यूपी कानून-व्यवस्था पर सपा का हमला: धर्म-जाति देखकर हो रही कार्रवाई, NTA पेपर लीक पर भी निशाना
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) ने 29 मई को लखनऊ में उत्तर प्रदेश सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई अपराध की गंभीरता के आधार पर नहीं, बल्कि अपराधी के धर्म और जाति को देखकर की जा रही है। पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने यह बयान देते हुए सरकार पर समाज को बाँटने वाली राजनीति करने का आरोप लगाया।
सपा का मुख्य आरोप
फखरुल हसन चांद ने कहा कि समाजवादी पार्टी की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है — गुंडे और माफिया का कोई धर्म या जाति नहीं होती, वे केवल अपराधी होते हैं। उनके अनुसार, ऐसे तत्व समाज में भय और दहशत फैलाते हैं और निर्दोष नागरिकों को नुकसान पहुँचाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार इन्हीं अपराधियों का धर्म देखकर कार्रवाई तय करती है, जो कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है।
बेरोज़गारी, महंगाई और भ्रष्टाचार पर सवाल
सपा प्रवक्ता ने कहा कि आज व्यापारी, किसान और युवा — सभी परेशान हैं और जनता में भय का माहौल है। उनके अनुसार, सरकार के पास बेरोज़गारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे ज्वलंत मुद्दों का कोई ठोस जवाब नहीं है, इसलिए वह असली मुद्दों से ध्यान हटाकर धर्म और जाति की राजनीति में उलझी हुई है।
चांद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के धार्मिक आयोजनों और कानून-व्यवस्था से जुड़े बयानों का भी उल्लेख किया और कहा कि इस प्रकार के बयान समाज में तनाव को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह भय और सख्ती की राजनीति से बाहर निकले और वास्तविक विकास एवं कानून-व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करे।
NTA और NEET पेपर लीक पर सपा की माँग
सपा प्रवक्ता ने NEET UG पेपर लीक मामले पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के गठन के बाद से पेपर लीक की घटनाएँ बार-बार सामने आई हैं, जो अत्यंत गंभीर हैं और देश के युवाओं के भविष्य को दाँव पर लगाती हैं।
चांद ने स्पष्ट किया कि केवल अदालत में जवाब दाखिल करने से जिम्मेदारी तय नहीं होती। उन्होंने माँग की कि जिन अधिकारियों या व्यक्तियों की लापरवाही या मिलीभगत से ऐसी घटनाएँ हुई हैं, उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ अभी से शुरू हो चुकी हैं और विपक्षी दल सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति बना रहे हैं। गौरतलब है कि सपा पहले भी कई अवसरों पर योगी सरकार की कानून-व्यवस्था नीति पर चयनात्मक कार्रवाई के आरोप लगा चुकी है। आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा विधानसभा और सड़क — दोनों स्तरों पर और तेज़ होने की संभावना है।