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गयाजी पितृपक्ष मेला 2026: चार साल में श्रद्धालु चार गुना बढ़े, इस बार 50 लाख आगमन का अनुमान

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गयाजी पितृपक्ष मेला 2026: चार साल में श्रद्धालु चार गुना बढ़े, इस बार 50 लाख आगमन का अनुमान

सारांश

गयाजी का पितृपक्ष मेला अब महज़ एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा — यह बिहार के धार्मिक पर्यटन की नई पहचान बन रहा है। 2022 में 9.40 लाख से 2025 में 34.79 लाख तक का सफ़र और अब 50 लाख का लक्ष्य — यह वृद्धि बताती है कि पूर्वजों की आत्मा की शांति की तलाश हर साल और गहरी होती जा रही है।

मुख्य बातें

गयाजी पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं की संख्या 2022 से 2025 के बीच 9.40 लाख से बढ़कर 34.79 लाख हो गई — करीब चार गुना वृद्धि।
25 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले मेले में 50 लाख श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान।
गयाजी में 2,500 बेड की टेंट सिटी और 1,000 बेड की धर्मशाला तैयार की जा रही है।
पुनपुन घाट पर 5,000 लोगों की क्षमता वाला पंडाल निर्मित हो रहा है।
श्रद्धालुओं के लिए ई-रिक्शा , हेल्पलाइन , पर्यटक सूचना केंद्र और प्रशिक्षित गाइड की व्यवस्था।

बिहार के गयाजी में पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार नए कीर्तिमान बना रही है। पर्यटन विभाग के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में जहाँ मात्र 9.40 लाख श्रद्धालु यहाँ पहुँचे थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 34.79 लाख तक जा पहुँची — यानी चार वर्षों में लगभग चार गुना वृद्धि। इस वर्ष 25 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले पितृपक्ष मेले में करीब 50 लाख श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान लगाया जा रहा है।

चार वर्षों में कितने बढ़े श्रद्धालु

विभागीय आँकड़ों के अनुसार, 2022 में गयाजी पहुँचे कुल 9 लाख 40 हज़ार श्रद्धालुओं में 9 लाख 38 हज़ार देशी और 1,518 विदेशी पर्यटक शामिल थे। 2023 में यह आँकड़ा उछलकर 29 लाख 89 हज़ार हो गया, जिसमें 29 लाख 6 हज़ार देशी और 82 हज़ार विदेशी पर्यटक थे।

2024 में कुल 30 लाख 59 हज़ार श्रद्धालु पहुँचे — 29 लाख 4 हज़ार देशी और 1 लाख 55 हज़ार विदेशी। इसके बाद 2025 में संख्या फिर उछली और 34 लाख 79 हज़ार तक पहुँची, जिसमें 34 लाख 77 हज़ार देशी और 1,807 विदेशी पर्यटक थे। यह वृद्धि-क्रम दर्शाता है कि गयाजी का धार्मिक पर्यटन तेज़ी से मुख्यधारा में आ रहा है।

तैयारियों का दायरा

इस वर्ष की संभावित भीड़ को देखते हुए पर्यटन विभाग ने गयाजी से पुनपुन तक व्यापक तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। गयाजी में 2,500 बेड की आधुनिक टेंट सिटी तैयार की जा रही है और 1,000 बेड की आधुनिक धर्मशाला भी स्थापित की जाएगी।

पुनपुन घाट पर एक साथ करीब 5,000 लोगों के बैठने की क्षमता वाला पंडाल निर्मित किया जा रहा है। मेले में आवास, परिवहन, पिंडदान, भोजन और सांस्कृतिक पर्यटन से जुड़ी सुविधाएँ एकसाथ उपलब्ध कराने की योजना है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतज़ाम

मेले में पहुँचने वाले तीर्थयात्रियों को रास्ते, आवास, पिंडदान स्थल और अन्य सुविधाओं की जानकारी आसानी से मिल सके, इसके लिए पर्यटक सूचना केंद्र और विशेष हेल्पलाइन स्थापित की जा रही हैं। स्थानीय आवागमन को सुलभ बनाने के लिए ई-रिक्शा सेवा उपलब्ध रहेगी।

धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षित गाइड तैनात रहेंगे। होटल और धर्मशालाओं में ठहरने की क्षमता को भी पुख़्ता किया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार सरकार धार्मिक पर्यटन को राज्य की आर्थिक प्रगति का एक प्रमुख स्तंभ बनाने की दिशा में काम कर रही है।

आगे क्या

25 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले पितृपक्ष मेले में यदि 50 लाख श्रद्धालु वास्तव में पहुँचते हैं, तो यह गयाजी के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आयोजन होगा। विभाग की तैयारियाँ उस लक्ष्य को ध्यान में रखकर की जा रही हैं, हालाँकि इतने बड़े आयोजन में यातायात प्रबंधन और स्वच्छता सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

सफ़ाई, स्वास्थ्य — उस गति से बढ़ी है जितनी तेज़ी से भीड़ बढ़ी है? 2025 में 34.79 लाख की भीड़ में व्यवस्था कैसी रही, इसका कोई आधिकारिक मूल्यांकन सार्वजनिक नहीं हुआ। बिना उस फीडबैक लूप के, हर साल बड़े आँकड़े की घोषणा महज़ एक प्रचार-चक्र बन सकती है जो ज़मीनी अनुभव को नज़रअंदाज़ करे।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गयाजी पितृपक्ष मेला 2026 कब शुरू होगा?
गयाजी पितृपक्ष मेला 2026 की शुरुआत 25 सितंबर 2026 से होगी। इस बार पर्यटन विभाग ने करीब 50 लाख श्रद्धालुओं के आगमन को ध्यान में रखते हुए तैयारियाँ की हैं।
गयाजी में पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं की संख्या कितनी बढ़ी है?
पर्यटन विभाग के आँकड़ों के अनुसार 2022 में 9.40 लाख श्रद्धालु आए थे, जो 2025 में बढ़कर 34.79 लाख हो गए — यानी चार वर्षों में लगभग चार गुना वृद्धि। 2026 में यह संख्या 50 लाख तक पहुँचने का अनुमान है।
गयाजी पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं के लिए क्या सुविधाएँ होंगी?
इस बार 2,500 बेड की टेंट सिटी, 1,000 बेड की धर्मशाला, पुनपुन घाट पर 5,000 क्षमता का पंडाल, ई-रिक्शा सेवा, पर्यटक सूचना केंद्र, हेल्पलाइन और प्रशिक्षित गाइड की व्यवस्था की जा रही है। आवास, परिवहन, पिंडदान और भोजन की सुविधाएँ एकसाथ उपलब्ध कराई जाएंगी।
गयाजी में पिंडदान का धार्मिक महत्व क्या है?
गयाजी हिंदू धर्म में पितृपक्ष के दौरान पिंडदान के लिए सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है। यहाँ पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए श्रद्धालु देश-विदेश से आकर पिंडदान करते हैं, जिसे हिंदू परंपरा में पितृऋण से मुक्ति का माध्यम माना जाता है।
गयाजी पितृपक्ष मेले में विदेशी पर्यटक भी आते हैं?
हाँ, आँकड़ों के अनुसार 2024 में 1 लाख 55 हज़ार विदेशी पर्यटक गयाजी पहुँचे थे, जो अब तक का सबसे अधिक है। 2023 में यह संख्या 82 हज़ार थी, जो 2022 के 1,518 की तुलना में नाटकीय वृद्धि दर्शाती है।
राष्ट्र प्रेस
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