इसरो का 175 टन थ्रस्ट पर सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का सफल हॉट टेस्ट, LVM3 अपग्रेड के करीब पहुँचा भारत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित इसरो प्रणोदन परिसर (IPRC) में अपने सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के पावर हेड टेस्ट आर्टिकल (PHTA) का 175 टन थ्रस्ट स्तर पर सफल हॉट टेस्ट पूरा किया है। यह इंजन की पूर्ण रेटेड क्षमता का 88 प्रतिशत है और भारत की अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान प्रणोदन प्रौद्योगिकी के विकास में एक निर्णायक मील का पत्थर है।
परीक्षण का विवरण और उपलब्धि
यह PHTA का उपयोग करके किया गया आठवाँ सफल हॉट टेस्ट है। इस पावर हेड टेस्ट आर्टिकल में थ्रस्ट चैंबर को छोड़कर इंजन के सभी प्रमुख सिस्टम शामिल हैं। इस बार पहली बार इंजन पावरहेड को 175 टन के थ्रस्ट पर संचालित किया गया।
परीक्षण का मुख्य उद्देश्य प्री-बर्नर इग्निशन के बाद बिल्ड-अप चरण में इंजन के प्रदर्शन का अध्ययन करना और उच्च थ्रस्ट स्तर पर स्थिर-अवस्था संचालन को प्रमाणित करना था। इसरो के अनुसार, फायरिंग के दौरान सभी इंजन पैरामीटर अपेक्षित सीमा के भीतर रहे और परीक्षण पूर्वानुमान के अनुरूप संपन्न हुआ।
पिछले परीक्षणों से तुलना
इससे पहले के परीक्षण 94 टन (47 प्रतिशत थ्रस्ट) और 120 टन (60 प्रतिशत थ्रस्ट) पर सफलतापूर्वक पूरे किए गए थे। नवीनतम परीक्षण में इंजन के मुख्य टर्बोपंपों ने डिज़ाइन के अनुरूप प्रदर्शन किया और 400 से 500 बार का आउटलेट दबाव प्रदान किया। यह क्रमिक प्रगति दर्शाती है कि इसरो व्यवस्थित रूप से इंजन को उसकी पूर्ण क्षमता की ओर ले जा रहा है।
LVM3 रॉकेट पर असर
2,000 किलोन्यूटन श्रेणी के LE2000 इंजन द्वारा संचालित सेमी-क्रायोजेनिक प्रणोदन चरण (SC120) को भारत के सबसे भारी परिचालन प्रक्षेपण यान LVM3 के मौजूदा L110 तरल कोर चरण के स्थान पर विकसित किया जा रहा है। इस उन्नयन से रॉकेट की भार वहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने के साथ-साथ समग्र प्रदर्शन और परिचालन दक्षता में भी सुधार अपेक्षित है।
गौरतलब है कि पारंपरिक प्रणोदन प्रणालियों के विपरीत, यह सेमी-क्रायोजेनिक इंजन पर्यावरण अनुकूल और गैर-विषाक्त प्रणोदकों — तरल ऑक्सीजन (LOX) और शुद्ध केरोसिन (जिसे इसरो 'इसरोसीन' कहता है) — का उपयोग करता है।
भविष्य की संभावनाएँ
इस सफल परीक्षण ने इसरो को 200 टन के पूर्ण रेटेड थ्रस्ट पर इंजन का परीक्षण करने की दिशा में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया है। इसरो के अनुसार, उन्नत क्रायोजेनिक ऊपरी चरण के साथ नए सेमी-क्रायोजेनिक चरण को एकीकृत करने से LVM3 की क्षमताएँ उल्लेखनीय रूप से बढ़ेंगी — जिससे उच्च क्षमता वाले उपग्रह प्रक्षेपण, गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण मिशन और भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम को मज़बूती मिलेगी। स्वदेशी सेमी-क्रायोजेनिक इंजन कार्यक्रम अब अपनी पूर्णता के और करीब पहुँच गया है।