विक्रम-1 की 18 जुलाई को पहली टेस्ट फ्लाइट: स्काईरूट एयरोस्पेस रचेगी इतिहास, भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट उड़ान भरेगा
सारांश
मुख्य बातें
निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने 16 जुलाई 2025 को घोषणा की कि वह 18 जुलाई को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC-SHAR) के पहले लॉन्च पैड से अपने विक्रम-1 ऑर्बिटल रॉकेट की पहली टेस्ट फ्लाइट का प्रयास करेगी। यह पहली बार होगा जब किसी भारतीय निजी कंपनी द्वारा पूर्णतः डिज़ाइन और विकसित किया गया ऑर्बिटल श्रेणी का रॉकेट भारतीय ज़मीन से अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरेगा।
मिशन का विवरण और पेलोड
'मिशन आगमन' नाम का यह अभियान स्काईरूट का दूसरा मिशन है। विक्रम-1 अपने साथ कई टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन पेलोड ले जाएगा, जिनमें ग्राहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डीक्यूब्ड और स्काईरूट के अपने SCOPE पेलोड शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कॉसमोस डायमंड्स की कलाकृति 'कॉस्मिक ब्लूम' और एक माइक्रो-आर्ट पीस भी इस मिशन का हिस्सा होंगे।
कंपनी के अनुसार, संबंधित अधिकारियों ने लॉन्च के लिए आवश्यक एयरस्पेस और मैरिटाइम नोटिस जारी कर दिए हैं। विक्रम-1 के उड़ान मार्ग और संभावित प्रभाव क्षेत्र के आसपास के प्रतिबंधित क्षेत्रों को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया जा चुका है।
रॉकेट की तकनीकी विशेषताएँ
करीब सात मंजिला ऊँचाई वाला विक्रम-1 एक मल्टी-स्टेज रॉकेट है, जिसे पूरी तरह कार्बन कॉम्पोजिट स्ट्रक्चर से निर्मित किया गया है। इसमें कंपनी द्वारा स्वयं विकसित प्रोपल्शन सिस्टम का उपयोग किया गया है, जिसमें 3D-प्रिंटेड इंजन और उच्च क्षमता वाले सॉलिड-फ्यूल बूस्टर शामिल हैं।
इस पहली टेस्ट फ्लाइट का लक्ष्य 60 डिग्री झुकाव के साथ 450 किलोमीटर ऊँचाई की कक्षा तक पहुँचना है। विक्रम-1 को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि यह लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 350 किलोग्राम तक के छोटे सैटेलाइट स्थापित कर सके।
CEO का बयान और कंपनी का दृष्टिकोण
स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन कुमार चंदाना ने कहा कि विक्रम-1 की जमीनी स्तर पर हर संभव परीक्षण प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और अब कंपनी पहली बार वास्तविक उड़ान के दौरान उसके प्रदर्शन को देखने के लिए उत्साहित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक टेस्ट फ्लाइट है और इससे कंपनी को कई महत्वपूर्ण तकनीकी आँकड़े प्राप्त होंगे।
चंदाना ने यह भी बताया कि छोटे सैटेलाइट लॉन्च का वैश्विक बाज़ार फिलहाल आपूर्ति की कमी से जूझ रहा है, जबकि अंतरिक्ष आधारित सेवाओं की माँग लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार, यह परिस्थिति स्काईरूट जैसी कंपनियों के लिए नए व्यावसायिक अवसर उत्पन्न कर रही है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि स्काईरूट एयरोस्पेस इससे पहले 18 नवंबर 2022 को विक्रम-एस की सफल सब-ऑर्बिटल उड़ान पूरी कर चुकी है, जो भारतीय धरती से अंतरिक्ष तक पहुँचने वाला पहला निजी रॉकेट बना था। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेज़ी से विकसित हो रहा है और सरकार ने भी इस क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की नीति अपनाई है।
विक्रम-1 की सफल उड़ान भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर सकती है जहाँ निजी कंपनियाँ ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करने में सक्षम हैं। आने वाले समय में इस मिशन से प्राप्त तकनीकी आँकड़े स्काईरूट के नियमित व्यावसायिक लॉन्च कार्यक्रम की नींव रखेंगे।