6 अगस्त 2026
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गगनयान मिशन: HLVM3 के सभी प्रोपल्शन परीक्षण पूरे, 2026 की चौथी तिमाही में पहला मानव रहित प्रक्षेपण

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गगनयान मिशन: HLVM3 के सभी प्रोपल्शन परीक्षण पूरे, 2026 की चौथी तिमाही में पहला मानव रहित प्रक्षेपण

सारांश

গগনযান की राह में बड़ी सफलता — HLVM3 के सभी प्रोपल्शन चरण परीक्षित, क्रू एस्केप सिस्टम प्रमाणित। 2026 की चौथी तिमाही में 'व्योममित्र' की उड़ान और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का लक्ष्य — भारत चौथी अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की दहलीज़ पर है।

मुख्य बातें

HLVM3 के सभी प्रोपल्शन चरणों और संरचनाओं की ग्राउंड टेस्टिंग सफलतापूर्वक पूरी हुई।
2026 की चौथी तिमाही में पहला मानव रहित प्रायोगिक मिशन; अर्ध-मानव रोबोट 'व्योममित्र' को भेजा जाएगा।
2027 तक दो और मानव रहित मिशन प्रस्तावित, इसके बाद पहला मानवयुक्त कक्षीय मिशन।
क्रू एस्केप सिस्टम (CES) के सभी 5 प्रकार के मोटरों का विकास और स्टैटिक परीक्षण पूरा।
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को 2035 तक परिचालन में लाने की योजना; पहले मॉड्यूल BAS-01 को मंजूरी मिली।
सफलता पर भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद स्वदेशी यान से मानव अंतरिक्ष में भेजने वाला विश्व का चौथा देश बनेगा।

भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान ने एक निर्णायक पड़ाव पार कर लिया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 6 अगस्त 2026 को राज्यसभा में जानकारी दी कि ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल (HLVM3) के समस्त प्रोपल्शन चरणों और संरचनाओं का विकास एवं ग्राउंड टेस्टिंग सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा होने के करीब है, जिन्होंने अपने यात्रियों को स्वदेशी प्रक्षेपण यान से अंतरिक्ष में भेजा है।

मुख्य तकनीकी उपलब्धियाँ

HLVM3 के क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के प्रोपल्शन सिस्टम का विकास, परीक्षण और प्रमाणन पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS) का इंजीनियरिंग मॉडल, थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम, डिसेलेरेशन सिस्टम, क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम और संपूर्ण एवियोनिक्स प्रणाली का भी सफल परीक्षण किया जा चुका है।

अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण क्रू एस्केप सिस्टम (CES) के लिए आवश्यक सभी 5 प्रकार के मोटरों का विकास पूरा हो गया है और उनके स्टैटिक परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं।

मिशन की आगामी रूपरेखा

डॉ. सिंह ने बताया कि 2026 की चौथी तिमाही में गगनयान का पहला मानव रहित प्रायोगिक मिशन प्रक्षेपित करने का लक्ष्य है। इस उड़ान में 'व्योममित्र' नामक अर्ध-मानव रोबोट को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, जो उन नई तकनीकों का परीक्षण करेगा जिन्हें पहली बार गगनयान कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित किया गया है।

इसके बाद 2027 तक दो और मानव रहित मिशन संचालित किए जाएंगे, जिनका विन्यास पहले मानवयुक्त मिशन जैसा होगा। इन परीक्षण मिशनों के सफल समापन के पश्चात भारत का पहला मानवयुक्त कक्षीय अंतरिक्ष मिशन आरंभ किया जाएगा।

बुनियादी ढाँचा तैयार

अंतरिक्ष विभाग के अनुसार, मिशन के लिए आवश्यक प्रमुख अवसंरचना तैयार कर ली गई है। इनमें ऑर्बिटल मॉड्यूल प्रिपरेशन फैसिलिटी, गगनयान कंट्रोल सेंटर, क्रू ट्रेनिंग फैसिलिटी और दूसरे लॉन्च पैड में किए गए संशोधन शामिल हैं।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की योजना

डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि भारत 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को परिचालन में लाने की योजना पर कार्य कर रहा है। इसरो ने 5 मॉड्यूल वाले इस अंतरिक्ष स्टेशन की समग्र संरचना तैयार कर ली है। सरकार ने पहले मॉड्यूल BAS-01 के विकास और प्रक्षेपण को मंजूरी दे दी है, और इसरो के विभिन्न केंद्रों में इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी विकास का कार्य तेज़ गति से जारी है।

ऐतिहासिक महत्व

गौरतलब है कि गगनयान के सफल होने पर भारत, अमेरिका, रूस और चीन के बाद स्वदेशी साधनों से मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज़ी से बढ़ रही है और भारत अपनी अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को नई ऊँचाई देने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि গগনযান की मूल प्रक्षेपण तिथि कई बार खिसक चुकी है। असली कसौटी यह होगी कि 'व्योममित्र' मिशन के बाद मानवयुक्त उड़ान की समयसीमा कितनी विश्वसनीय रहती है। 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, और BAS-01 मॉड्यूल की मंजूरी सकारात्मक संकेत है — पर यह दौड़ अभी लंबी है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

গগনযান मिशन में अब तक क्या-क्या हासिल हुआ है?
HLVM3 के सभी प्रोपल्शन चरणों की ग्राउंड टेस्टिंग, क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के प्रोपल्शन सिस्टम का प्रमाणन, ECLSS इंजीनियरिंग मॉडल, थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम और क्रू एस्केप सिस्टम के पाँचों मोटरों का सफल परीक्षण पूरा हो चुका है। साथ ही গগनযान कंट्रोल सेंटर और क्रू ट्रेनिंग फैसिलिटी जैसी बुनियादी अवसंरचना भी तैयार है।
'व्योममित्र' कौन है और इसे क्यों भेजा जाएगा?
'व्योममित्र' इसरो द्वारा विकसित एक अर्ध-मानव रोबोट है, जिसे 2026 की चौथी तिमाही में গগনযान के पहले मानव रहित प्रायोगिक मिशन में भेजा जाएगा। यह रोबोट उन नई तकनीकों का परीक्षण और सत्यापन करेगा जो पहली बार গগনযান कार्यक्रम के तहत विकसित की गई हैं, ताकि भविष्य के मानवयुक्त मिशन को सुरक्षित बनाया जा सके।
भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन कब होगा?
2026 की चौथी तिमाही में पहले मानव रहित मिशन ('व्योममित्र') और 2027 तक दो और मानव रहित मिशनों के बाद भारत का पहला मानवयुक्त कक्षीय मिशन प्रक्षेपित किया जाएगा। सटीक तिथि इन परीक्षण मिशनों की सफलता पर निर्भर करेगी।
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की क्या योजना है?
भारत 2035 तक 5 मॉड्यूल वाले भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को परिचालन में लाने की योजना पर काम कर रहा है। सरकार ने पहले मॉड्यूल BAS-01 के विकास और प्रक्षेपण को मंजूरी दे दी है और इसरो के विभिन्न केंद्रों में इंजीनियरिंग कार्य जारी है।
গগনযান सफल होने पर भारत की वैश्विक स्थिति क्या होगी?
গগনযান के सफल होने पर भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद स्वदेशी प्रक्षेपण यान से मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाला विश्व का चौथा देश बन जाएगा। यह उपलब्धि भारत को वैश्विक अंतरिक्ष महाशक्तियों की श्रेणी में स्थापित करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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