संतकबीरनगर: गणेश विसर्जन जुलूस में बवाल, सपा सांसद पप्पू निषाद की गाड़ी पर पथराव; दोनों पक्षों पर FIR
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में 18 सितंबर 2026 की रात गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद के काफिले और जुलूस में शामिल लोगों के बीच हिंसक विवाद हो गया। बखिरा थाना क्षेत्र के अमरडोभा चौराहे पर हुई इस घटना में सांसद की गाड़ी का शीशा टूट गया और कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए। 20 सितंबर 2026 को पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं।
घटनाक्रम: कैसे बढ़ा बवाल
सांसद लक्ष्मीकांत निषाद की तहरीर के मुताबिक, 18 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे वह अपने सहयोगियों और सुरक्षाकर्मियों के साथ बेलहर कला स्थित अपने आवास की ओर जा रहे थे। अमरडोभा चौराहे पर गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस मौजूद था। पुलिस की मदद से काफिले के वाहनों को भीड़ के बीच से निकाला जा रहा था।
सांसद का कथित आरोप है कि इसी दौरान जुलूस में शामिल कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी और काफिले के अन्य वाहनों पर ईंट-पत्थर और लाठी-डंडों से हमला किया, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हुए। उन्होंने पुलिस से वीडियोग्राफी की जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
दूसरे पक्ष का बयान
संतोषपुर निवासी विशाल कुमार ने 20 सितंबर को बखिरा थाने में दी गई शिकायत में अलग ही तस्वीर पेश की है। विशाल के अनुसार, चौराहे पर एक डीजे का जनरेटर खराब हो जाने से संगीत बंद हो गया और इसी कारण जुलूस रुक गया।
विशाल का कथित आरोप है कि इसी दौरान सांसद पप्पू निषाद और उनके समर्थकों की तीन-चार गाड़ियाँ हूटर बजाते हुए जुलूस के बीच से निकलने लगीं, जिस दौरान वह सांसद की गाड़ी की चपेट में आकर गिर गया और उसे कमर में चोट आई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विरोध करने पर सांसद के समर्थकों ने उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज की। विशाल का कहना है कि पथराव जुलूस की ओर से इसी घटनाक्रम के जवाब में हुआ।
दोनों पक्षों पर FIR, SC/ST एक्ट भी शामिल
पुलिस ने सांसद लक्ष्मीकांत निषाद की तहरीर के आधार पर जुलूस में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, विशाल कुमार की शिकायत पर सांसद, जिला पंचायत सदस्य विश्वकेतु यादव और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। विशाल की शिकायत में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम समेत अन्य धाराओं का उल्लेख है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब उत्तर प्रदेश में त्योहारी मौसम के दौरान सांप्रदायिक और राजनीतिक तनाव के मामलों में सतर्कता बढ़ी हुई है। एससी/एसटी अधिनियम की धाराएँ जोड़े जाने से मामले की गंभीरता और भी बढ़ गई है।
जांच की स्थिति
पुलिस के अनुसार, घटना के दौरान मौके पर मौजूद अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की भूमिका, साथ ही उपलब्ध वीडियो फुटेज की जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दोनों पक्षों के आरोपों की पड़ताल के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है और प्रशासन स्थिति पर नज़र बनाए हुए है।