सूर्य किरण एयरोबैटिक टीम के 30 साल: 26 मई को एयर चीफ मार्शल एपी सिंह उड़ाएंगे हॉक एमके-132
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना की प्रतिष्ठित सूर्य किरण एयरोबैटिक टीम — जिसे आधिकारिक रूप से 52 शार्क्स स्क्वाड्रन के नाम से जाना जाता है — 27 मई 2026 को अपनी स्थापना के 30 वर्ष पूरे कर रही है। हॉक एमके-132 विमानों से लैस इस टीम ने तीन दशकों में देश-विदेश में 800 से अधिक एयर डिस्प्ले देकर भारत का परचम लहराया है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस ऐतिहासिक अवसर पर 26 मई 2026 को एयर चीफ मार्शल एपी सिंह स्वयं फॉर्मेशन में हॉक एमके-132 उड़ाते नजर आ सकते हैं।
स्थापना और नामकरण की कहानी
सूर्य किरण एयरोबैटिक टीम का गठन 27 मई 1996 को बिदर एयरफोर्स स्टेशन, कर्नाटक में हुआ था। टीम की शुरुआत किरण एमके-2 विमानों से हुई और इसी विमान के नाम पर टीम का नामकरण 'सूर्यकिरण' — अर्थात 'सूर्य की किरणें' — किया गया। सितंबर 1996 में कोयंबटूर में टीम ने अपनी पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी, जिसके बाद से यह सिलसिला अनवरत जारी है।
मई 2006 में टीम को औपचारिक रूप से 52 स्क्वाड्रन 'शार्क्स' का दर्जा दिया गया। इससे पहले यह स्क्वाड्रन मिग-21 एफएल विमानों का संचालन करती थी। वर्ष 2015 में टीम ने किरण एमके-2 की जगह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा लाइसेंस के तहत निर्मित लाल-सफेद रंग के हॉक एमके-132 विमानों को शामिल किया।
30 वर्षों की उपलब्धियाँ
तीन दशकों में 9 विमानों की यह टीम सटीक समन्वय के साथ हैरतअंगेज हवाई करतब पेश करती आई है। टीम ने चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों में अपने करतब दिखाए हैं। हाल ही में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भी टीम ने उड़ान भरकर दर्शकों को रोमांचित किया। गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना इस टीम को अपनी 'राजदूत' मानती है, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की वायु शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है।
एयर चीफ मार्शल की उड़ानों का सिलसिला
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह विभिन्न अवसरों पर अलग-अलग विमानों की कॉकपिट में उड़ान भर चुके हैं। फरवरी 2025 में बेंगलुरु में आयोजित एयरो इंडिया के दौरान उन्होंने एलसीए ट्विन-सीटर तेजस में उड़ान भरी, जिसमें पिछली सीट पर थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मौजूद थे — कथित तौर पर यह पहला अवसर था जब दो सेना प्रमुख एक साथ सिंगल-इंजन फाइटर जेट में उड़े।
अगस्त 2025 में उन्होंने नाल एयर फोर्स स्टेशन, बीकानेर में मिग-21 उड़ाया। 26 सितंबर 2025 को आधिकारिक सेवानिवृत्ति से पहले भी मिग-21 में उड़ान भरी गई। अक्टूबर 2025 में जब सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अंबाला एयरबेस से राफेल जेट में उड़ान भरी, तब एक अन्य राफेल विमान में एयर चीफ मार्शल भी मौजूद थे।
मार्च 2026 में एयर चीफ ने आदमपुर एयरबेस से मिग-29 अपग्रेड विमान उड़ाया। अप्रैल 2026 में अमेरिका दौरे के दौरान उन्होंने नेलिस एयर फोर्स बेस, नेवादा में एफ-15ईएक्स उड़ाया। अब 26 मई 2026 को वे सूर्य किरण टीम के साथ हॉक एमके-132 के फॉर्मेशन में उड़ान भर सकते हैं।
आगे क्या
30 वर्षों की यह यात्रा भारतीय वायुसेना की परिचालन उत्कृष्टता और कूटनीतिक उपस्थिति दोनों का प्रमाण है। सूर्य किरण टीम का यह स्वर्णिम अध्याय आने वाले वर्षों में और अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनों के साथ आगे बढ़ेगा।