गगनयान मिशन: सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का 175 टन थ्रस्ट पर सफल परीक्षण, इसरो प्रमुख बोले — पहली मानव रहित उड़ान जल्द
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने शनिवार, 27 जून 2026 को बेंगलुरु में पुष्टि की कि गगनयान मिशन की तैयारियाँ निर्णायक दौर में पहुँच चुकी हैं और पहली मानव रहित उड़ान की तारीख शीघ्र घोषित की जाएगी। यह घोषणा 24 जून 2026 को तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) में स्वदेशी सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के पावर हेड टेस्ट आर्टिकल (PHTA) के सफल 'हॉट टेस्ट' के बाद आई है।
परीक्षण में क्या हुआ
24 जून 2026 को किया गया यह परीक्षण इस शृंखला का आठवाँ हॉट टेस्ट था। इसमें इंजन को पहली बार 175 टन थ्रस्ट — यानी लगभग 88 प्रतिशत क्षमता — पर सफलतापूर्वक संचालित किया गया। इससे पहले के परीक्षण 94 टन (47 प्रतिशत) और 120 टन (60 प्रतिशत) थ्रस्ट स्तर पर किए गए थे।
परीक्षण के दौरान मुख्य टर्बोपंप ने 400 बार और 500 बार आउटलेट प्रेशर पर भी अपेक्षित प्रदर्शन किया। इसरो के अनुसार, परीक्षण के सभी तकनीकी मानक पूर्वनिर्धारित अपेक्षाओं के अनुरूप रहे। गौरतलब है कि पावर हेड टेस्ट आर्टिकल में इंजन के सभी प्रमुख सिस्टम शामिल होते हैं, परंतु थ्रस्ट चैंबर को इसमें नहीं जोड़ा जाता — अर्थात लगभग 90 प्रतिशत थ्रस्ट लोड का परीक्षण पूरा हो चुका है।
इसरो प्रमुख की प्रतिक्रिया
डॉ. नारायणन ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'गगनयान मिशन में किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जा सकता। इसलिए इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने से पहले सभी तकनीकों और सुरक्षा प्रणालियों का कई चरणों में परीक्षण किया जाएगा।' उन्होंने यह भी बताया कि लॉन्च व्हीकल की 'ह्यूमन रेटिंग' और सभी आवश्यक सुरक्षा प्रणालियों का विकास पूरा हो चुका है।
उन्होंने सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के इस परीक्षण को इसरो के लिए एक बड़ी उपलब्धि करार दिया और कहा कि अब 200 टन (100 प्रतिशत क्षमता) पर पूर्ण इंजन परीक्षण की तैयारियाँ चल रही हैं, जिसकी तारीख भी जल्द घोषित की जाएगी।
গগनयान मिशन की रूपरेखा
इसरो की योजना के अनुसार, वास्तविक अंतरिक्ष यात्रियों को कक्षा में भेजने से पहले तीन मानव रहित (अनक्रूड) मिशन संचालित किए जाएंगे। पहले मानव रहित मिशन की तैयारियाँ अंतिम चरण में बताई जा रही हैं। यह मिशन भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की आधारशिला है और इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में संचालित किया जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में तेज़ी से आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ रहा है — चंद्रयान-3 की सफलता के बाद गगनयान देश का अगला बड़ा अंतरिक्ष लक्ष्य है।
स्वदेशी इंजन का महत्व
सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का विकास इसरो के दीर्घकालिक प्रक्षेपण क्षमता विस्तार कार्यक्रम का हिस्सा है। यह इंजन तरल ऑक्सीजन और केरोसीन पर चलता है और भविष्य के भारी प्रक्षेपण यानों के लिए अनिवार्य माना जा रहा है। IPRC महेंद्रगिरि में किया गया यह परीक्षण स्वदेशी प्रोपल्शन तकनीक में भारत की बढ़ती दक्षता का प्रमाण है।
इसरो के वैज्ञानिकों का विश्वास है कि इस सफलता के बाद 200 टन पर पूर्ण इंजन परीक्षण की राह अब और सुगम हो गई है, जो गगनयान और भविष्य के भारतीय अंतरिक्ष अभियानों के लिए निर्णायक कदम होगा।