30 जुलाई 2026
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भारतीय वायुसेना प्रमुख ने फ्रंटलाइन एयरबेस का दौरा किया, मिग-29 अपग्रेड पर उड़ान भरी

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भारतीय वायुसेना प्रमुख ने फ्रंटलाइन एयरबेस का दौरा किया, मिग-29 अपग्रेड पर उड़ान भरी

सारांश

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने फ्रंटलाइन एयरबेस का दौरा किया और मिग-29 अपग्रेड फाइटर जेट में उड़ान भरी। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की और स्क्वाड्रन के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानकारी ली।

मुख्य बातें

भारतीय वायुसेना प्रमुख ने मिग-29 अपग्रेड फाइटर जेट में उड़ान भरी।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने अपनी ताकत दिखाई।
मिग-29 अपग्रेड के महत्व को समझना आवश्यक है।
फ्रंटलाइन एयरबेस की सुरक्षा तैयारियों का मूल्यांकन किया गया।
मिग-29 की आधुनिक तकनीक और क्षमताओं में सुधार हुआ है।

नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चीन पाकिस्तान की वायुसेना को नए रूप में ढालने में लगा है, जबकि भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर में एक साथ चीन और पाकिस्तान के समक्ष अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है। उस समय पाकिस्तान के चीनी एयर डिफेंस सिस्टम भारतीय हमलों के सामने असफल रहे थे।

ऑपरेशन सिंदूर के तहत पश्चिमी एयर कमांड के सभी एयरबेस सक्रिय थे। इन्हीं में से एक फ्रंटलाइन एयरबेस का दौरा भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने किया। इस दौरे में उन्होंने सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की और तैयारियों का आकलन किया।

दौरे के दौरान वायुसेना प्रमुख ने इसी फ्रंटलाइन एयरबेस से मिग-29 अपग्रेड फाइटर जेट में उड़ान भरने का अनुभव किया। उड़ान से पहले उन्हें ऑपरेशनल फ्लाइंग मिशन के बारे में जानकारी दी गई। लगभग 45 मिनट की इस उड़ान में एयर चीफ खुद मिग-29 अपग्रेड उड़ा रहे थे। इस फॉर्मेशन का नेतृत्व फ्लाइट लेफ्टिनेंट परमिंदर सिंह कर रहे थे।

मिग-29 अपग्रेड स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन शिव कुमार पोहरे ने स्क्वाड्रन के गौरवशाली इतिहास और मौजूदा वायुसेना प्रमुख से इसके संबंधों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह स्क्वाड्रन 1963 में मिग-21 टाइप-74 के साथ स्थापित किया गया था और यह देश का पहला सुपरसोनिक फाइटर स्क्वाड्रन था। इसके बाद मिग-21 को हटाकर इसमें मिग-29 को शामिल किया गया।

ग्रुप कैप्टन शिव कुमार पोहरे ने बताया कि इस साल यह स्क्वाड्रन अपने स्थापना के 63 वर्ष पूरे कर रहा है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह अपने करियर के प्रारंभिक दिनों में इसी स्क्वाड्रन में एक युवा अधिकारी के रूप में उड़ान भर चुके हैं। मिग-29 के अपग्रेड प्रोग्राम में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

इसी स्क्वाड्रन के मिग-21 ने 1971 के युद्ध के दौरान ढाका के गवर्नर हाउस पर स्ट्राइक कर इतिहास रचा था।

भारतीय वायुसेना में मिग-29 को 1987 में शामिल किया गया था। इसे रफाल और मिराज-2000 की तरह इमरजेंसी खरीद के तहत लिया गया था, क्योंकि उस समय पाकिस्तान अमेरिका से एफ-16 जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट हासिल कर रहा था।

वर्तमान में, भारतीय वायुसेना के पास मिग-29 अपग्रेड के तीन स्क्वाड्रन हैं। मिग-29 को क्लोज प्रोटेक्शन इंटरसेप्टर और एयर डिफेंस एयरक्राफ्ट माना जाता है, जो हवा में दुश्मन के जेट को इंटरसेप्ट करने में विशेषज्ञ है।

हाल के वर्षों में इसे नई तकनीकों के साथ अपग्रेड किया गया है। अब मिग-29 लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है और एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग भी कर सकता है। इसके लिए इसमें रीफ्यूलिंग प्रोब जोड़ा गया है। साथ ही इसके रडार और एवियोनिक्स को भी पूरी तरह से आधुनिक बनाया गया है।

इसकी अधिकतम रफ्तार 2.25 मैक, यानी लगभग 2,400 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलों को दागने में सक्षम है। कारगिल युद्ध के दौरान भी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था, जहां इसे कॉम्बैट एयर पेट्रोल मिशनों और बीवीआर मिसाइलों के साथ तैनात किया गया था।

उरी हमले के बाद भारत की संभावित जवाबी कार्रवाई के तनाव के समय पाकिस्तान एयरफोर्स ने कई बार भारतीय सीमा के निकट अपने फाइटर जेट उड़ाए। ऐसे में भारतीय वायुसेना ने जवाबी तैयारी के तहत कई बार मिग-29 को स्क्रैम्बल किया।

पुलवामा हमले के बाद की गई बालाकोट एयर स्ट्राइक के दौरान जब भारतीय वायुसेना का फाइटर पैकेज मिशन पर भेजा गया, तब उस फॉर्मेशन में मिग-29 भी शामिल थे। इसके बाद ऑपरेशन सिंदूर में भी इस लड़ाकू विमान ने अपनी क्षमता का भरपूर प्रदर्शन किया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिग-29 अपग्रेड का क्या महत्व है?
मिग-29 अपग्रेड भारतीय वायुसेना के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इसे आधुनिक तकनीक से लैस करता है और दुश्मनों के जेट को इंटरसेप्ट करने की क्षमता बढ़ाता है।
भारतीय वायुसेना का फ्रंटलाइन एयरबेस क्या है?
फ्रंटलाइन एयरबेस वह स्थान है जहां से वायुसेना के लड़ाकू विमान सीधे ऑपरेशनल मिशनों के लिए उड़ान भरते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर क्या था?
ऑपरेशन सिंदूर एक विशेष मिशन था जिसमें भारतीय वायुसेना ने एक साथ चीन और पाकिस्तान के सामने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।
मिग-29 की अधिकतम रफ्तार क्या है?
मिग-29 की अधिकतम रफ्तार 2.25 मैक, यानी लगभग 2,400 किलोमीटर प्रति घंटा है।
भारतीय वायुसेना में मिग-29 कब शामिल हुआ था?
भारतीय वायुसेना में मिग-29 को 1987 में शामिल किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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