नेपाल ने बनाया 'एनवायरनमेंट डिप्लोमेसी डिवीजन', 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद जलवायु कूटनीति को मिला संस्थागत ढाँचा
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने 20 सितंबर 2026 को पहली बार एक समर्पित 'एनवायरनमेंट डिप्लोमेसी डिवीजन' की स्थापना की है — यह कदम देश में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद उठाया गया है, जिसमें अब तक 1,411 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं। नया विभाग जलवायु परिवर्तन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों को संस्थागत और समन्वित रूप देने के उद्देश्य से बनाया गया है।
26 अगस्त की बाढ़ और तबाही का पैमाना
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के आँकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त की बाढ़ में बह गए 1,411 लोगों के शव अब तक बरामद किए जा चुके हैं, जबकि शनिवार शाम तक 5,875 लोग लापता थे। लापता लोगों में नेपाली नागरिकों के अलावा विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु-जनित आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता पर वैश्विक बहस तेज़ हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता वैश्विक तापमान हिमालय में एक पहाड़ी ढलान के टूटने की संभावित वजहों में से एक हो सकता है, जिसके बाद नेपाल में यह भयानक बाढ़ आई।
वैज्ञानिक क्या कहते हैं
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समूह 'वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन' (WWA) ने पिछले हफ्ते जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि मानवीय गतिविधियों के कारण बढ़े वैश्विक तापमान से ग्लेशियर पतले हुए हैं और पहाड़ों पर दीर्घकाल से जमी बर्फ वाली ज़मीन यानी परमाफ्रॉस्ट पिघली है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन बदलावों से हिमालय की एक पहाड़ी ढलान कमज़ोर और अस्थिर हुई होगी, जो 26 अगस्त को टूट गई। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि बढ़ते तापमान से चट्टानों की दरारों में जमी बर्फ पिघली, जिससे चट्टानों के बीच की पकड़ कमज़ोर हुई और पिघला हुआ पानी पहले से मौजूद भूगर्भीय कमज़ोरियों को और अस्थिर कर सका। WWA वैज्ञानिकों का वह अंतरराष्ट्रीय समूह है जो यह आकलन करता है कि जलवायु परिवर्तन किसी विशेष चरम मौसमी घटना की संभावना और तीव्रता को किस हद तक प्रभावित करता है।
नए विभाग का उद्देश्य और ढाँचा
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा, 'जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर और इससे पैदा हो रही नई चुनौतियों से निपटने के लिए एक अलग संस्थागत व्यवस्था की ज़रूरत को देखते हुए मंत्रालय ने यह विभाग बनाने का फैसला किया है।'
मंत्रालय के अनुसार, नया विभाग जलवायु एवं पर्यावरण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाएगा और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय रखेगा। नेपाल राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पर्यावरण एवं जलवायु संरक्षण से जुड़े मुद्दों में पहले से सक्रिय रहा है — नया विभाग इन प्रयासों को अधिक व्यवस्थित रूप देगा।
विदेश मंत्री शिशिर खनाल का बयान
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि नेपाल अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जलवायु कूटनीति को लेकर लगातार सक्रिय रहा है, लेकिन अब इन प्रयासों को और अधिक संस्थागत रूप देने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'जलवायु कूटनीति को केवल एक सम्मेलन से दूसरे सम्मेलन या अन्य अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भाग लेने से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।'
खनाल ने यह भी जोड़ा कि जलवायु कूटनीति सिर्फ आपदाओं तक सीमित न रहे — इसके जरिए नेपाल को अपनी जलवायु संबंधी प्राथमिकताओं और पहलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार उठाना चाहिए। भविष्य में ज़रूरत और काम के बोझ के आधार पर इस विभाग के ढाँचे को और मज़बूत किया जा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में जलवायु मुद्दा उठाने की तैयारी
विदेश मंत्रालय का यह कदम संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से ठीक पहले उठाया गया है। नेपाल इस बैठक में जलवायु परिवर्तन और नेपाल जैसे देशों पर उसके बढ़ते असर का मुद्दा प्रमुखता से उठाने की योजना बना रहा है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह नेपाली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए 22 सितंबर को न्यूयॉर्क के लिए रवाना होंगे और 24 सितंबर को महासभा की जनरल डिबेट को संबोधित करने वाले हैं। गौरतलब है कि यह नेपाल के लिए अपने जलवायु एजेंडे को नए संस्थागत ढाँचे के साथ वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का पहला मौका होगा।