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यूपीआई पर शुल्क की तैयारी: सीपीआई-एम नेता हन्नान मोल्लाह का केंद्र पर बड़ा हमला

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यूपीआई पर शुल्क की तैयारी: सीपीआई-एम नेता हन्नान मोल्लाह का केंद्र पर बड़ा हमला

सारांश

सीपीआई-एम नेता हन्नान मोल्लाह ने यूपीआई पर प्रस्तावित शुल्क को 15 साल की 'जेब काटने वाली' नीतियों की अगली कड़ी बताया। एनआरसी पर अल्पसंख्यक चिंता, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और न्यायिक पारदर्शिता — चार मुद्दों पर एक ही दिन में केंद्र सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

सीपीआई-एम नेता हन्नान मोल्लाह ने 15 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार पर यूपीआई-रुपे शुल्क के ज़रिए आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया।
₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित फीस को उन्होंने पिछले 15 वर्षों की जनविरोधी नीतियों का विस्तार बताया।
एनआरसी के संदर्भ में उन्होंने अल्पसंख्यकों और प्रवासियों के प्रति चिंता जताई; इन आरोपों पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सरकारी कदमों का मूल्यांकन परिणाम आने के बाद ही संभव — मोल्लाह।
CJI सूर्यकांत की न्यायिक पारदर्शिता टिप्पणी को सकारात्मक बताया, लेकिन व्यवहारिक क्रियान्वयन की माँग की।

सीपीआई-एम (CPI-M) नेता हन्नान मोल्लाह ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में यूपीआई-रुपे पेमेंट पर प्रस्तावित शुल्क, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा, एनआरसी और न्यायिक पारदर्शिता जैसे कई अहम मुद्दों पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। मोल्लाह ने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में आम जनता पर लगातार आर्थिक बोझ डाला गया है और यूपीआई पर प्रस्तावित चार्ज उसी कड़ी का नवीनतम उदाहरण है।

यूपीआई शुल्क पर तीखा हमला

₹2,000 से अधिक के यूपीआई-रुपे लेनदेन पर प्रस्तावित फीस स्ट्रक्चर को लेकर मोल्लाह ने केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आम जनता को लगातार सावधान रहना पड़ रहा है कि उसकी जेब कब कट जाए। उनके अनुसार, पिछले 15 वर्षों में लोगों की आर्थिक स्थिति 'छलनी जैसी' हो गई है और सरकारी नीतियाँ उसमें 'नए-नए छेद' करती जा रही हैं।

मोल्लाह ने यह भी कहा कि जब तक ऐसी नीतियों के लिए जिम्मेदार लोग सत्ता में बने रहेंगे, आम जनता को राहत नहीं मिलेगी। गौरतलब है कि यूपीआई पर संभावित शुल्क का प्रश्न पिछले कई महीनों से बैंकिंग और फिनटेक क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा है।

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सतर्क रुख

सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर मोल्लाह ने सतर्क लेकिन संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकारी हस्तक्षेप का वास्तविक असर तभी आँका जा सकेगा जब उसके ठोस परिणाम सामने आएँ। उनके अनुसार, जनता इसी आधार पर यह तय करेगी कि सरकार का फैसला सही दिशा में है या नहीं।

एनआरसी और अल्पसंख्यकों की चिंता

एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एनआरसी संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मोल्लाह ने कहा कि अल्पसंख्यकों और प्रवासियों के लिए असुविधा और चिंता स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुसलमानों को लंबे समय से विभिन्न तरीकों से परेशान किया जाता रहा है और एनआरसी भी कथित तौर पर उसी श्रृंखला की एक कड़ी हो सकती है।

मोल्लाह ने कहा कि यदि किसी समुदाय की दीर्घकालिक स्थिति या अधिकारों में अचानक परिवर्तन किया जाता है, तो उससे प्रभावित लोगों के सामने गंभीर कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब एनआरसी को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज़ है। इन आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

न्यायिक पारदर्शिता पर सकारात्मक संकेत

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की न्यायिक पारदर्शिता संबंधी टिप्पणी को मोल्लाह ने सकारात्मक कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है, लेकिन केवल बयानों से काम नहीं चलेगा — इन सिद्धांतों को व्यवहार में भी ईमानदारी से उतारना होगा।

मोल्लाह के अनुसार, न्यायिक व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए घोषित नीतियों का क्रियान्वयन उतना ही ज़रूरी है जितना उनकी घोषणा। आगे के दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि इन मुद्दों पर सरकार और न्यायपालिका की व्यावहारिक प्रतिक्रिया क्या आकार लेती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से ऊपर के लेनदेन पर शुल्क लागू होता है, तो यह छोटे व्यापारियों और मध्यवर्ग को सीधे प्रभावित करेगा — वही वर्ग जिसने नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान को अपनाया था। एनआरसी पर मोल्लाह की टिप्पणी राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नज़रअंदाज करती है कि इन मुद्दों पर वामपंथी और ओवैसी जैसी पार्टियों की स्थिति में सूक्ष्म अंतर है। न्यायिक पारदर्शिता पर उनका 'बयान काफी नहीं, अमल चाहिए' वाला सुर संस्थागत जवाबदेही की बड़ी बहस का हिस्सा है जो इस समय न्यायपालिका के भीतर भी चल रही है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई-रुपे पर प्रस्तावित शुल्क क्या है जिसपर हन्नान मोल्लाह ने आपत्ति जताई?
प्रस्तावित फीस स्ट्रक्चर के तहत ₹2,000 से अधिक के यूपीआई-रुपे लेनदेन पर शुल्क लगाने की तैयारी बताई जा रही है। सीपीआई-एम नेता हन्नान मोल्लाह ने इसे आम जनता पर थोपे जाने वाले नए आर्थिक बोझ के रूप में वर्णित किया है।
हन्नान मोल्लाह का '15 साल जेब काटने' का आरोप किस पर है?
मोल्लाह ने यह आरोप केंद्र सरकार की नीतियों पर लगाया है। उनका कहना है कि पिछले 15 वर्षों में आम लोगों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ा है और यूपीआई शुल्क उसी सिलसिले की नई कड़ी है।
एनआरसी पर हन्नान मोल्लाह ने क्या कहा?
मोल्लाह ने कहा कि एनआरसी से अल्पसंख्यकों और प्रवासियों में असुविधा और चिंता स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुसलमानों को विभिन्न तरीकों से लंबे समय से परेशान किया जाता रहा है और एनआरसी भी कथित तौर पर उसी नीति का हिस्सा हो सकता है।
CJI सूर्यकांत की न्यायिक पारदर्शिता टिप्पणी पर मोल्लाह की क्या राय है?
मोल्लाह ने CJI सूर्यकांत की टिप्पणी को सकारात्मक कदम बताया, लेकिन साथ ही कहा कि केवल बयान देना पर्याप्त नहीं है — पारदर्शिता के सिद्धांतों को व्यवहार में भी ईमानदारी से लागू किया जाना चाहिए।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर मोल्लाह का क्या रुख रहा?
मोल्लाह ने इस विषय पर सतर्क रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकारी कदमों के वास्तविक परिणाम सामने आने के बाद ही यह आँका जा सकेगा कि इससे बच्चों को वास्तव में फायदा होगा या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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