सीएम योगी ने 50 क्यूआरटी वाहनों को हरी झंडी देकर सुरक्षा में नया आयाम स्थापित किया

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सीएम योगी ने 50 क्यूआरटी वाहनों को हरी झंडी देकर सुरक्षा में नया आयाम स्थापित किया

सारांश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 50 क्यूआरटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान की है। यह कदम होंडा इंडिया फाउंडेशन की पहल के तहत उठाया गया है, जो कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहायक होगा।

Key Takeaways

  • सीएम योगी का 50 क्यूआरटी वाहनों का शुभारंभ
  • सुरक्षा को लेकर नई पहल
  • पुलिस विभाग में सुधार
  • फॉरेंसिक लैब की संख्या में वृद्धि
  • युवाओं के लिए प्रशिक्षण के अवसर

लखनऊ, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोकभवन में 50 क्यूआरटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि होंडा इंडिया फाउंडेशन द्वारा यह पहल प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगी।

सीएम ने कहा कि पहली बार लोकतंत्र में कानून व्यवस्था चुनाव में मुद्दा बनी और इसका परिणाम यह है कि आजादी के बाद पहली बार किसी सरकार ने अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद पुनः सरकार बनाई। पुलिस विभाग ने वर्ष 2017 के बाद बिगड़े, अराजक, दंगाग्रस्त और कर्फ्यूग्रस्त राज्य को बदलकर सेफ यूपी के रूप में स्थापित किया। विकास की पहली शर्त सुरक्षा है। इसे उत्तर प्रदेश पुलिस ने साबित किया है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यूपी का परसेप्शन चेंज करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं और कुछ रिफॉर्म किए गए हैं। इसके परिणाम हम सबके सामने हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस में वर्ष 2017 में पीआरवी के वाहन 9,500 थे। आज इनकी संख्या प्रदेश में 15,500 से अधिक है। वहीं वर्ष 2017 में टू व्हीलर मात्र 3,000 थे, आज इनकी संख्या 9,200 से अधिक है। यह सिर्फ संख्या नहीं है, इसने पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम लाने में सफलता प्राप्त की है। आपातकालीन स्थिति में जितनी त्वरित कार्रवाई और सहायता पहुंचाएंगे, वही ट्रस्ट में बदलती है। वह ट्रस्ट ही ट्रांसफॉर्मेशन का कारण बनता है।

उन्‍होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मॉडल पुलिसिंग के तीन महत्वपूर्ण स्तंभों की चर्चा की है, जिनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और मोबिलिटी शामिल हैं। वर्ष 2017 से पहले पुलिस विभाग का बजट अटकते-अटकते 16,000 करोड़ तक पहुंच पाता था और वह भी खर्च नहीं हो पाता था। वर्षों पहले जिले बने थे, लेकिन जिला मुख्यालय, पुलिस लाइन भी नहीं बनी थी। ऐसे में पुलिस क्या परिणाम देती? उस दौरान अवस्थापना सुविधाएं जीरो थीं। टूटे हुए बैरक में पुलिसकर्मी रहने को मजबूर थे।

सीएम ने कहा कि आज प्रदेश के 55 जिलों में सबसे ऊंची इमारत उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों की बैरक है। यहां बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही प्रदेश में लगातार मॉडल थानों और मॉडल फायर स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे पुलिस और आपदा सेवाओं को आधुनिक स्वरूप दिया जा सके।

उन्होंने बताया कि एक साथ लगभग 3,000 पुलिसकर्मियों को ही प्रशिक्षण दिया जा सकता था। सरकार के सामने चुनौती थी कि लंबे समय से पुलिस भर्ती नहीं हुई थी और युवाओं में भर्ती को लेकर उत्सुकता थी, लेकिन प्रशिक्षण क्षमता सीमित होने के कारण भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाना कठिन था। किसी भी भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग 9 महीने का समय लगता था। ऐसे में राज्य सरकार ने अन्य राज्यों से संपर्क किया। दो-तीन राज्यों ने सहयोग के लिए सहमति दी।

इसके अलावा, सेना और अर्द्धसैनिक बलों से भी बातचीत की गई, जिन्होंने सहयोग देने की बात कही। इन सभी प्रयासों के बाद किसी तरह प्रशिक्षण क्षमता को बढ़ाकर लगभग 17 से 20 हजार तक पहुंचाया गया। इसके बाद अन्य राज्यों तथा सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों की मदद से इसे करीब 30 हजार तक ले जाया गया, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आज प्रदेश में 60,244 पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती की गई है और इन सभी को उत्तर प्रदेश के अपने प्रशिक्षण केंद्रों में ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष जुलाई में देश में तीन नए आपराधिक कानून लागू किए गए। इन कानूनों के तहत सात वर्ष से अधिक की सजा वाले मामलों में फॉरेंसिक साक्ष्य अनिवार्य किए गए हैं। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल दो फॉरेंसिक लैब थीं, लेकिन अब उनकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है। इसके साथ ही प्रदेश में विश्वस्तरीय स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट भी स्थापित किया गया है, जो उत्तर प्रदेश पुलिस के अधीन संचालित हो रहा है। इस संस्थान में डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं।

सीएम ने कहा कि इसके माध्यम से पुलिस कर्मियों के साथ-साथ उन युवाओं को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनकी रुचि फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में है। प्रत्येक जिले में ए-ग्रेड की छह फॉरेंसिक लैब निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा हर जिले में दो-दो मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट भी तैनात की गई हैं, जो घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य संग्रह और जांच में मदद कर रही हैं। प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाने के लिए कई नई इकाइयों का गठन किया गया है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पुलिस व्यवस्था में इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और मोबिलिटी को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास प्रारंभ किए गए। इन सभी को मिलाकर जब टेक्नोलॉजी और ट्रांसफॉर्मेशन एक साथ काम करते हैं तो रिजल्ट आता है। यही कॉमन मैन के ट्रस्ट का आधार बनता है। आज देश और दुनिया के बड़े निवेशक उत्तर प्रदेश में निवेश करना चाहते हैं।

Point of View

वह दर्शाता है कि राज्य सरकार सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
NationPress
06/03/2026

Frequently Asked Questions

क्यूआरटी वाहन क्या होते हैं?
क्यूआरटी वाहन विशेष रूप से आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
होंडा इंडिया फाउंडेशन की भूमिका क्या है?
होंडा इंडिया फाउंडेशन प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सहायक पहल कर रहा है।
पुलिस प्रशिक्षण में क्या बदलाव आए हैं?
पुलिस भर्ती और प्रशिक्षण की क्षमता को बढ़ाकर अब 60,000 से अधिक पुलिस कांस्टेबलों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक लैब की संख्या कितनी है?
उत्तर प्रदेश में अब फॉरेंसिक लैब की संख्या 12 हो गई है।
मुख्यमंत्री ने सुरक्षा को लेकर क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने सुरक्षा को विकास की पहली शर्त बताया और इसके लिए आवश्यक कदम उठाने की बात की।
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