष्य को संवारने के लिए युवा विधायकों की भागीदारी को बढ़ावा देना है।
देवनानी ने तकनीक के उपयोग पर क्यों जोर दिया?
उन्होंने तकनीक के उपयोग से विधायी प्रक्रियाओं को अधिक सुलभ और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता बताई।
क्या देवनानी ने विधायकों से किसी प्रकार का आह्वान किया?
हां, उन्होंने विधायकों से संयम, अनुशासन और शालीनता के साथ कार्य करने की अपील की।
राजस्थान विधानसभा की बैठकों की संख्या कितनी है?
अब तक राजस्थान विधानसभा में 24 बैठकें हो चुकी हैं, और इसे 35 तक बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
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