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बिहार: खरीफ 2026-27 में हर जिले में उसना चावल, 15 अक्टूबर तक मिलरों का निबंधन अनिवार्य

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बिहार: खरीफ 2026-27 में हर जिले में उसना चावल, 15 अक्टूबर तक मिलरों का निबंधन अनिवार्य

सारांश

बिहार सरकार ने खरीफ 2026-27 में हर जिले में उसना चावल तैयार करने का फैसला लिया है। मिलरों के लिए 15 अक्टूबर तक ऑनलाइन निबंधन अनिवार्य है। जीपीएस ट्रैकिंग और विद्युत निगरानी से इस बार अधिप्राप्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।

मुख्य बातें

बिहार सरकार ने खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में राज्य के प्रत्येक जिले में अधिकतम मात्रा में उसना चावल तैयार करने का निर्णय लिया।
चावल मिलरों का ऑनलाइन निबंधन 16 अगस्त 2026 से शुरू; अंतिम तिथि 15 अक्टूबर 2026 ।
मिलों में कार्यकारी विद्युत संयोजन अनिवार्य; विद्युत वितरण कंपनियों से सीधे मासिक खपत डेटा लिया जाएगा।
धान और चावल की ढुलाई केवल जीपीएस युक्त वाहनों से; वाहन सारथी पोर्टल से दस्तावेज़ सत्यापन होगा।
मिल परिसरों की जियो-फेंसिंग और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) से पूरी प्रक्रिया की रियल-टाइम निगरानी होगी।

बिहार सरकार ने खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में राज्य के प्रत्येक जिले में अधिकतम संभव मात्रा में उसना चावल तैयार करने का निर्णय लिया है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने इस दिशा में तैयारियाँ शुरू कर दी हैं और चावल मिलरों के लिए ऑनलाइन निबंधन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।

मंत्री का बयान और नीतिगत दिशा

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों से धान की सुगम एवं पारदर्शी अधिप्राप्ति के लिए व्यवस्था को निरंतर सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने बताया कि खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में प्रत्येक जिले में उसना चावल तैयार करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं।

चौधरी ने आगे कहा कि तकनीक के प्रभावी उपयोग से अधिप्राप्ति, मिलिंग और परिवहन की निगरानी को और अधिक मज़बूत किया जाएगा। उन्होंने सभी चावल मिल संचालकों से अपील की कि वे निर्धारित अवधि में निबंधन कराकर अधिप्राप्ति कार्य की तैयारियाँ समय रहते पूरी करें।

निबंधन प्रक्रिया और समय-सीमा

विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में धान अधिप्राप्ति कार्यक्रम में शामिल होने के इच्छुक चावल मिलरों का ऑनलाइन निबंधन 16 अगस्त 2026 से प्रारंभ हो चुका है। बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के आधिकारिक पोर्टल पर यह प्रक्रिया उपलब्ध है और निबंधन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी मिल संचालकों को समय सीमा के भीतर निबंधन अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा, अन्यथा वे इस मौसम की अधिप्राप्ति प्रक्रिया में भाग लेने के अयोग्य होंगे।

तकनीकी निगरानी: विद्युत खपत और जीपीएस ट्रैकिंग

इस बार धान की मिलिंग करने वाले मिलों के लिए कार्यकारी विद्युत संयोजन अनिवार्य कर दिया गया है। मिलों द्वारा विद्युत खपत की मासिक सूचना सीधे विद्युत वितरण कंपनियों से प्राप्त की जाएगी, जिससे मिलिंग गतिविधियों की स्वतंत्र निगरानी संभव होगी।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष की भाँति इस वर्ष भी धान एवं चावल का परिवहन करने वाले वाहनों का ऑनलाइन निबंधन, सत्यापन और जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य किया गया है। ढुलाई केवल जीपीएस युक्त वाहनों से ही होगी और वाहनों के दस्तावेज़ों का सत्यापन भारत सरकार के वाहन सारथी पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा।

जियो-फेंसिंग और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मिलरों के मिल परिसर को जियो-फेंसिंग के अंतर्गत लाया जाएगा। वाहनों की जीपीएस ट्रैकिंग बिहार राज्य खाद्य निगम में स्थापित व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) के माध्यम से की जाएगी। यह व्यवस्था धान और चावल की आवाजाही में किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने में सहायक होगी।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में धान अधिप्राप्ति की पारदर्शिता को लेकर पिछले कुछ मौसमों में सवाल उठते रहे हैं। तकनीक-आधारित निगरानी की यह परत अधिप्राप्ति प्रक्रिया में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

आगे की राह

मिल संचालकों के निबंधन के बाद विभाग खरीफ मौसम की खरीद तिथियाँ और लक्ष्य घोषित करेगा। सरकार का लक्ष्य है कि धान उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर तत्काल और पारदर्शी भुगतान मिले, और उसना चावल की उपलब्धता राज्य के सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए सुनिश्चित हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — बिहार में पिछले कई मौसमों में अधिप्राप्ति लक्ष्य से पीछे रहने के उदाहरण मौजूद हैं। 'हर जिले में अधिकतम मात्रा' जैसे अस्पष्ट लक्ष्य के बजाय जिलेवार संख्यात्मक लक्ष्य सार्वजनिक किए जाते तो जवाबदेही और मापन आसान होता। 15 अक्टूबर की निबंधन समय सीमा तंग है, और यदि मिलरों की भागीदारी अपेक्षा से कम रही, तो किसानों को समय पर भुगतान मिलने में देरी हो सकती है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में उसना चावल योजना 2026-27 क्या है?
बिहार सरकार ने खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में राज्य के प्रत्येक जिले में अधिकतम संभव मात्रा में उसना चावल तैयार करने का निर्णय लिया है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग इसके लिए चावल मिलरों का ऑनलाइन निबंधन करा रहा है और तकनीकी निगरानी व्यवस्था लागू कर रहा है।
चावल मिलरों के निबंधन की अंतिम तिथि क्या है?
बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के आधिकारिक पोर्टल पर 16 अगस्त 2026 से ऑनलाइन निबंधन प्रारंभ हो चुका है और अंतिम तिथि 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित है। समय सीमा के बाद निबंधन नहीं करने वाले मिल संचालक अधिप्राप्ति प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगे।
इस बार धान परिवहन में जीपीएस ट्रैकिंग क्यों अनिवार्य की गई है?
धान और चावल की ढुलाई में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए केवल जीपीएस युक्त वाहनों से परिवहन अनिवार्य किया गया है। वाहनों के दस्तावेज़ वाहन सारथी पोर्टल से सत्यापित होंगे और बिहार राज्य खाद्य निगम के व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) से रियल-टाइम निगरानी होगी।
मिलों में विद्युत संयोजन अनिवार्य करने से क्या फायदा होगा?
कार्यकारी विद्युत संयोजन अनिवार्य करने से मिलों की वास्तविक मिलिंग गतिविधि का स्वतंत्र सत्यापन संभव होगा, क्योंकि मासिक विद्युत खपत की जानकारी सीधे विद्युत वितरण कंपनियों से ली जाएगी। इससे फर्जी मिलिंग या क्षमता से कम काम करने वाली मिलों की पहचान आसान होगी।
इस योजना से किसानों को क्या फायदा होगा?
पारदर्शी और तकनीकी-आधारित अधिप्राप्ति प्रक्रिया से किसानों को धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य समय पर मिलने की संभावना बढ़ेगी। हर जिले में उसना चावल उत्पादन से स्थानीय स्तर पर मिलिंग क्षमता का बेहतर उपयोग होगा और किसानों को लंबी दूरी तय किए बिना नज़दीकी केंद्रों पर धान बेचने की सुविधा मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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