अदाणी समूह: यूनेस्को के विश्व इंजीनियरिंग दिवस 2026 का आधिकारिक सहयोगी
सारांश
Key Takeaways
- अदाणी समूह को विश्व इंजीनियरिंग दिवस 2026 का आधिकारिक भागीदार बनाया गया है।
- यह भारतीय संगठनों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
- खावड़ा परियोजना का लक्ष्य 30 गीगावाट ऊर्जा उत्पादन करना है।
- स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अदाणी समूह का योगदान महत्वपूर्ण है।
- डब्ल्यूईडी 2026 का विषय 'स्मार्ट इंजीनियरिंग' है।
अहमदाबाद, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अदाणी समूह को सतत विकास के लिए विश्व इंजीनियरिंग दिवस (डब्ल्यूईडी) 2026 का आधिकारिक भागीदार बनाया गया है। यह दिवस यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) द्वारा स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है, जिसे वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ इंजीनियरिंग ऑर्गनाइजेशंस (डब्ल्यूएफईओ) द्वारा आयोजित किया जाएगा।
यह पहली बार है जब विश्व इंजीनियरिंग दिवस पर इंजीनियरों के योगदान को मान्यता देने के लिए डब्ल्यूएफईओ ने किसी भारतीय संगठन को चुना है।
भारत की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट, यूटिलिटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर कंपनी ने कहा कि यह स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को बढ़ावा देने में अदाणी समूह के नेतृत्व और उसकी क्षमता का प्रमाण है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों (सतत विकास लक्ष्य 7) में योगदान देता है।
अदाणी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने कहा, "हम यह प्रदर्शित कर रहे हैं कि स्वच्छ ऊर्जा बड़े पैमाने पर और किफायती हो सकती है, यह शक्तिशाली और समावेशी है। यह दुनिया के लिए भारत का योगदान है और एक ऐसा मॉडल है जहां प्रगति और सततता एक साथ आगे बढ़ते हैं। हमारा खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र भारत की जलवायु कार्रवाई का प्रतीक है। यह अदाणी ग्रीन एनर्जी, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और अदाणी न्यू इंडस्ट्रीज की सामूहिक शक्ति को दर्शाता है, जो एकीकृत नवीकरणीय भविष्य को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रही हैं।"
‘डब्ल्यूईडी 2026’ का विषय है “नवाचार और डिजिटलीकरण के माध्यम से सतत भविष्य के लिए स्मार्ट इंजीनियरिंग"।
नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना और बड़े पैमाने पर परिवहन एवं उपयोगिता प्रणालियों के क्षेत्र में अदाणी समूह का कार्य इस दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से दर्शाता है, जिससे पता चलता है कि प्रौद्योगिकी-आधारित इंजीनियरिंग वास्तव में सतत विकास को कैसे संभव बना सकती है।
गुजरात में खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना की योजनाबद्ध क्षमता 2029 तक 30 गीगावाट है, जिसे विश्व इंजीनियरिंग संगठन (डब्ल्यूएफईओ) ने भारत के हरित परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया है और इसके विशाल आकार, महत्वाकांक्षा और प्रभाव को दर्शाने वाली एक शॉर्ट फिल्म भी प्रदर्शित की है।
538 वर्ग किलोमीटर में निर्मित यह परियोजना पेरिस से पांच गुना और लगभग मुंबई शहर के बराबर है। पूर्ण होने पर, यह सभी ऊर्जा स्रोतों में दुनिया का सबसे बड़ा विद्युत संयंत्र होगा।
एजीईएल ने अब तक खावड़ा में 7 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा की संचयी क्षमता को परिचालन में ला दिया है और 2029 तक पूरी 30 गीगावाट क्षमता प्रदान करेगा।