बिहार में कृषि ड्रोन से 2,85,160 एकड़ में छिड़काव का लक्ष्य, ₹11.81 करोड़ स्वीकृत: विजय कुमार सिन्हा
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026 27 में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत चतुर्थ कृषि रोड मैप के अंतर्गत कृषि ड्रोन से राज्य के 2,85,160 एकड़ फसल क्षेत्र में कीटनाशी एवं तरल उर्वरक छिड़काव का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए ₹11 करोड़ 81 लाख 30 हजार 440 रुपए स्वीकृत किए गए हैं और यह कार्यक्रम राज्य के सभी 38 जिलों में एक साथ लागू किया जा रहा है।
मुख्य घोषणा और लक्ष्य
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 14 सितंबर 2026 को पटना में जानकारी देते हुए कहा कि बिहार की खेती को परंपरागत तरीकों के साथ साथ आधुनिक तकनीक से जोड़ने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, "कृषि ड्रोन से कम समय और कम श्रम में बड़े क्षेत्र में तेज़ी एवं प्रभावी तरीके से छिड़काव किया जा सकेगा।" मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम से किसानों के समय और श्रम की बचत होगी तथा फसल प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा, जिससे उत्पादकता और आय में वृद्धि संभव होगी।
गौरतलब है कि अब तक राज्य में 24,789 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से छिड़काव किया जा चुका है, जो इस योजना की प्रारंभिक सफलता को दर्शाता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के एकीकरण पर जोर दिया जा रहा है।
किसानों की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया
योजना के तहत कृषि विभाग के प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) पोर्टल पर पंजीकृत किसान ही इस सुविधा के पात्र होंगे। किसान देश के किसी भी कोने से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। प्रत्येक किसान को प्रति सीजन अधिकतम 15 एकड़ क्षेत्र में अनुदानित दर पर छिड़काव की सुविधा मिलेगी। एक फसल या सीजन में अधिकतम दो छिड़काव का लाभ दिया जा सकेगा।
कृषि विभाग ने सभी जिलों में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और किसानों से DBT पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने की अपील की गई है।
छिड़काव में क्या क्या शामिल
फसल की अवस्था और कीट व्याधि अथवा खरपतवार के प्रकोप के अनुसार कीटनाशी, फफूंदनाशी, खरपतवारनाशी, पादप वृद्धिनियामक तथा विभिन्न प्रकार के तरल उर्वरकों का ड्रोन से छिड़काव कराया जाएगा। विभाग समेकित कीट प्रबंधन को प्राथमिकता दे रहा है और रासायनिक कीटनाशी के प्रयोग को अंतिम उपाय के रूप में अपनाने पर बल दिया जा रहा है।
आर्थिक क्षति स्तर तक कीट एवं व्याधि पहुँचने पर आवश्यकता के अनुसार कीटनाशी और फफूंदनाशी का उपयोग किया जा सकेगा। साथ ही, फसल की अवस्था के अनुरूप तरल उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव भी ड्रोन के माध्यम से संभव होगा।
अनुदान व्यवस्था
जैव कीटनाशी, रासायनिक कीटनाशी, खरपतवारनाशी और तरल पोषक तत्वों के छिड़काव पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार किसानों को अनुदान मिलेगा। किसान कीट व्याधि एवं खरपतवार नियंत्रण तथा तरल पोषक तत्वों के छिड़काव के लिए अलग अलग आवेदन कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक लचीली और सुलभ बनेगी।
आम जनता और किसानों पर असर
कृषि मंत्री सिन्हा के अनुसार ड्रोन तकनीक कृषि व्यवस्था को स्मार्ट, आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में, जहाँ बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसान हैं, यह योजना श्रम की कमी और फसल नुकसान जैसी दीर्घकालिक समस्याओं का तकनीकी समाधान प्रस्तुत करती है। आने वाले खरीफ और रबी सीजन में इसके व्यापक असर की उम्मीद की जा रही है।