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क्या सदनों की समय-सीमा तय होने से विधायी कार्य अधिक प्रभावी होगा?: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

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क्या सदनों की समय-सीमा तय होने से विधायी कार्य अधिक प्रभावी होगा?: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

सारांश

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विधानसभा के सत्रों की अवधि पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय की कमी से विधायकों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलता, जिससे जनहित के मुद्दों पर चर्चा प्रभावित होती है। क्या इससे विधायी कार्यों की प्रभावशीलता बढ़ेगी?

मुख्य बातें

सदनों की समय-सीमा तय करने की आवश्यकता है।
विधायकों को जनहित के मुद्दों पर चर्चा का अवसर मिलना चाहिए।
सम्मेलन का उद्देश्य संसदीय प्रणाली को सशक्त बनाना है।
लोकतंत्र की आत्मा का संरक्षण जरूरी है।
समस्याओं का समाधान संवाद से निकलेगा।

लखनऊ, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विधानसभा के संचालन के लिए स्पष्ट एवं सुनिश्चित समय-सीमा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अल्प अवधि के सत्रों में कई बार विधायकों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं मिल पाता, जिससे जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा बाधित होती है।

उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इस दिशा में दिए गए सुझाव को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए उम्मीद जताई कि इस पर गंभीरता से अमल करते हुए ठोस निर्णय लिए जाएंगे।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को विधानसभा, लखनऊ में 19 से 21 जनवरी तक आयोजित अखिल भारतीय 86वें पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर उन्होंने देशभर से आए विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारियों, गणमान्य अतिथियों एवं जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया। राज्यपाल ने कहा कि यदि विधानसभाएं केवल चार, पांच या दस दिनों के लिए संचालित होती हैं, तो भी समय के अभाव में जनप्रतिनिधियों की आवाज पूरी तरह सदन तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में सदनों की कार्यवाही को अधिक व्यवस्थित, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए उनकी अवधि का स्पष्ट निर्धारण आवश्यक है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि सम्मेलन के दो-तीन दिनों के भीतर इस विषय पर व्यावहारिक और ठोस निर्णय सामने आएंगे। राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इस प्रतिष्ठित सम्मेलन का आयोजन होना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। यह सम्मेलन भारतीय संसदीय परंपराओं की सुदृढ़ता, मर्यादा और निरंतरता का जीवंत प्रतीक है। लखनऊ की तहजीब, संवाद और समन्वय की परंपरा इस आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान करती है।

राज्यपाल ने पीठासीन अधिकारियों को लोकतंत्र की आत्मा का संरक्षक बताते हुए कहा कि उनकी निष्पक्षता, विवेक और मर्यादित आचरण ही सदनों को जनआकांक्षाओं की प्रभावी अभिव्यक्ति का मंच बनाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन अनुभवों के आदान-प्रदान, श्रेष्ठ संसदीय परंपराओं के संरक्षण और नवाचारों के सृजन का सशक्त माध्यम बनेगा।

राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदेश वैदिक संस्कृति, दर्शन और लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र रहा है। प्रयागराज, अयोध्या, वाराणसी और मथुरा जैसी पावन धरती ने भारत की आत्मा और उसके मूल्यों को दिशा दी है।

उन्होंने कहा कि विधानमंडल जनआकांक्षाओं को स्वर देने का पवित्र मंच है और सदन की सार्थकता केवल बहसों की संख्या से नहीं, बल्कि लोककल्याण की भावना, तथ्यपरक और समाधानोन्मुख चर्चाओं से तय होती है। संवाद जब समाधान में परिवर्तित होता है, तभी संसदीय लोकतंत्र सशक्त और विश्वासयोग्य बनता है।

उन्होंने सदन की कार्यवाहियों में व्यवधान को एक गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इससे जनहित के महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा बाधित होती है और लोकतंत्र के प्रति जनता का विश्वास प्रभावित होता है। विचारों की भिन्नता को लोकतंत्र की शक्ति बताते हुए उन्होंने असहमति को लोकतांत्रिक सौंदर्य के रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के मार्गदर्शन में प्रकाशित पुस्तक ‘उत्तर प्रदेश विधानसभा की संसदीय पद्धति और प्रक्रिया’ की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रकाशन लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय अनुशासन का महत्वपूर्ण पथप्रदर्शक सिद्ध होगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन में गहन, संतुलित और सार्थक विचार-विमर्श होगा तथा यह आयोजन संसदीय प्रणाली को और अधिक सशक्त, संवेदनशील और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह न केवल विधायकों के लिए, बल्कि लोकतंत्र के लिए भी लाभकारी होगा। यह समय की कमी से उत्पन्न समस्याओं को दूर करेगा और जनहित के मुद्दों पर गहन चर्चा को प्रोत्साहित करेगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राज्यपाल ने सदनों की समय-सीमा के बारे में क्या कहा?
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने स्पष्ट समय-सीमा की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि विधायकों को जनहित के मुद्दों पर चर्चा का अवसर मिल सके।
यह सम्मेलन कब आयोजित हो रहा है?
यह सम्मेलन 19 से 21 जनवरी तक लखनऊ में आयोजित हो रहा है।
राज्यपाल ने लोकतंत्र की आत्मा के बारे में क्या कहा?
उन्होंने पीठासीन अधिकारियों को लोकतंत्र की आत्मा का संरक्षक बताया और उनके निष्पक्षता और विवेक को महत्वपूर्ण माना।
राष्ट्र प्रेस
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