20 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का मेरठ में पहला शो, 1 लाख दर्शकों ने देखे 9 हॉक विमानों के करतब

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का मेरठ में पहला शो, 1 लाख दर्शकों ने देखे 9 हॉक विमानों के करतब

सारांश

मेरठ के आसमान में पहली बार सूर्यकिरण का जादू — 9 हॉक विमानों ने 5 मीटर से कम दूरी पर उड़ान भरी, तिरंगे रंगों का धुआँ छोड़ा, और 1 लाख दर्शकों को रोमांचित किया। एशिया की एकमात्र नौ-विमान एरोबैटिक टीम का यह 30 साल का सफर अब भारत के स्वदेशी गौरव का प्रतीक बन चुका है।

मुख्य बातें

सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने 19-20 सितंबर 2026 को मेरठ में पहली बार एयर शो प्रस्तुत किया।
1 लाख से अधिक दर्शकों ने शो देखा, जिनमें एनसीसी कैडेट और एनएसएस स्वयंसेवक शामिल थे।
टीम के 9 हॉक एमके-132 विमानों के बीच करतबों के दौरान दूरी 5 मीटर से कम रही।
नासिक बेस रिपेयर डिपो द्वारा स्वदेशी तकनीक से विमानों में केसरिया, सफेद, हरे रंग का धुआँ उत्सर्जन जोड़ा गया।
1996 में स्थापित यह टीम एशिया की एकमात्र नौ-विमान एरोबैटिक टीम है और 800 से अधिक एयर शो कर चुकी है।
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने शो को अनुशासन और पेशेवर क्षमता का 'शानदार मेल' बताया।

भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने पहली बार मेरठ के आसमान में अपने रोमांचक हवाई करतबों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। 19 और 20 सितंबर 2026 को आयोजित इस दो दिवसीय एयर शो में 1 लाख से अधिक दर्शक पहुँचे, जिनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी, एनसीसी कैडेट और राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक शामिल रहे। विशेष उल्लेखनीय यह रहा कि टीम के तीन सदस्य मेरठ से ही हैं, जिनमें दो पायलट भी शामिल हैं।

मुख्य घटनाक्रम

सूर्यकिरण टीम ने नौ लाल और सफेद रंग के हॉक एमके-132 विमानों के साथ आसमान में लूप, बैरल रोल, उल्टी उड़ान और प्रसिद्ध डीएनए करतब जैसे जटिल युद्धाभ्यास प्रस्तुत किए। इन विमानों का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा भारत में ही किया जाता है। वर्ष 2026 के प्रशिक्षण सत्र के सफल समापन के बाद यह प्रदर्शन टीम की नई उड़ान संरचना की पहली सार्वजनिक झलक थी।

इस एयर शो की सबसे चुनौतीपूर्ण विशेषता यह रही कि कई करतबों के दौरान विमानों के बीच की दूरी 5 मीटर से भी कम रखी गई। इतनी सूक्ष्म दूरी पर एक साथ उड़ना पायलटों के असाधारण कौशल, अनुशासन और आपसी विश्वास का प्रमाण है।

स्वदेशी तकनीक की छाप

हॉक एमके-132 विमानों में भारतीय वायुसेना के नासिक स्थित बेस रिपेयर डिपो द्वारा स्वदेशी स्तर पर विशेष धुआं-उत्सर्जन उपकरण लगाए गए हैं। इन उपकरणों की मदद से विमान केसरिया, सफेद और हरे रंग की धारियाँ बनाते हैं, जिससे आसमान तिरंगे के रंगों से सज जाता है। यह स्वदेशी नवाचार भारत की 'आत्मनिर्भर रक्षा' की दिशा में एक सार्थक कदम है।

सरकार की प्रतिक्रिया

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 20 सितंबर को एयर शो में शामिल होकर प्रदर्शन को अनुशासन, सटीकता, टीमवर्क और पेशेवर क्षमता का शानदार मेल बताया। उन्होंने कहा कि यह भारतीय वायुसेना की गौरवशाली क्षमताओं को दर्शाता है। सेठ ने यह भी रेखांकित किया कि अपने 30 वर्षों के सफर में सूर्यकिरण टीम 800 से अधिक एयर शो कर चुकी है।

सूर्यकिरण की विरासत और अंतरराष्ट्रीय पहचान

1996 में स्थापित सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम एशिया की एकमात्र नौ-विमान वाली एरोबैटिक टीम है और विश्व की चुनिंदा ऐसी टीमों में शामिल है। यह टीम चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और दुबई में अंतरराष्ट्रीय एयर शो में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी है।

गौरतलब है कि तीन दशकों के इस सफर में सूर्यकिरण केवल एक प्रदर्शन दल नहीं रहा — इसे भारतीय वायुसेना का 'राजदूत' भी माना जाता है, जो जहाँ भी पहुँचती है, वहाँ भारत की रक्षा उत्कृष्टता की छाप छोड़ती है।

युवाओं पर असर और आगे की राह

इस एयर शो का एक प्रमुख उद्देश्य युवाओं को रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रेरित करना भी था। एनसीसी कैडेटों और एनएसएस स्वयंसेवकों की बड़ी उपस्थिति इस बात का संकेत है कि यह आयोजन भर्ती-प्रेरणा के एक माध्यम के रूप में भी काम कर रहा है। आने वाले वर्षों में सूर्यकिरण टीम अपनी नई उड़ान संरचनाओं के साथ और अधिक शहरों में इस तरह के प्रदर्शन की संभावना तलाश रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर जानकारी और संपर्क का अभाव है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम क्या है?
सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम भारतीय वायुसेना की प्रमुख हवाई प्रदर्शन इकाई है, जिसकी स्थापना 1996 में हुई थी। यह एशिया की एकमात्र नौ-विमान वाली एरोबैटिक टीम है और 30 वर्षों में 800 से अधिक एयर शो कर चुकी है।
मेरठ एयर शो में क्या खास था?
यह सूर्यकिरण टीम का मेरठ में पहला प्रदर्शन था, जिसमें 9 हॉक एमके-132 विमानों ने 5 मीटर से कम दूरी पर उड़ान भरी। स्वदेशी तकनीक से विमानों ने केसरिया, सफेद और हरे रंग की धारियाँ बनाईं, जिससे आसमान तिरंगे से सज गया।
मेरठ एयर शो में कितने दर्शक पहुँचे?
वायुसेना के अनुसार 19 और 20 सितंबर 2026 को आयोजित इस दो दिवसीय एयर शो में 1 लाख से अधिक दर्शक पहुँचे। इनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी, एनसीसी कैडेट और राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक शामिल थे।
हॉक एमके-132 विमान में क्या स्वदेशी बदलाव किया गया है?
भारतीय वायुसेना के नासिक स्थित बेस रिपेयर डिपो ने विमानों में विशेष धुआँ-उत्सर्जन उपकरण लगाए हैं, जो केसरिया, सफेद और हरे रंग का धुआँ छोड़ते हैं। इन विमानों का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा भारत में होता है।
सूर्यकिरण टीम ने विदेशों में कहाँ-कहाँ प्रदर्शन किया है?
सूर्यकिरण टीम चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और दुबई में अंतरराष्ट्रीय एयर शो में प्रदर्शन कर चुकी है। इन आयोजनों में टीम ने भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता और उत्कृष्टता का प्रतिनिधित्व किया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले